Shamsher bhalu Khan
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@jigarchuruvi
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Shamsher bhalu Khan
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Teacher, social worker, आंदोलनकारी, Law Student
#सवाल_दर्द_बात दर्द की बातें किसे पता है यार दर्द की यादें। ये खाली पेट बड़ी ज़िम्मेदारी शौक और ख्वाब खुला आकाश सूनी तंग गलियां उड़ती धूल। भटकी लाशें शून्य आवरण में रोयें कि हँसे। आपराधिक घुमंतू विचलित हैं यायावर। ये यादें कैसी तपती धरती पे राख का ढेर। नंगे पैरों को अंधेरों में रोशनी खींच के लाई। एक अरसा तिल तिल तरसा बूंद के लिए। प्यासे की जात रेत में जमा पानी है याद रहा। कुछ छुटा है तलाश किरणों की वह है कहां। छोड़ गया है डूबता हुआ सूर्य एक सवाल। #जिगर_चूरुवी # #🤲 दुआएं #🎄हरे पेड़
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#📚कविता-कहानी संग्रह #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
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01:00
आ खुदा से सामने मेरी शिकायत कर पहले दिल को सब्र भी इनायत कर। तू कहे गर मैं नहीं काम का तेरे अब मेरी चाहत को मगर तू रिवायत कर। वो अमानत हूँ मैं तेरे हवाले से मेरी हस्ती को सरापा विलायत कर। फस्ल-ए-अज़दाद की बातें बहुत हुईं अब नई सोच की कोई हिकायत कर। इन सितारों को ज़मीं पर भी नूर दे जिगर को राहे-हक़ की हिदायत कर। #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #📚कविता-कहानी संग्रह
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#blood #लहू
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01:54
#द्वेष...? यह कट्टरता तुझे अमानुष बना देगी आग जात-धर्म की सब कुछ जला देगी स्वर्ग नहीं नभ में यहीं कर्म-फल है परपीड़ा की समझ भवसागर तिरा देगी जड़ें अंधविश्वास की विनाश ला देगी। ये कट्टरता तुझे अमानुष बना देगी। है मोह-बन्धन से मुक्ति सम्मोहन करुणामय छाया जीवन का चन्दन अथाह गहरे शांत सागर को वंदन अंतश की चेतना प्रफुल्लित स्पंदन अहंकारित मैं खुद से दूर करा देगी। यह कट्टरता तुझे अमानुष बना देगी। पत्थर रज कण में वसुंधरा का अंश सीख प्रकृति से निर्माण और विध्वंश पंछी का किसने पूछा उसका वंश है असहिष्णुता ही धर्म का दंश अनबन की शूल हृदय को जला देगी। यह कट्टरता तुम्हें अमानुष बना देगी। द्वंद्व-भाव से किसका भला हुआ विष तन - मन में है घुला हुआ । है कौन दूध का धुला छाछ से जला हुआ आएं दिन अच्छे समय बुरा टला हुआ द्वेष की ज्वाला पथ से भटका देगी। यह कट्टरता तुम्हें अमानुष बना देगी। त्यागो घृणा, अपनाओ सह-अस्तित्व, मानवता जीवन का वास्तविक तत्व। बाँटे जा प्रेम देख बढ़ता अपनत्व हर पुरुष में हो पुरुष स्त्री में स्त्रीत्व करुणा धरती को स्वर्ग बना देगी यह कट्टरता तुम्हें अमानुष बना देगी। #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #📚कविता-कहानी संग्रह
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - शूल by Shamsher bhalu khan शूल by Shamsher bhalu khan - ShareChat
#खुदा_और_इंसान बने मज़हब अम्न सुकून के लिये हम काम ले रहे इसे जुनून के लिये। ईश्वर के एजेंट खुदाई दलाल के मजे बन्दा उसका तरसे रोटी दो जून के लिये। आदमी जुदा एक ख़ुदा की ज़मीन हम लड़ें आपस में प्यासे खून के लिये। कहीं दूध बहता नालियों में फ़िज़ूल कहीं रोती माँ बच्चों को नून के लिये। परिंदों का खालिक एक इंसान के दो लड़े पजामा, धोती पतलून के लिये। ग़िज़ा सबको दी मुताबिक मुकाम इख़्तिलाफ़ चावल, बोटी चून के लिये। मौत आखिरी मक़ाम तेरा मेरा जिगर कर कुछ आखिरी घर सुतून के लिये। #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #खुदा_और_इंसान
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रीढ़ #😇 चाणक्य नीति #📚कविता-कहानी संग्रह
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01:49
#📚कविता-कहानी संग्रह #😇 चाणक्य नीति
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01:38