Chetan Rathore
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🏹 जय श्री सियाराम चन्द्र 🚩
#📚कविता-कहानी संग्रह सुन्दर पत्तियाँ घर 🏡 कभी खाली नहीं होते, लोग कम हो जाते..
📚कविता-कहानी संग्रह - कभी खाली नहीं होताः घर बस लोग कम हो जाते हैं भाई कमाने निकल गया, बहन ससुराल चली गई एक ही घर के दो चिराग , दुनिया में खो गए अलग ्अलग से गूंजता " जो आँगन कभी हँसी था वहाँ सन्नाटा सोता हे॰ आज माँ की ऑंखें दरवाज़े पर टिकती हे पिता चुपचाप सब कुछ ढोता है স নমনৌ থী, एक रोटी चार gcsl आज थाली पूरी रह जाती है॰ जिस घर में शोर कम नहीं होता था, घड़ी की टिकनटिक সন सुनाई आती है बहन ससुराल चली गर्ई एक ही घर के दो चिराग , दुनिया में खो गए अलग अलग से गूंजता " जो आँगन कभी हँसी  था वहाँ सन्नाटा सोता है आज माँ की आंखें दरवाज़े पर टिकती हें पिता चुपचाप सब कुछ ढोता है एक रोटी चार স নমনী থী ব্ক্ভী  পুঠী ২৪ আানী ৪ সাত থালী जिस घर में शोर कम नहीं होता था, घड़ी की टिकनटिक সন सुनाई आती है॰ वक्त ने क्या खेल रचाया है सब अपने होकर भी दूर हो गए. एक ही छत के नीचे पलने वाले आज अलग ्अलग जहाँ में कभी खाली नहीं होताः घर बस लोग कम हो जाते हैं भाई कमाने निकल गया, बहन ससुराल चली गई एक ही घर के दो चिराग , दुनिया में खो गए अलग ्अलग से गूंजता " जो आँगन कभी हँसी था वहाँ सन्नाटा सोता हे॰ आज माँ की ऑंखें दरवाज़े पर टिकती हे पिता चुपचाप सब कुछ ढोता है স নমনৌ থী, एक रोटी चार gcsl आज थाली पूरी रह जाती है॰ जिस घर में शोर कम नहीं होता था, घड़ी की टिकनटिक সন सुनाई आती है बहन ससुराल चली गर्ई एक ही घर के दो चिराग , दुनिया में खो गए अलग अलग से गूंजता " जो आँगन कभी हँसी  था वहाँ सन्नाटा सोता है आज माँ की आंखें दरवाज़े पर टिकती हें पिता चुपचाप सब कुछ ढोता है एक रोटी चार স নমনী থী ব্ক্ভী  পুঠী ২৪ আানী ৪ সাত থালী जिस घर में शोर कम नहीं होता था, घड़ी की टिकनटिक সন सुनाई आती है॰ वक्त ने क्या खेल रचाया है सब अपने होकर भी दूर हो गए. एक ही छत के नीचे पलने वाले आज अलग ्अलग जहाँ में - ShareChat
#📚कविता-कहानी संग्रह 2026 _ज्येष्ठ मंगलवार ( बडे़ मंगलवार ) coming soon
📚कविता-कहानी संग्रह - ShareChat
#📚कविता-कहानी संग्रह
📚कविता-कहानी संग्रह - ಗಿಷ' किसी दूसरे की करके उसके पापों को ளி अपने खाते में क्योंँ जमा कर रहे हो.? ? दूसरों के दोषों का न प्रचार करो, न चर्चा करो  और न उन्हें याद ही करो तुम्हारा इसी में परम लाभ है सर्वान्तर्यामी हैँ॰ वे किसने किस परिस्थिति में भगवान किस नीयत से कब क्या किया है सब जानते हैं और वे ही उसके फल का भी विधान करते हैं तुम बीच में पड़कर अपनी बुद्धि का दिवाला क्यों निकालने जाते हो और झूठी सच्ची कल्पना करके क्योँ उसके दोषों को बटोरते हो ? ಗಿಷ' किसी दूसरे की करके उसके पापों को ளி अपने खाते में क्योंँ जमा कर रहे हो.? ? दूसरों के दोषों का न प्रचार करो, न चर्चा करो  और न उन्हें याद ही करो तुम्हारा इसी में परम लाभ है सर्वान्तर्यामी हैँ॰ वे किसने किस परिस्थिति में भगवान किस नीयत से कब क्या किया है सब जानते हैं और वे ही उसके फल का भी विधान करते हैं तुम बीच में पड़कर अपनी बुद्धि का दिवाला क्यों निकालने जाते हो और झूठी सच्ची कल्पना करके क्योँ उसके दोषों को बटोरते हो ? - ShareChat
#📚कविता-कहानी संग्रह गांगा सप्तमी.. Coming soon... I
📚कविता-कहानी संग्रह - 23 সসল 2026 गंगा सप्तमी २३ अप्रैल २०२६ को मनाई जाने वाली गंगा सप्तमी का विशेष आध्यात्मिक महत्व हे क्योंकि माना जाता है कि इसी दिन मां गंगा का पुनर्जन्म हुआ था महर्षि जह्यु ने उन्हें अपने कान से मुक्त किया था, जिसके कारण उन्हें ডন उन्हें जाहनवी भी कहा जाता हे। इस पावॅन अवसर पर श्रद्धालु गंगा नदी में पवित्र स्नान करते हॅ और दीपदान करते हें जिसे सभी पापों के नाश और अक्षय पुण्य की प्राप्ति के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। इताक विष्णु ; चूँकि यह पर्व गुरूवार को पड़ रहा है॰ इसलिए भगवान ओरमां गंगा की संयुक्त उपासना सुख- समृद्धि के लिए विशेष लाभकारी रहेगी। 23 সসল 2026 गंगा सप्तमी २३ अप्रैल २०२६ को मनाई जाने वाली गंगा सप्तमी का विशेष आध्यात्मिक महत्व हे क्योंकि माना जाता है कि इसी दिन मां गंगा का पुनर्जन्म हुआ था महर्षि जह्यु ने उन्हें अपने कान से मुक्त किया था, जिसके कारण उन्हें ডন उन्हें जाहनवी भी कहा जाता हे। इस पावॅन अवसर पर श्रद्धालु गंगा नदी में पवित्र स्नान करते हॅ और दीपदान करते हें जिसे सभी पापों के नाश और अक्षय पुण्य की प्राप्ति के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। इताक विष्णु ; चूँकि यह पर्व गुरूवार को पड़ रहा है॰ इसलिए भगवान ओरमां गंगा की संयुक्त उपासना सुख- समृद्धि के लिए विशेष लाभकारी रहेगी। - ShareChat
#📚कविता-कहानी संग्रह
📚कविता-कहानी संग्रह - शादी आज मैंने एक शादी देखी जिसमें बारात में नाचते लोग देखे , सीना चौड़ा किए दुल्हे को देखा देखा सजी हुई दुल्हन को । साथ में देखा उस दहेज के ढेर को जो भीगा था एक बाप की पूरी जिंदगी के पसीने से । जो चमक रहा था मां के बिके गहनों से। पुनः , मैंने दूल्हे को देखा दहेज को निहारते हुए निहारते हुए , देखी उसकी चमकती आंखें । ऐसे लगा , मानो कुछ गिर रहा है मैंने उसके गिरते आत्मसम्मान को देखा सच कहूं , तो मैंने नहीं देखी कोई शादी मैंनेदेखा सौदा सौदा, दहेज के बदले स्वाभिमान का और सिंदर के बदले सपनों का शादी आज मैंने एक शादी देखी जिसमें बारात में नाचते लोग देखे , सीना चौड़ा किए दुल्हे को देखा देखा सजी हुई दुल्हन को । साथ में देखा उस दहेज के ढेर को जो भीगा था एक बाप की पूरी जिंदगी के पसीने से । जो चमक रहा था मां के बिके गहनों से। पुनः , मैंने दूल्हे को देखा दहेज को निहारते हुए निहारते हुए , देखी उसकी चमकती आंखें । ऐसे लगा , मानो कुछ गिर रहा है मैंने उसके गिरते आत्मसम्मान को देखा सच कहूं , तो मैंने नहीं देखी कोई शादी मैंनेदेखा सौदा सौदा, दहेज के बदले स्वाभिमान का और सिंदर के बदले सपनों का - ShareChat
#🙏अक्षय तृतीया का महत्व🗣️📿 #🔔अक्षय तृतीया Coming Soon⏳ #📚कविता-कहानी संग्रह
🙏अक्षय तृतीया का महत्व🗣️📿 - ShareChat
00:25
#📚कविता-कहानी संग्रह वरुथिनी एकादशी
📚कविता-कहानी संग्रह - वरूाथना एकादशा की हार्दिक शुभकामनाएँ १३ अप्रैल २०२६ वरूाथना एकादशा की हार्दिक शुभकामनाएँ १३ अप्रैल २०२६ - ShareChat
#📚कविता-कहानी संग्रह
📚कविता-कहानी संग्रह - रख सकों तो एक निशानी हूँ मैं खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं বীক্ক না পাহ তিমব্ধী ঐ মাঠী বুনিযা &#.. वा एक बूंद ऑख का पान। सबको प्यार देने की आदत है हमें अपनो अलग पहचान बनाने को आदत है कितना भी गहरा जख्म दे कोई मुस्कुरानें की आदत है हमें . ওননা কী তসাণা इस अजनबी दुनिया में अकेला ख्वाब हूँ मैं सवालों से खफा छोटा सा जवाब हूॅँ मै जो समझ ना सके मुझे उनके लिए कौन किताब हूँ मैं. जो समझ गए उनके लिए பளி आँख से देखोगे तो खश पाओगे दिल से पछोगे तो दर्द का सैलाब हॅँ मैं रख सकों तो एक निशानी हं मैं अगर खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं॰ . रख सकों तो एक निशानी हूँ मैं खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं বীক্ক না পাহ তিমব্ধী ঐ মাঠী বুনিযা &#.. वा एक बूंद ऑख का पान। सबको प्यार देने की आदत है हमें अपनो अलग पहचान बनाने को आदत है कितना भी गहरा जख्म दे कोई मुस्कुरानें की आदत है हमें . ওননা কী তসাণা इस अजनबी दुनिया में अकेला ख्वाब हूँ मैं सवालों से खफा छोटा सा जवाब हूॅँ मै जो समझ ना सके मुझे उनके लिए कौन किताब हूँ मैं. जो समझ गए उनके लिए பளி आँख से देखोगे तो खश पाओगे दिल से पछोगे तो दर्द का सैलाब हॅँ मैं रख सकों तो एक निशानी हं मैं अगर खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं॰ . - ShareChat
#📚कविता-कहानी संग्रह
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00:32
#🙏श्री राम भक्त हनुमान🚩 #📚कविता-कहानी संग्रह हनुमान जन्मोत्सव
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00:26