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#मैं जाना चाहता हूँ अमेरिका
मैं जाना चाहता हूँ अमेरिका - मैं जाना चाहता हूँ अमेरिका हूँ अमेरिका ख़ूब जाना चाहता पी जाना चाहता हूँ अमेरिका मैं खा जाना चाहता हूँ अमेरिका क्या क्या क्या है अमेरिका रे बोलो क्या क्या क्या है अमेरिका बस ख़ामख़्वाह है अमेरिका रे बोलो बस ख़ामख़्वाह है अमेरिका .सोने की खान है अमेरिका गोरी गोरी रान है अमेरिका मेरा अरमान है अमेरिका रे हाय मेरी जान है अमेरिका मैं जाना चाहता हूँ॰.. में ऐसे क्या॰क्या हीरे मोती जड़े हुए अमरीका देखो उसके फुटपाथों पर कितने भूखे पडे़े हुए जिधर उसे दिखती गुंजाइश वहीं वहीं घुस जाता है सबकी छाती पर मूँगों को दलना उसको आता है अमरीका है क्या...कद्दू अमरीका है क्या...बदबू टिंडा अमरीका है क्या अमरीका है...मुछमुण्डा बात हमारी ; अब भी सँभल जाइए हज़रत मान চিচমমীই ীফিা मैं जाना चाहता हूँ अमेरिका हूँ अमेरिका ख़ूब जाना चाहता पी जाना चाहता हूँ अमेरिका मैं खा जाना चाहता हूँ अमेरिका क्या क्या क्या है अमेरिका रे बोलो क्या क्या क्या है अमेरिका बस ख़ामख़्वाह है अमेरिका रे बोलो बस ख़ामख़्वाह है अमेरिका .सोने की खान है अमेरिका गोरी गोरी रान है अमेरिका मेरा अरमान है अमेरिका रे हाय मेरी जान है अमेरिका मैं जाना चाहता हूँ॰.. में ऐसे क्या॰क्या हीरे मोती जड़े हुए अमरीका देखो उसके फुटपाथों पर कितने भूखे पडे़े हुए जिधर उसे दिखती गुंजाइश वहीं वहीं घुस जाता है सबकी छाती पर मूँगों को दलना उसको आता है अमरीका है क्या...कद्दू अमरीका है क्या...बदबू टिंडा अमरीका है क्या अमरीका है...मुछमुण्डा बात हमारी ; अब भी सँभल जाइए हज़रत मान চিচমমীই ীফিা - ShareChat
#इक बगल में चाँद होगा,
इक बगल में चाँद होगा, - इक बगल में चाँद होगा , इक बगल में रोटियाँ इक बगल में नींद होगी , इक बगल में लोरियाँ हम चाँद पे, हम चाँद पे, रोटी की चादर डाल कर सो जाएँगे और नींद से, और नींद से कह देंगे लोरी कल सुनाने आएँगे इक बगल में चाँद होगा , इक बगल में रोटियाँ इक बगल में नींद होगी , इक बगल में लोरियाँ हम चाँद पे , रोटी की चादर डाल के सो जाएँगे और नींद से कह देंगे लोरी कल सुनाने आएँगे एक बगल में खनखनाती , सीपियाँ हो जाएँगी एक बगल में कुछ रुलाती सिसकियाँ हो जाएँगी #,6#' हम सीपियो ' सीपियो में भरके सारे तारे छू के आएँगे और सिसकियो को, और सिसकियो को गुदगुदी कर कर के यूँ बहलाएँगे और सिसकियों को , गुदगुदी कर कर के यूँ बहलाएँगे अब न तेरी सिसकियों पे कोई रोने आएगा गम न करजो आएगा वो फिर कभी ना जाएगा याद रख पर कोई अनहोनी नहीं तू लाएगी लाएगी तो फिर कहानी और कुछ हो जाएगी याट रख पर कोर्ड अनहोनी नहीं त लाएगी इक बगल में चाँद होगा , इक बगल में रोटियाँ इक बगल में नींद होगी , इक बगल में लोरियाँ हम चाँद पे, हम चाँद पे, रोटी की चादर डाल कर सो जाएँगे और नींद से, और नींद से कह देंगे लोरी कल सुनाने आएँगे इक बगल में चाँद होगा , इक बगल में रोटियाँ इक बगल में नींद होगी , इक बगल में लोरियाँ हम चाँद पे , रोटी की चादर डाल के सो जाएँगे और नींद से कह देंगे लोरी कल सुनाने आएँगे एक बगल में खनखनाती , सीपियाँ हो जाएँगी एक बगल में कुछ रुलाती सिसकियाँ हो जाएँगी #,6#' हम सीपियो ' सीपियो में भरके सारे तारे छू के आएँगे और सिसकियो को, और सिसकियो को गुदगुदी कर कर के यूँ बहलाएँगे और सिसकियों को , गुदगुदी कर कर के यूँ बहलाएँगे अब न तेरी सिसकियों पे कोई रोने आएगा गम न करजो आएगा वो फिर कभी ना जाएगा याद रख पर कोई अनहोनी नहीं तू लाएगी लाएगी तो फिर कहानी और कुछ हो जाएगी याट रख पर कोर्ड अनहोनी नहीं त लाएगी - ShareChat
#हीरों के राँझों के नगमें क्या अब भी सुने जाते हैं हाँ वहाँ
हीरों के राँझों के नगमें क्या अब भी सुने जाते हैं हाँ वहाँ - लाहौर के उस पहले ज़िले के, दो परगना में पहुँचे रेशम गली के, दूजे कूचे के, चौथे मकाँ में पहुँचे कहते हैं जिसको , दरूजा मुलुक उस, पाकिस्ताँ में ப लिखता हूँ ख़त मैं हिन्दोस्ताँ से, पहलू ए ्हुसनाँ में ओ हुस्नाँ 10 मैं तो हूँ बैठा, ओ हुसनाँसेरी यादों में खोया पुरानी पल पल को गिनता, पल पल को चुनता , बीती कहानी में खोया पत्ते जब झड़ते , हिन्दोस्ताँ में , बातें तुम्हारी ये बोलें होता उजाला , हिन्दोस्ताँ में यादें  तुम्हारी ये बोलें ओ हुस्नाँ मेरी, ये तो बता दो होता है ऐसा क्या उस गुलिस्ताँ में रहती हो नन्हीं कबूतर ्सी गुम तुम जहाँ ओ हुस्नाँ . पत्ते क्या झड़ते हैं पाकिस्ताँ में बैसे ही जैसे झड़ते यहाँ ओ हुस्नाँ.. होता उजाला क्या बैसा ही है जैसा होता हिन्दुस्ताँ में हाँ 3EFii... लाहौर के उस पहले ज़िले के, दो परगना में पहुँचे रेशम गली के, दूजे कूचे के, चौथे मकाँ में पहुँचे कहते हैं जिसको , दरूजा मुलुक उस, पाकिस्ताँ में ப लिखता हूँ ख़त मैं हिन्दोस्ताँ से, पहलू ए ्हुसनाँ में ओ हुस्नाँ 10 मैं तो हूँ बैठा, ओ हुसनाँसेरी यादों में खोया पुरानी पल पल को गिनता, पल पल को चुनता , बीती कहानी में खोया पत्ते जब झड़ते , हिन्दोस्ताँ में , बातें तुम्हारी ये बोलें होता उजाला , हिन्दोस्ताँ में यादें  तुम्हारी ये बोलें ओ हुस्नाँ मेरी, ये तो बता दो होता है ऐसा क्या उस गुलिस्ताँ में रहती हो नन्हीं कबूतर ्सी गुम तुम जहाँ ओ हुस्नाँ . पत्ते क्या झड़ते हैं पाकिस्ताँ में बैसे ही जैसे झड़ते यहाँ ओ हुस्नाँ.. होता उजाला क्या बैसा ही है जैसा होता हिन्दुस्ताँ में हाँ 3EFii... - ShareChat
#अपनी गंध नहीं बेचूंगा
अपनी गंध नहीं बेचूंगा - चाहे सभी सुमन बिक जाएं चाहे ये उपवन बिक जाएं चाहे सौ फागुन बिक जाएं पर मैं गंध नहीं बेचूंगा - अपनी गंध नहीं बेचूंगा जिस डाली ने गोद खिलाया जिस कोंपल ने दी अरुणाई लक्षमन जैसी चौकी देकर जिन कांटों ने जान बचाई इनको पहिला हक आता है चाहे मुझको नोचें तोडें चाहे जिस मालिन से मेरी पांखुरियों के रिश्ते जोडें ओ मुझ पर मंडरानेवालों मेरा मोल लगानेवालों जो मेरा संस्कार बन गईवो सौगंध नहीं बेचूंगा अपनी गंध नहीं बेचूंगा - चाहे सभी सुमन बिक जाएं। मौसम से क्या लेना मुझको ये तो आएगा जाएगा दाता होगा तो दे देगा खाता होगा तो खाएगा के सुर '  पतझारों का कोमल भंवरों : सरगम যীনা-খ্ীনা मुझ पर क्या अंतर लाएगा पिचकारी का जादू ्टोना ओ नीलम लगानेवालों पल-्पल दाम बढानेवालों मैंने जो कर लिया स्वयं से वो अनबंध नहीं बेचंगा चाहे सभी सुमन बिक जाएं चाहे ये उपवन बिक जाएं चाहे सौ फागुन बिक जाएं पर मैं गंध नहीं बेचूंगा - अपनी गंध नहीं बेचूंगा जिस डाली ने गोद खिलाया जिस कोंपल ने दी अरुणाई लक्षमन जैसी चौकी देकर जिन कांटों ने जान बचाई इनको पहिला हक आता है चाहे मुझको नोचें तोडें चाहे जिस मालिन से मेरी पांखुरियों के रिश्ते जोडें ओ मुझ पर मंडरानेवालों मेरा मोल लगानेवालों जो मेरा संस्कार बन गईवो सौगंध नहीं बेचूंगा अपनी गंध नहीं बेचूंगा - चाहे सभी सुमन बिक जाएं। मौसम से क्या लेना मुझको ये तो आएगा जाएगा दाता होगा तो दे देगा खाता होगा तो खाएगा के सुर '  पतझारों का कोमल भंवरों : सरगम যীনা-খ্ীনা मुझ पर क्या अंतर लाएगा पिचकारी का जादू ्टोना ओ नीलम लगानेवालों पल-्पल दाम बढानेवालों मैंने जो कर लिया स्वयं से वो अनबंध नहीं बेचंगा - ShareChat
#छीनकर छ्लछंद से
छीनकर छ्लछंद से - छीनकर छ्लछंद से हक पराया मारकर अम्रित पिया तो क्या पिया? हो गये बेशक अमर जी रहे अम्रित उमर लेकिन अभय अनमोल सारा छिन गया | देवता तो हो गये पर क्या हुआ देवत्व का? आयुभर चिन्ता करो अब पद प्रतिष्टा, राजसत्ता और अपने लोक की! छिन नहीं जाए सुधा सिंहासनों की एकहि भय रात दिन आठों प्रहर प्राण में बैठा रहे-- इस भयातुर अमर जीवन का करो क्या? जो किसि षड्यंत्र मे छलछंद में शामिल नहीं था पी गया सारा हलाहल हो गया कैसे अमर? पा गया साम्राज्य ++- छीनकर छ्लछंद से हक पराया मारकर अम्रित पिया तो क्या पिया? हो गये बेशक अमर जी रहे अम्रित उमर लेकिन अभय अनमोल सारा छिन गया | देवता तो हो गये पर क्या हुआ देवत्व का? आयुभर चिन्ता करो अब पद प्रतिष्टा, राजसत्ता और अपने लोक की! छिन नहीं जाए सुधा सिंहासनों की एकहि भय रात दिन आठों प्रहर प्राण में बैठा रहे-- इस भयातुर अमर जीवन का करो क्या? जो किसि षड्यंत्र मे छलछंद में शामिल नहीं था पी गया सारा हलाहल हो गया कैसे अमर? पा गया साम्राज्य ++- - ShareChat
#गन्ने! मेरे भाई!
गन्ने! मेरे भाई! - इक्ष्वाकु वंश के आदि पुरुष गन्ने! मेरे भाई!! रेशे रेशे में रस और रगनरग में मिठास का जस ri तो प्यारे भाई गन्ने! इक्ष्वाकु वंश के आदर्श! ! तुम्हारा वही हश्र होगा जो होता आया है-- पोरी-पोरी काटेंगे लोग तुम्हें चूस- चूसकर खाएँगे चरखियों में पेलेंगे आख़िरी बूँद तक निचोड़ेंगे किसी भी क़ीमत पर तुम्हें ज़िन्दा नहीं छोड़ेंगे तुम्हारे वल्कल जैसे छिलकों तक को सुखाएँगे तुम्हारे ही रस से गुड़ या शक्कर बनाने वाली भट्ठी में ईंधन बनाकर स्तत्राागे | इक्ष्वाकु वंश के आदि पुरुष गन्ने! मेरे भाई!! रेशे रेशे में रस और रगनरग में मिठास का जस ri तो प्यारे भाई गन्ने! इक्ष्वाकु वंश के आदर्श! ! तुम्हारा वही हश्र होगा जो होता आया है-- पोरी-पोरी काटेंगे लोग तुम्हें चूस- चूसकर खाएँगे चरखियों में पेलेंगे आख़िरी बूँद तक निचोड़ेंगे किसी भी क़ीमत पर तुम्हें ज़िन्दा नहीं छोड़ेंगे तुम्हारे वल्कल जैसे छिलकों तक को सुखाएँगे तुम्हारे ही रस से गुड़ या शक्कर बनाने वाली भट्ठी में ईंधन बनाकर स्तत्राागे | - ShareChat
#चंदू, मैंने सपना देखा,
चंदू, मैंने सपना देखा, - चंदू , मैंने सपना देखा, उछल रहे तुम ज्यों हिरनौटा चंदू, मैंने सपना देखा, अमुआ से हूँ पटना लौटा चंदू, मैंने सपना देखा, तुम्हें खोजते बद्री बाबू चंदू मैंने सपना देखा, खेल॰्कूद में हो बेकाबू मैंने सपना देखा देखा, कल परसों ही छूट रहे हो चंदू , मैंने सपना देखा, खूब पतंगें लूट रहे हो चंदू , मैंने सपना देखा, लाएहो तुम नया कैलंडर चंदू , मैंने सपना देखा, तुम हो बाहर मैं हूँ अंदर चंदू , मैंने सपना देखा, अमुआ से पटना आए हो चंदू, मैंने सपना देखा, मेरे लिए शहद लाए हो चंदू मैंने सपना देखा, फैल गया है सुयश तुम्हारा चंदू मैंने सपना देखा, तुम्हें जानता भारत सारा चंदू मैंने सपना देखा, बहुत बड़े डाक्टर हो तुम तो चंदू मैंने सपना देखा, अपनी ड्यूटी में तत्पर हो चंदू , मैंने सपना देखा, इम्तिहान में बैठे हो तुम चंदू , मैंने सपना देखा, पुलिसऱ्यान में बैठे हो तुम चंदू , मैंने सपना देखा, तुम हो बाहर, मैं हूँ अंदर चंदू, मैंने सपना देखा, लाए हो तुम नया कैलेंडर चंदू , मैंने सपना देखा, उछल रहे तुम ज्यों हिरनौटा चंदू, मैंने सपना देखा, अमुआ से हूँ पटना लौटा चंदू, मैंने सपना देखा, तुम्हें खोजते बद्री बाबू चंदू मैंने सपना देखा, खेल॰्कूद में हो बेकाबू मैंने सपना देखा देखा, कल परसों ही छूट रहे हो चंदू , मैंने सपना देखा, खूब पतंगें लूट रहे हो चंदू , मैंने सपना देखा, लाएहो तुम नया कैलंडर चंदू , मैंने सपना देखा, तुम हो बाहर मैं हूँ अंदर चंदू , मैंने सपना देखा, अमुआ से पटना आए हो चंदू, मैंने सपना देखा, मेरे लिए शहद लाए हो चंदू मैंने सपना देखा, फैल गया है सुयश तुम्हारा चंदू मैंने सपना देखा, तुम्हें जानता भारत सारा चंदू मैंने सपना देखा, बहुत बड़े डाक्टर हो तुम तो चंदू मैंने सपना देखा, अपनी ड्यूटी में तत्पर हो चंदू , मैंने सपना देखा, इम्तिहान में बैठे हो तुम चंदू , मैंने सपना देखा, पुलिसऱ्यान में बैठे हो तुम चंदू , मैंने सपना देखा, तुम हो बाहर, मैं हूँ अंदर चंदू, मैंने सपना देखा, लाए हो तुम नया कैलेंडर - ShareChat