...
ShareChat
click to see wallet page
@chamansolanki
chamansolanki
...
@chamansolanki
I Love ShareChat
#santrampal mahraj ji #gyan ganga #GodMorningTuesday #2026_की_सबसे_बड़ी_भविष्यवाणी . अधम सुल्तान बलख बुखारे का बादशाह सब तज के निज लिया फकीरी, अल्लाह नाम प्यारे का। खाते जा मुख लुकमा उमदा, मिसरी कन्द छुहारे का। सो अब खाते रूखा सूखा, टुकड़ा शाम सकारे का। जिस तन पहने खासा मलमल, तीन टंक नौ तारे का। सो अब भार उठावन लागे, गुद्दर सेर दस भारे का। चुन चुन कलियां सेज बिछाई, फूलां न्यारे न्यारे का। सो अब शयन करें धरती पर, कंकर नहीं बुहारे का। जिनके संग कटक दल बादल, झंडा न्यारे - न्यारे का। कहें कबीर सुनो भाई साधो, फक्कड़ हुआ अखाड़े का। Factful Debates YouTube Channel
santrampal mahraj ji - इब्राहिम अधम सुल्तान को मिले परमात्मा इब्राहिम अधम सुल्तान को मिले परमात्मा - ShareChat
#santrampal mahraj ji #gyan ganga #GodMorningTuesday #2026_की_सबसे_बड़ी_भविष्यवाणी . सभी जीवों मे मानव देह उत्तम गीता अध्याय 13 श्लोक 22 में भी गीता ज्ञान दाता ने अपने से अन्य परमात्मा का प्रत्यक्ष प्रमाण बताया है। गीता प्रैस गोरखपुर से प्रकाशित गीता में इस श्लोक का अर्थ बिल्कुल गलत किया है। जैसे पूर्व के श्लोकों में वर्णन आया है कि परमात्मा प्रत्येक जीव के साथ ऐसे रहता है, जैसे सूर्य प्रत्येक घड़े के जल में स्थित दिखाई देता है। उस जल को अपनी उष्णता दे रहा है। इसीप्रकार परमात्मा प्रत्येक जीव के हृदय कमल में ऐसे विद्यमान है जैसे सौर ऊर्जा सयन्त्र जहाँ भी लगा है तो वह सूर्य से उष्णता प्राप्त करके ऊर्जा संग्रह करता है। इसी प्रकार प्रत्येक है। उसको “परमात्मा” कहा जाता है। अक्षर का अर्थ अविनाशी होता है। आपने गीता अध्याय 15 श्लोक 16 में भी अक्षर पुरूष को भी नाशवान बताया है, परन्तु प्रकरणवश अर्थ अन्य भी होता है। गीता अध्याय 15 श्लोक 16 में कहा है कि क्षर और अक्षर ये पुरूष इस लोक में है, ये दोनों तथा इनके अन्तर्गत जितने जीव हैं, वे नाशवान हैं, आत्मा किसी की भी नहीं मरती। फिर गीता अध्याय 15 श्लोक 17 में स्पष्ट किया है कि पुरूषोत्तम तो उपरोक्त दोनों प्रभुओं से अन्य है। वही अविनाशी है, वही सबका धारण-पोषण करने वाला वास्तव में अविनाशी है। गीता अध्याय 8 श्लोक 3 में तत् ब्रह्म को परम अक्षर ब्रह्म कहा है। अक्षर का अर्थ अविनाशी है, परन्तु यहाँ परम अक्षर ब्रह्म कहा है। इससे भी सिद्ध हुआ कि अक्षर से आगे परम अक्षर ब्रह्म है, वह वास्तव में अविनाशी है।जैसे ब्रह्मा जी की आयु 100वर्ष बताई जाती है। देवताओं का वर्ष कितने समय का है? सुनो! चार युग सत्ययुग, त्रोतायुग, द्वापरयुग तथा कलयुग का एक चतुर्युग होता है जिसमें मनुष्यों के त्रितालीस लाख बीस हजार वर्ष होते हैं। 1008 चतुर्युग का ब्रह्मा जी का दिन और इतनी ही रात्रि होती है, ऐसे 30 दिन-रात्रि का एक महीना तथा 12 महीनों का ब्रह्मा जी का एक वर्ष हुआ। ऐसे 100 वर्ष की श्री ब्रह्मा जी की आयु है। श्री विष्णु जी की आयु श्री ब्रह्मा जी से 7 गुणा है।700 वर्ष। श्री शंकर जी की आयु श्री विष्णु जी से 7 गुणा अधिक 4900 वर्ष। ब्रह्म अथार्त क्षर पुरूष की आयु 70 हजार शंकर की मृत्यु के पश्चात् एक ब्रह्म की मृत्यु होती है अर्थात् क्षर पुरूष की मृत्यु होती है। इतने समय का अक्षर पुरूष का एक युग होता है। अक्षर पुरूष की आयु के बारे मे गीता अध्याय 8 श्लोक 17 में कहा है कि सहंस्र युग पर्यन्तम् अहः यत् ब्रह्मणः विदुः। रात्रिम् युग सहंस्रान्तम् ते अहोरात्र विदः जनाः।। (ब्रह्मणः) अक्षर पुरूष का (यत) जो (अहः) दिन है वह (सहंस्रयुग प्रयन्तम्) एक हजार युग की अवधि वाला (विदुः) जानते हैं (ते) वे जना व्यक्ति (अहोरात्र) दिन-रात को (विदः) जानने वाले हैं। इस श्लोक में “ब्रह्मा” शब्द मूल पाठ में नहीं है और न ही “चतुर युग” शब्द मूल पाठ में है, इसमें “ब्रह्मण” शब्द है जिसका अर्थ सचिदानन्द ब्रह्म अर्थात् परम अक्षर ब्रह्म होता है। गीता अध्याय 17 श्लोक 23 में ब्रह्मणः का अर्थ सचिदानन्द घन ब्रह्म किया है, वह अनुवादकां ने ठीक किया है। इस गीता अध्याय 8 श्लोक 17 में आयु का प्रकरण है। इसलिए यहाँ पर “ब्रह्मण” का अर्थ “अक्षर ब्रह्म” बनता है, यहाँ अक्षर पुरूष की आयु की जानकारी दी है। अक्षर पुरूष का एक दिन उपरोक्त एक हजार युग का होता है। 70 हजार शंकर की मृत्यु के पश्चात् एक क्षर पुरूष की मृत्यु होती है, वह समय एक युग अक्षर पुरूष का होता है। ऐसे बने हुए एक हजार युग का अक्षर पुरूष का दिन तथा इतनी ही रात्रि होती है, ऐसे 30 दिन रात्रि का एक महीना तथा 12 महीनों का अक्षर पुरूष का एक वर्ष तथा 100 वर्ष की अक्षर पुरूष की आयु है। इसके पश्चात् इसकी मृत्यु होती है। इसलिए गीता अध्याय 15 श्लोक 16 में क्षर पुरूष तथा अक्षर पुरूष दोनों नाशवान कहे हैं। गीता अध्याय 15 श्लोक 17 में जो वास्तव में अविनाशी परमात्मा कहा है। यह परमात्मा सर्व प्राणियों के नष्ट होने पर भी नाश में नहीं आता। गीता अध्याय 8 श्लोक 20 से 22 में स्पष्ट है कि वह परम अक्षर ब्रह्म सब प्राणियों के नष्ट होने पर भी कभी नष्ट नहीं होता। जैसे सफेद मिट्टी के बने कप-प्लेट होते हैं, उनका ज्ञान है कि हाथ से छूटे और पक्के फर्श पर गिरे और टूटे अर्थात् नाशवान “क्षर” है, यह स्थिति तो क्षर पुरूष की जानो। दूसरे कप-प्लेट स्टील के बने हां, वे बहुत समय उपरान्त जंग लगकर नष्ट होते हैं, शीघ्र टूटते व नष्ट नहीं होते। मिट्टी के बने कप-प्लेट की तुलना में स्टील के कप प्लेट चिर-स्थाई हैं, अविनाशी प्रतीत होते हैं, परन्तु हैं नाशवान। इसी प्रकार स्थिति “अक्षर पुरूष” की जानो।तीसरे कप-प्लेट सोने के बने हों। वे कभी नष्ट नहीं होते, उनको जंग नहीं लगता। यह स्थिति “परम अक्षर ब्रह्म” की जानो। यह वास्तव में अविनाशी हैं, इसलिए प्रकरणवश “अक्षर” का अर्थ नाशवान भी होता है, वास्तव में अक्षर का अर्थ अविनाशी परमात्मा होता है। गीता अध्याय 8 श्लोक 11 में मूल पाठ यत् अक्षरम् वेदविदः वदन्ति विशन्ति यत् यतयः बीतरागाः यत् इच्छन्तः ब्रह्म चर्यम चरन्ति तत् ते पदम् संग्रहेण प्रवक्ष्ये। इस श्लोक में “अक्षर” का अर्थ अविनाशी परमात्मा के लिए हैः-(वेद विदः) तत्त्वदर्शी सन्त अर्थात् वेद के तात्पर्य को जानने वाले महात्मा (यत्) जिसे (अक्षरम्) अविनाशी (वदन्ति) कहते हैं। (यतयः) साधना रत (बीतरागा) आसक्ति रहित साधक (यत्) जिस लोक में (विशन्ति) प्रवेश करते हैं और (यत्) जिस परमात्मा को (इच्छन्तः) चाहने वाले साधक (ब्रह्म चर्यम) ब्रह्मचर्य अर्थात् शिष्य परम्परा का (चरन्ति) आचरण करते हैं, (तत्) उस (पदम्) पद को (ते) तेरे लिए मैं (संग्रहेषा) संक्षेप में (प्रवक्ष्ये) कहूँगा। इस श्लोक में “अक्षर” का अर्थ अविनाशी परमात्मा ठीक है। कबीर जी ने सूक्ष्म वेद में कहा है कि गुरू बिन काहू न पाया ज्ञाना,ज्यों थोथाभूष छिड़े मूढ़किसाना। गुरू बिन वेद पढ़े जो प्राणी, समझे ना सार रहे अज्ञानी।। Factful Debates YouTube Channel
santrampal mahraj ji - मुक्तिबोध पोस्ट (४16 ४१७) चौरासी लाख प्रकार के जीवों से मानव देह उत्तम है SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL JI @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGODORG SAINT RAMPAL Jl MAHARAJ मुक्तिबोध पोस्ट (४16 ४१७) चौरासी लाख प्रकार के जीवों से मानव देह उत्तम है SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL JI @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGODORG SAINT RAMPAL Jl MAHARAJ - ShareChat
#santrampal mahraj ji #gyan ganga #GodMorningTuesday #2026_की_सबसे_बड़ी_भविष्यवाणी . #शब्द जाग जाग जंजाली जियरा, यह तो मेला हाट का...। धोबी घर के कुत्ता होइहौ, नहिं घर का न घाट का...। खानिन भ्रमत अमित दुख पाय, मानुष तन हाथ का। माथे भार धरयो ममता का, मानो घोड़ा भाँट का....। ‌जाग जाग जंजाली जियरा, यह तो मेला हाट का....। धोबी घर के कुत्ता होइहौ, नहिं घर का न घाट का...। दुनिया दौलत माल खजाना, जामा दरकस पाट का। सोने रूप भंडार भरे हैं, धरा सन्दूखा काठ का.......। जाग जाग जंजाली जियरा, यह तो मेला हाट का....। धोबी घर के कुत्ता होइहौ, नहिं घर का न घाट का...। मातु पिता सुत बन्धु सहोदर कुटुम्ब कबीला ठाट का। अन्त की बेरिया चला अकेला, मानो बटोही बाट का। जाग जाग जंजाली जियरा, यह तो मेला हाट का...। धोबी घर के कुत्ता होइहौ, नहिं घर का न घाट का...। आये सन्त आदर न कीन्हों, धंधा किहो घर घाट का। कहे कबीर सुनो भाई साधो, भयो किरौना खाट का। जाग जाग जंजाली जियरा, यह तो मेला हाट का...। धोबी घर के कुत्ता होइहौ, नहिं घर का न घाट का...। Factful Debates YouTube Channel
santrampal mahraj ji - सरबंगी देवा। बोलत हैं धर्मदास , सुनौं देखत पिण्ड अरू प्राण , कहौ तुम अलख अभेवा। | सरबंगी देवा। बोलत हैं धर्मदास , सुनौं देखत पिण्ड अरू प्राण , कहौ तुम अलख अभेवा। | - ShareChat
#santrampal mahraj ji #gyan ganga #GodMorningTuesday #2026_की_सबसे_बड़ी_भविष्यवाणी . कबीर साहिब जी अलख अभेवा।। बोलत हैं धर्मदास, सुनौं सरबंगी देवा। देखै पिण्ड अरू प्राण,कहौ तुम अलख अभेवा।। नाद बिंद की देह, शरीर है प्राण‌ तुम्हारै। तुम बोलत बड़ बात, नहीं आवत दिल म्हारै।। खान पान अस्थान, देह में बोलत दीशं। कैसे अलख स्वरूप, भेद कहियो जगदीशं।। ‌ कैसैं रचे चंद अरू सूर, नदी गिरिबर पाषानां। कैसैं पानी पवन, धरनि‌ पृथ्वी असमानां।। कैसैं सष्टि संजोग, बिजोग‌ करैं किस‌ भांती। कौन कला करतार,कौन बिधि अबिगत नांती।। कैसैं घटि घटि रम रहे, किस बिधि रहौ नियार। कैसैं धरती पर चलौ, कैसैं अधर अधार।। धर्मदास जी श्री विष्णु जी के भक्त थे। शिव जी की भी भक्ति करते थे। परमात्मा इन्हीं को मानते थे। फिर लोकवेद के आधार से परमात्मा को निराकार भी कहते थे। इसी आधार पर धर्मदास जी ने परमात्मा से प्रश्न किया कि आपका नाद-बिन्द यानि माता-पिता से उत्पन्न शरीर प्रत्यक्ष दिखाई दे रहा है। आप खाते-पीते हो, बोलते, चलते हो। आप अपने को परमेश्वर भी कह रहे हो। परमात्मा तो निराकार है। वह दिखाई नहीं देता। हे जगदीश! मुझे यह (भेद) रहस्य समझाईए। आपने सृष्टि की रचना कैसे की? कैसे चाँद व सूर्य उत्पन्न किए? कैसे नदी, पहाड़, पानी, पवन, पृथ्वी, आकाश की रचना की? आप कितनी कला के प्रभु हैं? जैसे श्री विष्णु जी सोलह कला के प्रभु हैं। आप कैसे सर्वव्यापक हैं? कैसे सबसे (न्यारे) भिन्न हो? धरती पर चलते हो। परंतु आकाश में कैसे चलते हो? यह सब ज्ञान मुझे बताएँ। Factful Debates YouTube Channel
santrampal mahraj ji - बौलै जिंद कबीर, बाणी धर्मदासा। 31 हम खालिक हम खलक, सकल हमरा प्रकाशा | 7 बौलै जिंद कबीर, बाणी धर्मदासा। 31 हम खालिक हम खलक, सकल हमरा प्रकाशा | 7 - ShareChat
#santrampal mahraj ji #gyan ganga #GodMorningTuesday #2026_की_सबसे_बड़ी_भविष्यवाणी . कबीर साहिब जी ही सत्य पुरूष ‌हैं बौलै जिंद कबीर, सुनौ मेरी बाणी धर्मदासा। हम खालिक हम खलक, सकल‌ हमरा प्रकाशा।। हमहीं से चंद्र अरू सूर, हमही से पानी और पवना। हमही से धरणि आकाश, रहैं हम चौदह भवना।। हम रचे सब पाषान नदी यह सब खेल हमारा। अचराचर चहुं खानि, बनी बिधि अठारा भारा।। हमही सृष्टि संजोग, बिजोग ‌ किया बोह भांती। हमही आदि अनादि, हमैं अबिगत कै नाती।। हमही माया मूल है, हमही हैं ब्रह्म‌ उजागर। हमही अधरि बसंत, हमहि हैं सुख कै‌ सागर।। हमही से ब्रह्मा बिष्णु,‌ ईश है कला हमारी। हमही पद प्रवानि, कलप कोटि जुग तारी।। हमही साहिब सत्य पुरूष ‌हैं,यह सब रूप हमार। जिंद कहै धर्मदास सैं, शब्द ‌ सत्य घनसार।। हे धर्मदास! आपने जो भक्त बताए हैं, वे पूर्व जन्म के परमेश्वर के परम भक्त थे। सत्य साधना किया करते थे जिससे उनमें भक्ति-शक्ति जमा थी। किसी कारण से वे पार नहीं हो सके। उनको तुरंत मानव जन्म मिला। जहाँ उनका जन्म हुआ, उस क्षेत्रा में जो लोकवेद प्रचलित था, वे उसी के आधार से साधना करने लगे। जब उनके ऊपर कोई आपत्ति आई तो उनकी इज्जत रखने व भक्ति तथा भगवान में आस्था मानव की बनाए रखने के लिए मैंने वह लीला की थी। मैं समर्थ परमेश्वर हूँ। यह सब सृष्टि मेरी रचना है। हम (खालिक) संसार के मालिक हैं। (खलक) संसार हमसे ही उत्पन्न है। हमने यानि मैंने अपनी शक्ति से चाँद, सूर्य, तारे, सब ग्रह तथा ब्रह्माण्ड उत्पन्न किए हैं। ब्रह्मा, विष्णु तथा महेश की आत्मा की उत्पत्ति मैंने की है। हे धर्मदास! मैं सतपुरूष हूँ। यह सब मेरी आत्माएँ हैं जो जीव रूप में रह रहे हैं। यह सत्य वचन है। Factful Debates YouTube Channel
santrampal mahraj ji - बोलत है धर्मदास , सुनौं जिंदे मम बाणी। कौन तुम्हारी जाति, कहांसैं आये प्राणी। बोलत है धर्मदास , सुनौं जिंदे मम बाणी। कौन तुम्हारी जाति, कहांसैं आये प्राणी। - ShareChat
#santrampal mahraj ji #gyan ganga #GodMorningTuesday #2026_की_सबसे_बड़ी_भविष्यवाणी . परमात्मा पत्थर नहीं जिंदा है बोलत है धर्मदास, सुनौं जिंदे मम बाणी। कौन तुम्हारी जाति, कहां सैं आये प्राणी।। ये अचरज की बात, कही तैं मो सैं लीला। नामा के पीया दूध, पत्थर सैं करी करीला। नरसीला नित नाच, पत्थर के आगै रहते। जाकी हूंडी झालि, सांवल जो शाह कहंते।। पत्थर सेयै रैंदास, दूध जिन बेगि पिलाया। सुनौ जिंद जगदीश, कहां तुम ज्ञान सुनाया।। परमेश्वर प्रवानि, पत्थर नहीं कहिये जिंदा। नामा की छांनि छिवाई, दइ देखो सर संधा।। सिरगुण सेवा सार है, निरगुण सें नहीं नेह। सुन जिंदे जगदीश तूं, हम शिक्षा क्या देह।। धर्मदास जी कुछ नाराज होकर परमेश्वर से बोले कि हे (प्राणी) जीव! तेरी जाति क्या है? कहाँ से आया है? आपने मेरे से बड़ी (अचरज) हैरान कर देने वाली बातें कही हैं, सुनो! नामदेव ने पत्थर के देव को दूध पिलाया। नरसी भक्त नित्य पत्थर के सामने नृत्य किया करता यानि पत्थर की मूर्ति की पूजा करता था। उसकी (हूंडी झाली) ड्रॉफ्ट कैश किया। वहाँ पर सांवल शाह कहलाया। रविदास ने पत्थर की मूर्ति को दूध पिलाया। हे जिन्दा! तू यह क्या शिक्षा दे रहा है कि पत्थर की पूजा त्याग दो। ये मूर्ति परमेश्वर समान हैं। इनको पत्थर न कहो। नामदेव की छान (झोंपड़ी की छत) छवाई (डाली)। देख ले परमेश्वर की लीला। हम तो सर्गुण (पत्थर की मूर्ति जो साक्षात आकार है) की पूजा सही मानते हैं। निर्गुण से हमारा लगाव नहीं है। हे जिन्दा! मुझे क्या शिक्षा दे रहा है? Factful Debates YouTube Channel
santrampal mahraj ji - মে সান संदेश কতান आन भया बनजारा षट्दल किन्ही हाँस है। परमेश्वर कबीर जी स्वय आकर (आन ) केशव बनजारा बने। वैष्णवों , सन्यासी , शैव आदि छः पर्थों के पद्दल कहते हैं गिरी- पुरि, नागा  नाथ व्यक्तियों को जिन्होने हँसी- मजाक करके चिट्ठी डाली थी। किया है कि शक्त सच्चे दिल से मेरे पर विश्वास करके चलता है fa परमात्मा ने यह तो मैं उसकी ऐसे सहायता करता हूँ SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL JI @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGODORG MAHARAJ SATRIMPAL J মে সান संदेश কতান आन भया बनजारा षट्दल किन्ही हाँस है। परमेश्वर कबीर जी स्वय आकर (आन ) केशव बनजारा बने। वैष्णवों , सन्यासी , शैव आदि छः पर्थों के पद्दल कहते हैं गिरी- पुरि, नागा  नाथ व्यक्तियों को जिन्होने हँसी- मजाक करके चिट्ठी डाली थी। किया है कि शक्त सच्चे दिल से मेरे पर विश्वास करके चलता है fa परमात्मा ने यह तो मैं उसकी ऐसे सहायता करता हूँ SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL JI @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGODORG MAHARAJ SATRIMPAL J - ShareChat
#santrampal mahraj ji #gyan ganga किसानों के आंसुओं को मुस्कान में बदला गया। यही सच्चा धर्म है। #kalyug #satyug #goldenage #help #humanity #Kindness #SantRampalJiMaharaj #KabirisGod #SupremeGod देखिये विशेष वीडियो कलयुग में सतयुग की शुरुआत भाग 4 Factful Debates YouTube Channel पर।
santrampal mahraj ji - 2026 # अवतारकाउद््य By the blessings of Sont Rompol Ji Mohoroj, wheot being villages sown even in those Haryana is story' previously devastated by floods For the full view 'The Stort of the Golden Age in Kolyug; Port 4" ये है अवतार SPEA IN     कलयुगमै सतयगळी  Astrologer monq 9upto a शुरूआत [ a ৪াবা -04 [ ON THE Factful Debates 0 YOUTUBE Ir eBadk FACTFUL DEBATES YOUTUBE CHANNEL CfactulDebates h CHANNEL 75 ~ 2026 # अवतारकाउद््य By the blessings of Sont Rompol Ji Mohoroj, wheot being villages sown even in those Haryana is story' previously devastated by floods For the full view 'The Stort of the Golden Age in Kolyug; Port 4" ये है अवतार SPEA IN     कलयुगमै सतयगळी  Astrologer monq 9upto a शुरूआत [ a ৪াবা -04 [ ON THE Factful Debates 0 YOUTUBE Ir eBadk FACTFUL DEBATES YOUTUBE CHANNEL CfactulDebates h CHANNEL 75 ~ - ShareChat
#santrampal mahraj ji #gyan ganga आपदा में अवसर बना—पुनर्निर्माण और सेवा का। #AnnapurnaMuhimSantRampalJi #kalyug #satyug #goldenage #help #humanity #Kindness #SantRampalJiMaharaj #TrueGuru #TatvdarshiSant देखिये विशेष वीडियो कलयुग में सतयुग की शुरुआत भाग 4 Factful Debates YouTube Channel पर।
santrampal mahraj ji - ShareChat
#santrampal mahraj ji #gyan ganga हरियाणा के गांवों की कहानी अब प्रेरणा बन चुकी है। #AnnapurnaMuhimSantRampalJi #kalyug #satyug #humanity #SantRampalJiMaharaj #Satlok #SatlokAshram देखिये विशेष वीडियो कलयुग में सतयुग की शुरुआत भाग 4 Factful Debates YouTube Channel पर।
santrampal mahraj ji - ShareChat
#santrampal mahraj ji #gyan ganga कलयुग में सतयुग की शुरुआत कोई कल्पना नहीं, हरियाणा में घटित सच्चाई है। #FactfulDebatesYouTubeChannel #Haryana #flood #floodrelief #flooding #farmer #india #sanatandharma #AnnapurnaMuhimSantRampalJi #kalyug #satyug #goldenage #help #humanity #Kindness #SaintRampalJi #KabirisGod देखिये विशेष वीडियो कलयुग में सतयुग की शुरुआत भाग 4 Factful Debates YouTube Channel पर।
santrampal mahraj ji - क्या २०२६ से बदल जाएगा Flooded fields in Horyono ore blooming ससार with again wheat crops, thanks to the of groce Sont Rompol Ji Mohoroj सतयगकी आहट Catch the special feature; on the Factful Debates Youlube channel 8tu8pwwKlyn ?14 Factful Debates YOUTUBE fee Buuk : CHANNEL @FactiulDebates 7496801825 165 videos  A32/ subscribers क्या २०२६ से बदल जाएगा Flooded fields in Horyono ore blooming ससार with again wheat crops, thanks to the of groce Sont Rompol Ji Mohoroj सतयगकी आहट Catch the special feature; on the Factful Debates Youlube channel 8tu8pwwKlyn ?14 Factful Debates YOUTUBE fee Buuk : CHANNEL @FactiulDebates 7496801825 165 videos  A32/ subscribers - ShareChat