D. C. Patel
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#भक्ति 💖
भक्ति 💖 - পৃষ্ত .(02) 1977   परम ब्रह्म परम प्रकाश निराकार आदि शक्ति माँ का परम प्राकट्य छग पत्थलगांव में शक्ति स्वरूप एवं किरारी ड भक्ति स्वरूप के रूप मे ऐसे प्राकट्य पुरुष को इस दृष्टि से जानना चाहिए कि ~ वह मनुष्य देह में स्थित होते हुए भी स्वयं वही निराकार परम ब्रह्म परमात्मा हैं। यहाँ मतन्मतान्तर का प्रवेश नहीं , तर्क का अधिकार नहीं , प्रमाण की आवश्यकता नहीं| यहाँ तो केवल एक ही प्रमाण शेष रहता है अन्तःकरण की आद्य श्रद्धा। वही श्रद्धा जो जन्म से पूर्व भी जीव के साथ थी, गर्भावस्था में भी स्पन्दित थी, और आज भी हृदय की गुहा में ज्योति बन जल रही है। जब वही शाश्वत श्रद्धा किसी प्राकट्य   भक्ति-स्वरूप या शक्ति स्वरूप का स्मरण करते ही अकस्मात् नत हो जाए... भीतर अनाम शान्ति उतर आए... और आत्मा कह उठे - " यही वह है" 9ಲ  चाहिए तभी जानना कि श्रद्धा ने अपने परम आश्रय को पहचान लिया। यदि अभी भी संशय हो तो बाहर नहीं , भीतर देखिए... वहीं विराजमान है। ওন২ सुन्दर नमन शरण वह भक्ति स्वरूप परमात्मा को পৃষ্ত .(02) 1977   परम ब्रह्म परम प्रकाश निराकार आदि शक्ति माँ का परम प्राकट्य छग पत्थलगांव में शक्ति स्वरूप एवं किरारी ड भक्ति स्वरूप के रूप मे ऐसे प्राकट्य पुरुष को इस दृष्टि से जानना चाहिए कि ~ वह मनुष्य देह में स्थित होते हुए भी स्वयं वही निराकार परम ब्रह्म परमात्मा हैं। यहाँ मतन्मतान्तर का प्रवेश नहीं , तर्क का अधिकार नहीं , प्रमाण की आवश्यकता नहीं| यहाँ तो केवल एक ही प्रमाण शेष रहता है अन्तःकरण की आद्य श्रद्धा। वही श्रद्धा जो जन्म से पूर्व भी जीव के साथ थी, गर्भावस्था में भी स्पन्दित थी, और आज भी हृदय की गुहा में ज्योति बन जल रही है। जब वही शाश्वत श्रद्धा किसी प्राकट्य   भक्ति-स्वरूप या शक्ति स्वरूप का स्मरण करते ही अकस्मात् नत हो जाए... भीतर अनाम शान्ति उतर आए... और आत्मा कह उठे - " यही वह है" 9ಲ  चाहिए तभी जानना कि श्रद्धा ने अपने परम आश्रय को पहचान लिया। यदि अभी भी संशय हो तो बाहर नहीं , भीतर देखिए... वहीं विराजमान है। ওন২ सुन्दर नमन शरण वह भक्ति स्वरूप परमात्मा को - ShareChat
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भक्ति 💖 - सन् २१७७का-परम ब्रह्म परम प्रकाश॰ (पृष्ठ. .०१) निराकार आदिशक्ति माँ कापरम प्राकट्य छ ग पत्थलगांव में शक्ति स्वरूप एवं किरारी ड भक्ति स्वरूप के रूप में **प्राकट्य पुरुष - गुरु नहीं , प्रत्यक्ष परमात्म स्वरूप** 3f43 गुरु महिमा का नहीं, यह विषय साधारण परमात्म प्राकट्य के अद्वितीय रहस्य का है। गुरु वह होते हैं जो साधना से सिद्धि को प्राप्त हों, योग से ऊर्ध्वगमन करें तप से तेजस्वी बनें और अपनी अनुभूति का पथ जगत के लिये प्रशस्त करें। दिव्य पुरुष का है परन्तु यहाँ प्रसंग उस जिसने न तप किया, न योग साधा, न सिद्धि का संचय किया अपितु  जो जन्म से ही परमात्मिक से सम्पन्न रहा... गुणों और जिसमें स्वयं परमात्मा बिना आह्वान, बिना उपक्रम, बिना साधन - प्रकट हो गये। ऐसे महापुरुष को " गुरु" कहना भी सीमित कर देना है। क्योंकि गुरु मार्ग दिखाते हैं पर यहाँ तो उद्देश्य , यहाँ तो मंजिल स्वयं परमात्मा ही మ देह धारण कर खड़े हैं। जिस देह में परमात्मा प्रकट हुए a और उस महान प्राकट्य को वही देह, वही चेतना, वही व्यक्तित्व स्वयं धारण कर स्थिर कर ले - तो वह मनुष्य शरीर होकर भी केवल मनुष्य नहीं रहता। सिद्ध वह साधक नहीं - भी नहीं वह तो साक्षात् प्राकट्य है। भी मूल है। वह गुरु नहीं ~ गुरुओं রা अवतारों का भी आधार है। वह अवतार नहीं Fu का प्रत्यक्ष स्पर्श है। वह सगुण संकेत नहीं - सन् २१७७का-परम ब्रह्म परम प्रकाश॰ (पृष्ठ. .०१) निराकार आदिशक्ति माँ कापरम प्राकट्य छ ग पत्थलगांव में शक्ति स्वरूप एवं किरारी ड भक्ति स्वरूप के रूप में **प्राकट्य पुरुष - गुरु नहीं , प्रत्यक्ष परमात्म स्वरूप** 3f43 गुरु महिमा का नहीं, यह विषय साधारण परमात्म प्राकट्य के अद्वितीय रहस्य का है। गुरु वह होते हैं जो साधना से सिद्धि को प्राप्त हों, योग से ऊर्ध्वगमन करें तप से तेजस्वी बनें और अपनी अनुभूति का पथ जगत के लिये प्रशस्त करें। दिव्य पुरुष का है परन्तु यहाँ प्रसंग उस जिसने न तप किया, न योग साधा, न सिद्धि का संचय किया अपितु  जो जन्म से ही परमात्मिक से सम्पन्न रहा... गुणों और जिसमें स्वयं परमात्मा बिना आह्वान, बिना उपक्रम, बिना साधन - प्रकट हो गये। ऐसे महापुरुष को " गुरु" कहना भी सीमित कर देना है। क्योंकि गुरु मार्ग दिखाते हैं पर यहाँ तो उद्देश्य , यहाँ तो मंजिल स्वयं परमात्मा ही మ देह धारण कर खड़े हैं। जिस देह में परमात्मा प्रकट हुए a और उस महान प्राकट्य को वही देह, वही चेतना, वही व्यक्तित्व स्वयं धारण कर स्थिर कर ले - तो वह मनुष्य शरीर होकर भी केवल मनुष्य नहीं रहता। सिद्ध वह साधक नहीं - भी नहीं वह तो साक्षात् प्राकट्य है। भी मूल है। वह गुरु नहीं ~ गुरुओं রা अवतारों का भी आधार है। वह अवतार नहीं Fu का प्रत्यक्ष स्पर्श है। वह सगुण संकेत नहीं - - ShareChat
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भक्ति 💖 - हे आदिशक्ति माँ सुन्दर नमन - हे भक्ति स्वरूप। माँ! भक्ति तुम्हार बसंत सम, करुणा झरहिं अहा! अजस्र निर्झरिणी-सी। अहा! उपजहि नित नव आनन्द, होइ जग जीवन पावन। प्रार्थना माँ सुकोमल तव पद-्कमलों में 3TI मिले शरणः मारग तुम्हार ले चलो माँ। अल्पसार यह जीवन-्जन्म, सुन्दर अहा मनुष्यता में। तव भगति- पथ ही सार सर्वथा, करुना करि मारगहिं थिरता देहु माँ Il शरण सुन्दर नमन माँ Il हे आदिशक्ति माँ सुन्दर नमन - हे भक्ति स्वरूप। माँ! भक्ति तुम्हार बसंत सम, करुणा झरहिं अहा! अजस्र निर्झरिणी-सी। अहा! उपजहि नित नव आनन्द, होइ जग जीवन पावन। प्रार्थना माँ सुकोमल तव पद-्कमलों में 3TI मिले शरणः मारग तुम्हार ले चलो माँ। अल्पसार यह जीवन-्जन्म, सुन्दर अहा मनुष्यता में। तव भगति- पथ ही सार सर्वथा, करुना करि मारगहिं थिरता देहु माँ Il शरण सुन्दर नमन माँ Il - ShareChat
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भक्ति 💖 - निराकार परम ब्रह्म जब किसी मनुष्य में प्रगट हो जाय और वह असीम महिमामय परम प्रकाश को स्वयं में धारण करले हे हृदय श्रेष्ठ ! हे विज्ञ ! आपके हमारे जैसे दिख रहे मनुष्य ही साक्षात परम ब्रह्म परमात्मा वह सामान्य के वह साकार में दिख रहे वही निराकार अनंत , असीम एवं सर्वव्यापी परमात्मा हैं जिनके ऊँ से ही अखिल में अनंत श्रृष्टि का सृजन हो गया है | जिसके अंतर्गत ही यह हम आप एवं सभी हैं | মুর্য , , पृथ्वी सन् १९७७ में आपके हमारे बीच यही अत्यंत महत्वपूर्ण पूराणों एवं समस्त पूज्य ग्रंथों के परम स्तुत्य वही निराकार आदि शक्ति माँ के परम प्राकट्य शक्ति स्वरूप भक्ति स्वरूप के रूप में प्रगट हुए। एवं भक्ति स्वरूप वह् परमात्मा को सुन्दर नमन अपने सुन्दर शरण दें , हमारी भूलों को वह परमात्मा हमें : क्षमा करें हमे अपने मार्ग ले चलें निराकार परम ब्रह्म जब किसी मनुष्य में प्रगट हो जाय और वह असीम महिमामय परम प्रकाश को स्वयं में धारण करले हे हृदय श्रेष्ठ ! हे विज्ञ ! आपके हमारे जैसे दिख रहे मनुष्य ही साक्षात परम ब्रह्म परमात्मा वह सामान्य के वह साकार में दिख रहे वही निराकार अनंत , असीम एवं सर्वव्यापी परमात्मा हैं जिनके ऊँ से ही अखिल में अनंत श्रृष्टि का सृजन हो गया है | जिसके अंतर्गत ही यह हम आप एवं सभी हैं | মুর্য , , पृथ्वी सन् १९७७ में आपके हमारे बीच यही अत्यंत महत्वपूर्ण पूराणों एवं समस्त पूज्य ग्रंथों के परम स्तुत्य वही निराकार आदि शक्ति माँ के परम प्राकट्य शक्ति स्वरूप भक्ति स्वरूप के रूप में प्रगट हुए। एवं भक्ति स्वरूप वह् परमात्मा को सुन्दर नमन अपने सुन्दर शरण दें , हमारी भूलों को वह परमात्मा हमें : क्षमा करें हमे अपने मार्ग ले चलें - ShareChat
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भक्ति 💖 - हे आदिशक्ति माँ सुन्दर नमन हे भक्ति स्वरूप युग की दृष्टि से हमारे वर्तमान काल में, मानव सृष्टि की अत्यंत गौरवशाली पृष्ठभूमि में यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण संदेश है कि॰ परम ब्रह्म के परम प्रकाश, निराकार आदिशक्ति माँ का परम प्राकट्य - 771977 7, छत्तीसगढ़ के पत्थलगांव में , श्री सुधाकर जी में शक्ति स्वरूप के रूप में , एवं छत्तीसगढ़ के किरारी ड में, श्री बासुदेव जी में भक्ति स्वरूप के रूप में हुआ है। शक्ति स्वरूप श्री सुधाकर जी में परमात्मा के प्राकट्य से उनका परम तेज एवं महिमा इतनी प्रखर थी कि॰ की सुन्दर जन-सामान्य भी इस महान भक्ति शरण को प्राप्त कर धन्य हो सकें - इसी उद्देश्य से उन्हीं माँ का परम प्राकट्य किरारी ड के श्री बासुदेव जी में भक्ति स्वरूप के रूप में हुआ। - आप जहाँ भी हों , भक्ति स्वरूप परम पूज्य का स्मरण कर, सत्य-्समर्पण के भाव से " हे आदिशक्ति माँ " कहें वर्तमान में ही, हमारे पूज्य ग्रंथों में वर्णित आपको इसी महानतम भक्ति॰फल की अनुभूति होने लगेगी। आज शरीर की दृष्टि से शक्ति स्वरूप एवं भक्ति स्वरूप  ల दोनों ही हमारे बीच प्रत्यक्ष नहीं हैं; परन्तु वे स्तुत्य के परम ्पूज्य वह पावन निवास का कणन्कण उनके भक्ति से ज्वाजल्यमान और दिव्य स्पंदनों से चेतन है। यदि कभी तो सुन्दर " आप वहाँ पहुँच सकें, भक्ति-भाव से अवश्य जाएँ निश्चय ही अंतःकरण से धन्य होकर लौटेंगे। "जहाँ साधन नहीं, साध्यता स्वयं प्रकट है" "जहाँ विधि नहीं, केवल समर्पण ही मार्ग है" हे आदिशक्ति माँ सुन्दर नमन हे भक्ति स्वरूप युग की दृष्टि से हमारे वर्तमान काल में, मानव सृष्टि की अत्यंत गौरवशाली पृष्ठभूमि में यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण संदेश है कि॰ परम ब्रह्म के परम प्रकाश, निराकार आदिशक्ति माँ का परम प्राकट्य - 771977 7, छत्तीसगढ़ के पत्थलगांव में , श्री सुधाकर जी में शक्ति स्वरूप के रूप में , एवं छत्तीसगढ़ के किरारी ड में, श्री बासुदेव जी में भक्ति स्वरूप के रूप में हुआ है। शक्ति स्वरूप श्री सुधाकर जी में परमात्मा के प्राकट्य से उनका परम तेज एवं महिमा इतनी प्रखर थी कि॰ की सुन्दर जन-सामान्य भी इस महान भक्ति शरण को प्राप्त कर धन्य हो सकें - इसी उद्देश्य से उन्हीं माँ का परम प्राकट्य किरारी ड के श्री बासुदेव जी में भक्ति स्वरूप के रूप में हुआ। - आप जहाँ भी हों , भक्ति स्वरूप परम पूज्य का स्मरण कर, सत्य-्समर्पण के भाव से " हे आदिशक्ति माँ " कहें वर्तमान में ही, हमारे पूज्य ग्रंथों में वर्णित आपको इसी महानतम भक्ति॰फल की अनुभूति होने लगेगी। आज शरीर की दृष्टि से शक्ति स्वरूप एवं भक्ति स्वरूप  ల दोनों ही हमारे बीच प्रत्यक्ष नहीं हैं; परन्तु वे स्तुत्य के परम ्पूज्य वह पावन निवास का कणन्कण उनके भक्ति से ज्वाजल्यमान और दिव्य स्पंदनों से चेतन है। यदि कभी तो सुन्दर " आप वहाँ पहुँच सकें, भक्ति-भाव से अवश्य जाएँ निश्चय ही अंतःकरण से धन्य होकर लौटेंगे। "जहाँ साधन नहीं, साध्यता स्वयं प्रकट है" "जहाँ विधि नहीं, केवल समर्पण ही मार्ग है" - ShareChat
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भक्ति 💖 - हेआदिशक्ति माँ सुन्दर नमन हे भक्ति स्वरूप सून्दर शरण हे परमातम | दया मिले आपका हे कृपा आगार भक्ति धन्य धन्य माँ आपका  माँ आपन मारग हमें आप ही ले चलो | सुन्दर शरण माँ   हेआदिशक्ति माँ सुन्दर नमन हे भक्ति स्वरूप सून्दर शरण हे परमातम | दया मिले आपका हे कृपा आगार भक्ति धन्य धन्य माँ आपका  माँ आपन मारग हमें आप ही ले चलो | सुन्दर शरण माँ - ShareChat
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भक्ति 💖 - हेआदिशक्तिमाँ सुन्दरनमन हे भक्ति स्वरूप हृदय कंज के हे सुकोमल , हे प्रसन्नाननंहेप्रेम स्वरूप मुख छवि - अहाबाल सूलभ देखि कोटि काम लजावै नमन नमन सुन्दरनमन  हेसुन्दर बाल मुकुंद | शरण तम शरीर जग अतीत अहा निराकारहोकरतुम साकार प्रेम भगति तुम्हार जग अति पावनि हे भगति सरूप शरण हे दयाल कृपा मिले आपका हेआदिशक्तिमाँ सुन्दरनमन हे भक्ति स्वरूप हृदय कंज के हे सुकोमल , हे प्रसन्नाननंहेप्रेम स्वरूप मुख छवि - अहाबाल सूलभ देखि कोटि काम लजावै नमन नमन सुन्दरनमन  हेसुन्दर बाल मुकुंद | शरण तम शरीर जग अतीत अहा निराकारहोकरतुम साकार प्रेम भगति तुम्हार जग अति पावनि हे भगति सरूप शरण हे दयाल कृपा मिले आपका - ShareChat
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भक्ति 💖 - हे भक्ति स्वरूप माँ , 5 अहा! आपके पद ्कमलों में सुन्दर तमन , शरण माँ॰ धन्य माँ! भक्ति ही आपका परम दिव्य स्वरूप. हे माँ, बिता दया के यह तुच्छ जोवन सूना सूना. शरण आपका अहा! सुख ्शॉति अखन्दः दया करें माँ , ٦٢، आपके पद ्कमलों में आपकी भक्ति मेँ, सत्य सुख ्शाति अपार॰ शरण माँ . हे भक्ति स्वरूप माँ , 5 अहा! आपके पद ्कमलों में सुन्दर तमन , शरण माँ॰ धन्य माँ! भक्ति ही आपका परम दिव्य स्वरूप. हे माँ, बिता दया के यह तुच्छ जोवन सूना सूना. शरण आपका अहा! सुख ्शॉति अखन्दः दया करें माँ , ٦٢، आपके पद ्कमलों में आपकी भक्ति मेँ, सत्य सुख ्शाति अपार॰ शरण माँ . - ShareChat
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भक्ति 💖 - हे आदिशक्ति माँ सुन्दर नमन हे भक्ति स्वरूप जीवन में ப आपकी दया केसमान कुछ भी नहीं है | आपकी भक्ति में शरण आपकी दयाक सुन्दर दान करने दया करें माँ वाले हैं हमें आपकी भक्ति में शरण का सुन्दर मार्ग मिले सुन्दर शरण माँ हे आदिशक्ति माँ सुन्दर नमन हे भक्ति स्वरूप जीवन में ப आपकी दया केसमान कुछ भी नहीं है | आपकी भक्ति में शरण आपकी दयाक सुन्दर दान करने दया करें माँ वाले हैं हमें आपकी भक्ति में शरण का सुन्दर मार्ग मिले सुन्दर शरण माँ - ShareChat