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हिन्दू संस्कृति और अध्यात्म की जानकारियाँ
#पूजन विधि
पूजन विधि - ShareChat
#शुभ मुहूर्त
शुभ मुहूर्त - पापमोचनी एकादशी व्रत 15ai मार्च २०२६ Sunday रविवार देवी लक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु पापमोचनी एकादशी पारण पापमोचनी एकादशी रविवार, 15, 2026 ক্ষী मार्च १६वाँ मार्च को, पारण (व्रत तोड़ने का) समय 06:06 08:31 पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय - ०९:४० तिथि प्रारम्भ - मार्च १४, २०२६ को ०८ः१० बजे एकादशी एकादशी तिथि समाप्त मार्च १ ५, २०२६ को ०९ १6 बजे पापमोचनी एकादशी व्रत 15ai मार्च २०२६ Sunday रविवार देवी लक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु पापमोचनी एकादशी पारण पापमोचनी एकादशी रविवार, 15, 2026 ক্ষী मार्च १६वाँ मार्च को, पारण (व्रत तोड़ने का) समय 06:06 08:31 पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय - ०९:४० तिथि प्रारम्भ - मार्च १४, २०२६ को ०८ः१० बजे एकादशी एकादशी तिथि समाप्त मार्च १ ५, २०२६ को ०९ १6 बजे - ShareChat
#पूजन विधि
पूजन विधि - नृसिंह द्वादशी व्रत कथा नृसिंह द्वादशी व्रत के फल से राजा वत्स को राज्य प्राप्ति की कथा  ऋषि दुर्वासा कहते हैं - "हे महामुने! नृसिंह द्वादशी त्रत् करने पर एक राजा को जो फल प्राप्त मैं वर्णन  हूँ, तुम ध्यानपूर्वक श्रवण करो | किम्पुरुषवर्ष में एक हुआ था, उसका कर रहा राजा भारत को एक पुत्ररत्न की प्राप्ति सुप्रसिद्ध राजा शासन करते थे जिनका  नाम भारत था अपने पुत्र " हुयी थी, जिसका नाम वत्स था समय आने पर भारत ने राज्य का उत्तरदायित्व वत्स को सौंपकर उन्हें राजा वत्स के रूप में प्रतिष्ठित किया कालान्तर में किसी भीषण राजा वत्स अपने से पराजित गये तथा उनका शत्रुओं युद्ध में वैभव, सम्पदा आदि सर्वस्व के अधीन से परास्त होकर राजा T शत्रुओं शत्रुओं 774, अपनी धर्मपत्नी सहित पैदल ही वन की ओर चल दिये तथा वहाँ पहुँचकर ऋषि वशिष्ठ के आश्रम में निवास करने लगे इस प्रकार आश्रम में निवास करते राजा को कुछ दिवस व्यतीत होे गये। वशिष्ठ ने राजा से पूछा 'हे राजन्! अपने राज्य आदिको त्यागकर इस आश्रम में एक दिन मुनि निवास करने का तुम्हारा क्या प्रयोजन तुम किस कारणवश इस महान आश्रम में निवास कर रहे हो? ने मुझे युद्ध में पराजित कर  'हे मुनिवर! दुष्ट मेरा राज्य एवं मुझसे राजा शत्रुओं कहा राजकोष आदि सर्वस्व छीन लिया है। इसीलिये असहाय होकर मैं आपकी शरण में आया हूँ आप अपने आशीर्वचनों द्वारा मेरे चित्त को शीतलता प्रदान करने की कृपा करें ।" कहते हैं - "हे मुने! राजा वत्स के इस प्रकार निवेदन करने पर वशिष्ठ मुनि ने राजा ऋषि ளH निर्देशानुसार को विधिवत् नृसिंह व्रत करने का उपदेश दिया राजा ने वसिष्ठ मुनि के द्वादशी हुये भगवान नृसिंह उस राजा पर अत्यन्त प्रसन्न व्रत का पालन किया जिसके प्रभाव द्वादशी जो युद्धभूमि में भगवान नृसिंह ने वरदान स्वरूप राजा को एक ऐसा दिव्य चक्र प्रदान किया में सक्षम था। का नाश करने शत्रुओं समस्त उस दिव्य चक्र की सहायता से महाराज वत्स ने समस्त को पराजित कर अपना राज्य शत्रुओं सिंहासन पर आसीन होकर उस धर्मात्मा राजा पुनः प्राप्त कर लिया एक सहस्र राज्य पुण्य कर्मों के प्रभाव अन्त समय में वह राजा भगवान विष्णु के अश्वमेध यज्ञ सम्पन्न किये परम धाम को प्राप्त हुआ हे मुने! सम्पूर्ण पातकों का नाश करने वाली यह नृसिंह द्वादशी धन्य है নিরামা হাল तुम्हारी करने हेतु मैंने इसका वर्णन कर दिया है इस व्रत के माहात्म्य का श्रवण करने के उपरान्त अपनी इच्छानुसार आचरण करो ।" श्रीवराहपुराण में वर्णित नृसिंह द्वादशी माहात्म्य सम्पूर्ण होता है Il  ।इस प्रकार नृसिंह द्वादशी व्रत कथा नृसिंह द्वादशी व्रत के फल से राजा वत्स को राज्य प्राप्ति की कथा  ऋषि दुर्वासा कहते हैं - "हे महामुने! नृसिंह द्वादशी त्रत् करने पर एक राजा को जो फल प्राप्त मैं वर्णन  हूँ, तुम ध्यानपूर्वक श्रवण करो | किम्पुरुषवर्ष में एक हुआ था, उसका कर रहा राजा भारत को एक पुत्ररत्न की प्राप्ति सुप्रसिद्ध राजा शासन करते थे जिनका  नाम भारत था अपने पुत्र " हुयी थी, जिसका नाम वत्स था समय आने पर भारत ने राज्य का उत्तरदायित्व वत्स को सौंपकर उन्हें राजा वत्स के रूप में प्रतिष्ठित किया कालान्तर में किसी भीषण राजा वत्स अपने से पराजित गये तथा उनका शत्रुओं युद्ध में वैभव, सम्पदा आदि सर्वस्व के अधीन से परास्त होकर राजा T शत्रुओं शत्रुओं 774, अपनी धर्मपत्नी सहित पैदल ही वन की ओर चल दिये तथा वहाँ पहुँचकर ऋषि वशिष्ठ के आश्रम में निवास करने लगे इस प्रकार आश्रम में निवास करते राजा को कुछ दिवस व्यतीत होे गये। वशिष्ठ ने राजा से पूछा 'हे राजन्! अपने राज्य आदिको त्यागकर इस आश्रम में एक दिन मुनि निवास करने का तुम्हारा क्या प्रयोजन तुम किस कारणवश इस महान आश्रम में निवास कर रहे हो? ने मुझे युद्ध में पराजित कर  'हे मुनिवर! दुष्ट मेरा राज्य एवं मुझसे राजा शत्रुओं कहा राजकोष आदि सर्वस्व छीन लिया है। इसीलिये असहाय होकर मैं आपकी शरण में आया हूँ आप अपने आशीर्वचनों द्वारा मेरे चित्त को शीतलता प्रदान करने की कृपा करें ।" कहते हैं - "हे मुने! राजा वत्स के इस प्रकार निवेदन करने पर वशिष्ठ मुनि ने राजा ऋषि ளH निर्देशानुसार को विधिवत् नृसिंह व्रत करने का उपदेश दिया राजा ने वसिष्ठ मुनि के द्वादशी हुये भगवान नृसिंह उस राजा पर अत्यन्त प्रसन्न व्रत का पालन किया जिसके प्रभाव द्वादशी जो युद्धभूमि में भगवान नृसिंह ने वरदान स्वरूप राजा को एक ऐसा दिव्य चक्र प्रदान किया में सक्षम था। का नाश करने शत्रुओं समस्त उस दिव्य चक्र की सहायता से महाराज वत्स ने समस्त को पराजित कर अपना राज्य शत्रुओं सिंहासन पर आसीन होकर उस धर्मात्मा राजा पुनः प्राप्त कर लिया एक सहस्र राज्य पुण्य कर्मों के प्रभाव अन्त समय में वह राजा भगवान विष्णु के अश्वमेध यज्ञ सम्पन्न किये परम धाम को प्राप्त हुआ हे मुने! सम्पूर्ण पातकों का नाश करने वाली यह नृसिंह द्वादशी धन्य है নিরামা হাল तुम्हारी करने हेतु मैंने इसका वर्णन कर दिया है इस व्रत के माहात्म्य का श्रवण करने के उपरान्त अपनी इच्छानुसार आचरण करो ।" श्रीवराहपुराण में वर्णित नृसिंह द्वादशी माहात्म्य सम्पूर्ण होता है Il  ।इस प्रकार - ShareChat
#शुभ मुहूर्त
शुभ मुहूर्त - कृष्ण नृसिंह द्वादशी 15a  मार्च २०२६ रविवार Sunday भगवान नृसिंह o कृष्ण नृसिंह द्वादशी समय विष्णुश्रृङ्खल योग द्वादशी संयोग एकादशी एवं श्रवण नक्षत्र से होने पर इसे विष्णुश्रृङ्खल योग চিন্ডু पञ्चाङ्ग के अनुसार द्वादशी क कहा जाता है। कृष्ण नृसिंह रविवार, मार्च १५, २०२६ को द्वादशी १६वाँ मार्च को, द्वादशी पारण समय 06:06 08.31 पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय 09:40 तिथि प्रारम्भ मार्च १ ५ २०२६ को ०९:१6 द्वादशी बजे द्वादशी तिथि समाप्त সাব 16, 2026 09.40 बज मार्च १४, २०२६ को २८:४९+ बजे श्रवण नक्षत्र प्रारम्भ মাব 15, 2026 ক্রী 29:56+ ব্রতী श्रवण नक्षत्र समाप्त कृष्ण नृसिंह द्वादशी 15a  मार्च २०२६ रविवार Sunday भगवान नृसिंह o कृष्ण नृसिंह द्वादशी समय विष्णुश्रृङ्खल योग द्वादशी संयोग एकादशी एवं श्रवण नक्षत्र से होने पर इसे विष्णुश्रृङ्खल योग চিন্ডু पञ्चाङ्ग के अनुसार द्वादशी क कहा जाता है। कृष्ण नृसिंह रविवार, मार्च १५, २०२६ को द्वादशी १६वाँ मार्च को, द्वादशी पारण समय 06:06 08.31 पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय 09:40 तिथि प्रारम्भ मार्च १ ५ २०२६ को ०९:१6 द्वादशी बजे द्वादशी तिथि समाप्त সাব 16, 2026 09.40 बज मार्च १४, २०२६ को २८:४९+ बजे श्रवण नक्षत्र प्रारम्भ মাব 15, 2026 ক্রী 29:56+ ব্রতী श्रवण नक्षत्र समाप्त - ShareChat
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शुभ मुहूर्त - मीन संक्रान्ति 15 वाँ मार्च 2026 Sunday / रविवार मीन संक्रान्ति मीन संक्रान्ति पुण्य काल मुहूर्त 2026 मीन संक्रान्ति फलम् मीन संक्रान्ति रविवार , मार्च 15 , 2026 को मीन संक्रान्ति पुण्य काल - 06:07 से 12:07 अवधि - -06 घण्टे 00 मिनट्स मीन संक्रान्ति महा पुण्य काल - 06:07 से 08:07 अवधि - 02 घण्टे 00 मिनट्स मीन संक्रान्ति का क्षण - मार्च 14 को 25 : 08+ बजे - ShareChat
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#शुभ मुहूर्त
शुभ मुहूर्त - चैत्र 11, UబIక్: कृष्ण पक्ष, एकादशी 5 २०८२ कालयुक्त, विक्रम सम्वत मार्च २०२६ रविवार वाराणसी, भारत कृष्ण नृसिंह द्वादशी, मीन संक्रान्ति, प्ापमोचनी एकादशी, द्विपुष्कर योग, बिडाल योग रहित मुहूर्त एवं उदय-लग्न पञ्चक { पञ्चक रहित मुहूर्त के दिन के लिए उदय लग्न मुहूर्त आज के दिन के लिए आज कुम्भ - मार्च १४ को २८३९+ बजे से ०६ १( चोर पञ्चक - ०६:०७ से 0६:१० ) #7-06;10707:38 06:10 ম 07:38 शुभ मुहूर्त - शुभ मुहूर्त - ०७:३८ से ०9:१६ ೧೧   Tq - 07.38 #09.16 8 29%-09:16#11:13 चोर पञ्चक - ०९:१६ से 09:१६ शुभ मुहूर्त - ०९:१६ से ११:१३ I fొ7-11.13713.27  रोग पञ्चक - ११:१३ से १३:२७ @ ೫೫ - 13.27 15:45 शुभ मुहूर्त - १३:२७ 0 8|6-15:45717:59 15:45 मृत्यु पञ्चक - १५ ४५ से १७:५९ T) कन्या - १७:५९ 20:12 आग्ने पञ्चक - १७:५९ 20:12 २ तुला - २०:१२ 22:28 शुभ मुहूर्त - २०:१२ 22.28 7 বৃাধ্বব্ধ - 22:28 24:45+ रज पञ्चक - २२:२८ 24:45+ 3-24:45+ 26.504 शुभ मुहूर्त - २४:४५+ 26:50+ 1 मकर - २६:५०+ 28:35+ चोर पञ्चक - २६:५०+ 28:35+ शुभ मुहूर्त - २8:३५+ 29:56+ रोग पञ्चक - २९:५६+ 30.06+ चैत्र 11, UబIక్: कृष्ण पक्ष, एकादशी 5 २०८२ कालयुक्त, विक्रम सम्वत मार्च २०२६ रविवार वाराणसी, भारत कृष्ण नृसिंह द्वादशी, मीन संक्रान्ति, प्ापमोचनी एकादशी, द्विपुष्कर योग, बिडाल योग रहित मुहूर्त एवं उदय-लग्न पञ्चक { पञ्चक रहित मुहूर्त के दिन के लिए उदय लग्न मुहूर्त आज के दिन के लिए आज कुम्भ - मार्च १४ को २८३९+ बजे से ०६ १( चोर पञ्चक - ०६:०७ से 0६:१० ) #7-06;10707:38 06:10 ম 07:38 शुभ मुहूर्त - शुभ मुहूर्त - ०७:३८ से ०9:१६ ೧೧   Tq - 07.38 #09.16 8 29%-09:16#11:13 चोर पञ्चक - ०९:१६ से 09:१६ शुभ मुहूर्त - ०९:१६ से ११:१३ I fొ7-11.13713.27  रोग पञ्चक - ११:१३ से १३:२७ @ ೫೫ - 13.27 15:45 शुभ मुहूर्त - १३:२७ 0 8|6-15:45717:59 15:45 मृत्यु पञ्चक - १५ ४५ से १७:५९ T) कन्या - १७:५९ 20:12 आग्ने पञ्चक - १७:५९ 20:12 २ तुला - २०:१२ 22:28 शुभ मुहूर्त - २०:१२ 22.28 7 বৃাধ্বব্ধ - 22:28 24:45+ रज पञ्चक - २२:२८ 24:45+ 3-24:45+ 26.504 शुभ मुहूर्त - २४:४५+ 26:50+ 1 मकर - २६:५०+ 28:35+ चोर पञ्चक - २६:५०+ 28:35+ शुभ मुहूर्त - २8:३५+ 29:56+ रोग पञ्चक - २९:५६+ 30.06+ - ShareChat
कारादाइन नौम्बू #शुभ मुहूर्त
शुभ मुहूर्त - नौम्बू कारादाइयन 144 मार्च २०२६ Saturday शनिवार Tiri ೯1 ziazf सत्यवान के प्राण यमराज कारादाइयन नौम्बू शुभ मुहूर्त कारादाइयन नौम्बू शनिवार, मार्च १४, २०२६ को नौम्बू व्रत - 06:08 25:08+ कारादाइयन अवधि - १९ घण्टे ०० मिनट्स मंजल सरदु मुहूर्त - २५:०८+ नौम्बू कारादाइयन 144 मार्च २०२६ Saturday शनिवार Tiri ೯1 ziazf सत्यवान के प्राण यमराज कारादाइयन नौम्बू शुभ मुहूर्त कारादाइयन नौम्बू शनिवार, मार्च १४, २०२६ को नौम्बू व्रत - 06:08 25:08+ कारादाइयन अवधि - १९ घण्टे ०० मिनट्स मंजल सरदु मुहूर्त - २५:०८+ - ShareChat
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