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सूर्य यंत्र घर में रखने से भाग्य सोने की तरह चमक उठता है, भाग्य, बिजनेस, नौकरी में मिलती है, मनचाही तरक्की।।
सूर्य यंत्र को सूर्य की ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार सूर्य यंत्र में सूर्य ग्रह की सभी विशेषताएं होती हैं। सूर्य यंत्र को घर में रखने से आपका भाग्य मजबूत होता है और नौकरी, व्यापार में आपको तरक्की मिलती है, जीवन की सभी परेशानियां समाप्त होकर सौभाग्य का उदय होता है।
सूर्य यंत्र की स्थापना करने से व्यक्ति शक्तिशाली बनता है.
इससे आत्मविश्वास बढ़ता है और नेतृत्व करने की क्षमता का विकास होता है।
सूर्य यंत्र की पूजा करने से सोया भाग्य जागता है और रूके हुए काम बनने लगते हैं।
सूर्य यंत्र की पूजा करने से समाज में मान-सम्मान बढ़ता है।
सूर्य यंत्र की पूजा करने से आंखों से जुड़ी समस्याओं में आराम मिलता है,
सूर्य यंत्र की पूजा करने से कुंडली में सूर्य की स्थिति मज़बूत होती है।
सूर्य यंत्र की पूजा करने से नौकरी और कारोबार में तरक्की होती है।
वास्तु शास्त्र के मुताबिक, सूर्य यंत्र को घर की पूर्व दिशा में रखना सबसे अच्छा माना जाता है, इस दिशा में सूर्य की ऊर्जा का प्रवाह होता है और इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है।
सूर्य यंत्र कब लगाना चाहिए?
ज्योतिष के अनुसार रविवार के दिन घर में तांबे के सूर्य यंत्र की स्थापना करें। अब उसे गंगाजल से शुद्ध करके तिलक लगाएं। साथ ही रोजाना धूप-दीप दिखाएं। ऐसा करने से व्यक्ति पर सूर्य देव की कृपा होगी।
सूर्य यंत्र लॉकेट पहनने से जुड़ी कुछ महात्वपूर्ण बातें।
सूर्य यंत्र लॉकेट को शुद्ध चांदी या तांबे से बनवाया जाता है,सूर्य यंत्र लॉकेट को रविवार के दिन शुभ मुहूर्त में पहनना चाहिए, सूर्य यंत्र लॉकेट पहनने से पहले, गंगाजल और गाय के दूध से इसे शुद्ध करना चाहिए, सूर्य यंत्र लॉकेट की पूजा चंदन, केसर, सुपारी, और लाल फूल से करनी चाहिए, पूजा के दौरान 'ॐ घृणि सूर्याय नमः' का जाप करना चाहिए।
सूर्य यंत्र कहां लगाना चाहिए।
वास्तु के मुताबिक, सूर्य यंत्र को घर की पूर्व दिशा में लगाना सबसे शुभ माना जाता है, यह दिशा सूर्योदय की दिशा होती है, सूर्य यंत्र को मुख्य द्वार की दीवार पर भी लगाया जा सकता है।
सूर्यदेव को प्रसन्न करने के यह है 5 पौराणिक नियम।
स्नान द्वारा उपाय जब गोचर में सूर्य अनिष्टकारक हों तो व्यक्ति को स्नान करते समय जल में खसखस या लाल फूल या केसर डालकर स्नान करना शुभ रहता है। ...
सूर्य की वस्तुओं का दान ...।
मंत्र जाप ...।
सूर्य यंत्र की स्थापना ...।
सूर्य हवन कराना....।
सूर्य देव को कौन सी वस्तु चढ़ाने से प्रसन्न होते हैं?
माना जाता है कि, प्रसाद में मिश्री तथा गाय का दूध चढ़ाने से भगवान प्रसन्न होते हैं, ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य को अर्घ्य देते समय जल में मिश्री डालकर जल चढ़ाने से सूर्य देवता की कृपा बनी रहती है।
सूर्य को हल्दी डालकर जल चढ़ाने से क्या होता है?
सूर्य देव को जल चढ़ाते समय पानी में हल्दी डाल लेना चाहिए, ऐसा करने कुंडली में सूर्य मजबूत होने लगते हैं और रुके हुए कार्य होने लगते हैं।
सूर्य को मजबूत करने के उपाय
सूर्य नमस्कार:-- प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करें।
रत्न धारण:-- सूर्य ग्रह से संबंधित रत्न जैसे कि माणिक्य, रूबी आदि धारण करें,
पीले रंग का प्रयोग:--- पीले रंग के वस्त्र पहनें और पीले रंग के खाद्य पदार्थों का सेवन करें।
दान: -- गरीबों को दान करें और सूर्य देव से संबंधित वस्तुओं का दान करें।
सूर्य को अर्पण करते समय जल में क्या मिलाना चाहिए?
इसके बाद, एक तांबे के बर्तन में ताज़ा पानी भरें। अगर आप प्रसाद को और भी ज़्यादा स्वादिष्ट बनाना चाहते हैं, तो आप इसमें चावल के कुछ दाने, लाल चंदन का पाउडर या गुलाब की कुछ पंखुड़ियाँ भी डाल सकते हैं, ये चीज़ें सूर्य देवता के प्रति पवित्रता, भक्ति और प्रेम का प्रतीक हैं, किसी विशेष कामना के लिए लाल मिर्च के 11 या 21 बीच जेल में मिलकर चढ़ाए।
सूर्य खराब होने के क्या लक्षण हैं?
- कुंडली में सूर्य कमजोर होने की स्तिथि में सिरदर्द, हृदय रोग, नेत्र रोग और पेट रोग उत्पन्न होते है। - कमजोर सूर्य वाले व्यक्ति को करियर में सफलता प्राप्त करने में कई परेशानियां उत्पन्न होती है। - कुंडली में सूर्य की कमजोरी स्थिति आपके पिता के साथ संबंधों को भी कमजोर करती है, पिता एवं सरकार से मतभेद बने रहते हैं, तथा दोनों से नुकसान उठाना पड़ता है।
सूर्य का तांत्रिक मंत्र कौन सा है?
ॐ सूर्याय नम: ।
ॐ घृणि सूर्याय नम: ।
ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा।।
ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर।
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अनिल सुधांशु
ज्योतिषाचार्य
#✡️ज्योतिष समाधान 🌟
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मां तेरी बहुत याद आती है!
आंख मेरी भर आती है,
ऐ मां जब भी तेरी याद आती है,
क्या तू सचमुच मुझको भूल गई,
मां बेटे के रिश्ते की कड़ी टूट गई,
एक शहर में रहकर भी तुझसे मिले,
मुझे महीनों महीनों बीत जाते हैं !
तुझे देखने को मैं तरस जाता हूं,
चाह कर भी तुझे मिल नहीं पाता हूं,
आखिर ऐसा क्या हो गया?
तेरे मेरे बीच में,समझ नहीं आता,
सभी भाई बहन तुझे लड़ते थे,
तुझसे झगड़ते थे, तुझे दुतकारते थे!
कभी-कभी गुस्से में वह तुझे,
अपशब्द तक कह जाते थे,
लेकिन तू सब कुछ भूल कर,
उन्हें अपने गले लगा लेती थी,
अपनी ममता का बास्ता देकर,
उनकी हर बात भुला देती थी,
लेकिन मैं तो तुझे कभी कुछ नहीं कहा,
फिर भी तूने मुझे दुत्कार दिया !
जितना उनको प्यार किया,
उतना तूने कभी भी मुझे प्यार नहीं किया !
एक मां होकर तूने क्यों इतना भेदभाव किया,
तेरे लिए तो सभी बच्चे एक बराबर थे,
तूने तो सभी को पैदा करने में,
एक बराबर दर्द रहा था?
फिर किसी से कम किसी से ज्यादा,
तेरा प्यार क्यों रहा, जबकि,
हम सब तेरे जिगर के टुकड़े थे !
जो माँ बाप अपने घर में,
अपने बच्चों के साथ सियासत करते हैं,
नेताओं की तरह अपने ही घर में,
फूट डालकर राज करते हैं,
सच कह रहा हूं, मां ऐसे घर कभी भी,
फलते -- फूलते और पनपते नहीं हैं !
और यकीं मानों माँ इस गलती का,
पूरे पूरे घर सहित सब परिणाम भुगतते है,
लाख समझाओं वेद पुराणों का उदाहरण देकर,
फिर भी तो यह मां-बाप नहीं समझते हैं,
इतिहास गवाह है माता-पिता की गलती का,
परिणाम उनके बच्चे जीवन भर भुगतते है,
कर्ण और मर्यादा पुरुषोत्तम राम कि, तरह,
जीवन भर सुख कि तलाश भटकते है !
मां बाप मां बाप की तरह अपना फर्ज नहीं निभाते हैं,
इसीलिए जीवन भर खुद भी सुख चैन नहीं पाते है,
मां-बाप यदि पुण्य कर्मों के बल पर मिलते हैं,
तो बच्चे भी कर्मों के हिसाब से जन्म लेते हैं,
इस हाथ दें,और इस हाथ दें,
हाथ से हाथ कर्मों का हिसाब होता है?
बजह चाहे जो भी हो,
लेकिन अंत में माँ मैं यही कहता हूं,
तुझे क्या पता तेरे बिना मैं कैसे रहता हूं,
अक्सर आंख मेरी भर आती है,
जब याद तेरी आती है !
अनिल "अमन" #❤️Love You ज़िंदगी ❤️













