Shree Hari sharnam
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#❤️जीवन की सीख #☝अनमोल ज्ञान #👌 अच्छी सोच👍 #✍️ जीवन में बदलाव #🌸पॉजिटिव मंत्र
❤️जीवन की सीख - "मुझे भीड़ में रहना पसंद नहों॰ मेरा संसार केवल ' मै और मेरे चुने हुए T' E" "मुझे भीड़ में रहना पसंद नहों॰ मेरा संसार केवल ' मै और मेरे चुने हुए T' E" - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏कर्म क्या है❓ #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #🙏गुरु महिमा😇
🙏गीता ज्ञान🛕 - সীনামূন $ 6 मार्च 4 [ত্বীক্লি স্ক্কাম্ি;  प्रजापतिः सह्यज्ञाः प्रजाः सृष्ट्ा अनेन प्रसविष्यध्वमेष |/ ?0 || देवान्भावयतानेन ते देवा भावयन्तु वः परस्परं भावयन्तः श्रेयः परमवाप्स्यथ ।l ११ I सृष्टि के प्रारम्भ में समस्त प्राणियों के स्वामी (प्रजापति ) ने विष्णु के लिए यज्ञ सहित मनुष्यों तथा देवताओं की सन्ततियों को रचा तुम इस यज्ञ से सुखी रहो और उनसे कहा, करने से तुम्हें सुखपूर्वक रहने বমীক্কি इसके  तथा मुक्ति प्राप्त करने के लिए समस्त वांछित वस्तुएँ प्राप्त हो सकेंगी। ' ( ३.१० ) यज्ञों के द्वारा प्रसन्न होकर देवता तुम्हें भी प्रसन्न करेंगे और इस  तथा देवताओं के मध्य सहयोग मनुष्यों तरह से सबों को सम्पन्नता प्राप्त होगी। ( 3.११ ) সীনামূন $ 6 मार्च 4 [ত্বীক্লি স্ক্কাম্ি;  प्रजापतिः सह्यज्ञाः प्रजाः सृष्ट्ा अनेन प्रसविष्यध्वमेष |/ ?0 || देवान्भावयतानेन ते देवा भावयन्तु वः परस्परं भावयन्तः श्रेयः परमवाप्स्यथ ।l ११ I सृष्टि के प्रारम्भ में समस्त प्राणियों के स्वामी (प्रजापति ) ने विष्णु के लिए यज्ञ सहित मनुष्यों तथा देवताओं की सन्ततियों को रचा तुम इस यज्ञ से सुखी रहो और उनसे कहा, करने से तुम्हें सुखपूर्वक रहने বমীক্কি इसके  तथा मुक्ति प्राप्त करने के लिए समस्त वांछित वस्तुएँ प्राप्त हो सकेंगी। ' ( ३.१० ) यज्ञों के द्वारा प्रसन्न होकर देवता तुम्हें भी प्रसन्न करेंगे और इस  तथा देवताओं के मध्य सहयोग मनुष्यों तरह से सबों को सम्पन्नता प्राप्त होगी। ( 3.११ ) - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏कर्म क्या है❓ #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स
🙏गीता ज्ञान🛕 - गीतामृत 5 Tಲ 4 नियतं कुरु कर्म त्वं कर्म ज्यायो ह्यकर्मणः  शरीरयात्रापि च ते न प्रसिद्धयेदकर्मणः Il C || यज्ञार्थात्कर्मणोउन्यत्र लोकोडयं कर्मबन्धनः तदर्थं कर्म कौन्तेय मुक्तसङ्गः समाचर II ९ अपना नियत कर्म करो , क्योंकि कर्म न करने 3ঐ8া कर्म करना श्रेष्ठ है। कर्म के बिना की तो शरीर निर्वाह भी नहीं हो सकता। (३.८ ) श्रीविष्णु  के लिए यज्ञ रूप में कर्म करना चाहिए, अन्यथा कर्म के द्वारा इस भौतिक जगत् में बन्धन उत्पन्न होता है। अतः हे कुन्तीपुत्र  उनकी प्रसन्नता के लिए अपने नियत कर्म करो। इस तरह तुम बन्धन से सदा मुक्त रहोगे। (३.१ ) गीतामृत 5 Tಲ 4 नियतं कुरु कर्म त्वं कर्म ज्यायो ह्यकर्मणः  शरीरयात्रापि च ते न प्रसिद्धयेदकर्मणः Il C || यज्ञार्थात्कर्मणोउन्यत्र लोकोडयं कर्मबन्धनः तदर्थं कर्म कौन्तेय मुक्तसङ्गः समाचर II ९ अपना नियत कर्म करो , क्योंकि कर्म न करने 3ঐ8া कर्म करना श्रेष्ठ है। कर्म के बिना की तो शरीर निर्वाह भी नहीं हो सकता। (३.८ ) श्रीविष्णु  के लिए यज्ञ रूप में कर्म करना चाहिए, अन्यथा कर्म के द्वारा इस भौतिक जगत् में बन्धन उत्पन्न होता है। अतः हे कुन्तीपुत्र  उनकी प्रसन्नता के लिए अपने नियत कर्म करो। इस तरह तुम बन्धन से सदा मुक्त रहोगे। (३.१ ) - ShareChat
#🤩हैप्पी छोटी होली 🥰 #🥗स्वादिष्ट खाना रेसिपी #🥙बच्चों का पसंदीदा खाना🧒 #🍱 भारतीय खान-पान #🥑हेल्दी फूड
🤩हैप्पी छोटी होली 🥰 - होली स्पेशल होली स्पेशल - ShareChat
#🤩हैप्पी छोटी होली 🥰
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मंगल भवन अमंगल हारी मंगलनाथ दर्शन उज्जैन #महा मंगलनाथ उज्जैन #श्री मंगलनाथ जी उज्जैन मध्यप्रदेश से #मंगलनाथ मंदिर
महा मंगलनाथ उज्जैन - ShareChat
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#महाकाल दर्शन #महाकाल महाकालेश्वर
महाकाल दर्शन - श्री महाकालेश्वर भस्म आरती दर्शन   SAna  و श्री महाकालेश्वर भस्म आरती दर्शन   SAna  و - ShareChat
#🙏गुरु महिमा😇 #🙏 श्री प्रेमानंद महाराज की अमृतवाणी🙏 #🚩प्रेमानंद जी महाराज🙏 #🎨होली की मस्ती 🤣 #🤩हैप्पी छोटी होली 🥰
🙏गुरु महिमा😇 - ShareChat
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बांके बिहारी लाल जू वृन्दावन दर्शन #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #बांके बिहारी #बांके बिहारी
🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स - ShareChat
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#🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏कर्म क्या है❓ #🙏गुरु महिमा😇
🙏गीता ज्ञान🛕 - ரிளா 3 ३ मार्च 4 न कर्मणामनारम्भान्नैष्कर्म्यं पुरुषोडश्रुते  न च सन्न्यसनादेव सिद्धिं समधिगच्छति II ४ I१ न हि कश्चित्क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत् कार्यते ह्यवशः कर्म सर्वः प्रकृतिजैर्गुणैः II ५ II न तो कर्म से विमुख होकर कोई कर्मफल  মী ঢুককোয়  पा सकता है और न केवल संन्यास से सिद्धि प्राप्त की जा सकती / (3.4) प्रकृति से अर्जित गुणों के प्रत्येक व्यक्ति को अनुसार विवश होकर कर्म करना पड़ता है, अतः कोई भी एक क्षणभर के लिए भी बिना कर्म किये नहीं रह सकता (3.5) ரிளா 3 ३ मार्च 4 न कर्मणामनारम्भान्नैष्कर्म्यं पुरुषोडश्रुते  न च सन्न्यसनादेव सिद्धिं समधिगच्छति II ४ I१ न हि कश्चित्क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत् कार्यते ह्यवशः कर्म सर्वः प्रकृतिजैर्गुणैः II ५ II न तो कर्म से विमुख होकर कोई कर्मफल  মী ঢুককোয়  पा सकता है और न केवल संन्यास से सिद्धि प्राप्त की जा सकती / (3.4) प्रकृति से अर्जित गुणों के प्रत्येक व्यक्ति को अनुसार विवश होकर कर्म करना पड़ता है, अतः कोई भी एक क्षणभर के लिए भी बिना कर्म किये नहीं रह सकता (3.5) - ShareChat