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#❤️जीवन की सीख #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏 प्रेरणादायक विचार #मेरे विचार #🙏गीता ज्ञान🛕
❤️जीवन की सीख - 3 ५८६   वक्त और शिक्षक दौनौं सीख्वातै है अन्तर चै ह्वौता है॰ शिक्षक सीख्वाकर परीक्षा लैतै है और वक्त परीक्षा लैकर॰ CCIGT శ్ర్ MN 3 ५८६   वक्त और शिक्षक दौनौं सीख्वातै है अन्तर चै ह्वौता है॰ शिक्षक सीख्वाकर परीक्षा लैतै है और वक्त परीक्षा लैकर॰ CCIGT శ్ర్ MN - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕 #❤️जीवन की सीख #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏कर्म क्या है❓ ##भगवद गीता🙏🕉️
🙏गीता ज्ञान🛕 - अधिभूतं क्षरो भावः पुरुपश्चाधिदैवतम्। अधियज्ञोउहमेवात्र देहभृतां देहे II अधिभूत उत्पत्ति-विनाश धर्मवाले सव पदार्थ अधिदैव है और हे देहधारियोंमें ೯ f೯ಗಾ पुरुप * श्रेष्ठ अर्जुन ! इस शरीरमें मैँ वासुदेव ही अन्तर्यामीरूपसे अधियज्ञ हूँ Il ४ Il  हिरण्यगर्भ ', जिसको   शास्त्रांम प्रजापति सूत्रात्मा ब्रह्मा ' इत्यादि नामौंसे कहा गया हैं। अन्तकाले च मामेव स्मरन्मुक्त्वा कलेवरम्। यः प्रयाति स मद्भावं याति नास्त्यत्र संशयः ११ जो पुरुप अन्तकालमें भी छष्ी 8 मुझको करता हुआ शरीरको त्याग कर जाता है, वह साक्षात् स्वरूपको प्राप्त होता है- इसमें कुछ संशय नहीं हैIl ५ Il यं यं वापि स्मरन्भावं त्यजत्यन्ते कलेवरम् । तं तमेवैति कौन्तेय सदा तद्भावभावितः १। हे कुन्तीपुत्र अर्जुन ! यह मनुप्य अन्तकालमें जिस- जिस भी भावको स्मरण करता हुआ शरीरका त्याग है, उस-्उसको ही प्राप्त होता है; क्योंकि वह करता सदा उसी भावसे भावित रहा है Il ६ ।l श्रीमदभगवदगीता अध्याय 8 प्रेस , गोरखपुर से साभार गीता अधिभूतं क्षरो भावः पुरुपश्चाधिदैवतम्। अधियज्ञोउहमेवात्र देहभृतां देहे II अधिभूत उत्पत्ति-विनाश धर्मवाले सव पदार्थ अधिदैव है और हे देहधारियोंमें ೯ f೯ಗಾ पुरुप * श्रेष्ठ अर्जुन ! इस शरीरमें मैँ वासुदेव ही अन्तर्यामीरूपसे अधियज्ञ हूँ Il ४ Il  हिरण्यगर्भ ', जिसको   शास्त्रांम प्रजापति सूत्रात्मा ब्रह्मा ' इत्यादि नामौंसे कहा गया हैं। अन्तकाले च मामेव स्मरन्मुक्त्वा कलेवरम्। यः प्रयाति स मद्भावं याति नास्त्यत्र संशयः ११ जो पुरुप अन्तकालमें भी छष्ी 8 मुझको करता हुआ शरीरको त्याग कर जाता है, वह साक्षात् स्वरूपको प्राप्त होता है- इसमें कुछ संशय नहीं हैIl ५ Il यं यं वापि स्मरन्भावं त्यजत्यन्ते कलेवरम् । तं तमेवैति कौन्तेय सदा तद्भावभावितः १। हे कुन्तीपुत्र अर्जुन ! यह मनुप्य अन्तकालमें जिस- जिस भी भावको स्मरण करता हुआ शरीरका त्याग है, उस-्उसको ही प्राप्त होता है; क्योंकि वह करता सदा उसी भावसे भावित रहा है Il ६ ।l श्रीमदभगवदगीता अध्याय 8 प्रेस , गोरखपुर से साभार गीता - ShareChat
#मेरे विचार #🙏 प्रेरणादायक विचार #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #❤️जीवन की सीख #🙏गीता ज्ञान🛕
मेरे विचार - pee 28 प्रजातत्र का अन्त, भोग विलासी स्वभाव की प्रजा से हो 8! GG -मानेरकी M pee 28 प्रजातत्र का अन्त, भोग विलासी स्वभाव की प्रजा से हो 8! GG -मानेरकी M - ShareChat
#👍 डर के आगे जीत👌 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #❤️जीवन की सीख #🙏कर्म क्या है❓
👍 डर के आगे जीत👌 - ShareChat
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#❤️जीवन की सीख #🙏 प्रेरणादायक विचार #मेरे विचार #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #👍 डर के आगे जीत👌
❤️जीवन की सीख - २२ फखवरी परिस्थितियों के प्रति व्यक्ति की प्रतिक्रिया ही का नम चरित्र है। पहाभिसीतारमैया -5|0 M २२ फखवरी परिस्थितियों के प्रति व्यक्ति की प्रतिक्रिया ही का नम चरित्र है। पहाभिसीतारमैया -5|0 M - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕 ##भगवद गीता🙏🕉️ #❤️जीवन की सीख #🙏कर्म क्या है❓ #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏गीता ज्ञान🛕 - अथाष्टमोडध्यायः अजुन उवाच किं तद्ब्रह्म किमध्यात्मं किं कर्म पुरुपोत्तम 1 अधिभूतं च किं प्रोक्तमधिदैवं किमुच्यते ।I अर्जुनने कहा- हे पुरुपोत्तम ! वह ग्रह्म क्या है ? अध्यात्म क्या है ? कर्म क्या है ? अधिभूत नामसे क्या कहा गया है और अधिदैव किसको कहते हैँ II १ II देहेउस्मिन्मधुसूदन।  अधियज्ञः कथं कोउत्र प्रयाणकाले च कथं ज्ञेयोउसि नियतात्मभिः II हे मधुसूदन ! यहाँ अधियज्ञ कौन है ? और वह इस शरीरमें कैसे है ? तथा युक्तचित्तवाले पुरुपोंद्वारा अन्त समयमें आप किस प्रकार जाननेमें आते हैँ II२ Il श्रीभगवानुवाच अक्षरं ब्रह्म परमं स्वभावोधध्यात्ममुच्यते। भूतभावोद्भवकरो विसर्गः कर्मसञ्ज्ितः ।। श्रीभगवान्ने कहा= परम अक्षर ' ग्रह्म ' है, अपना अर्थात् जीवात्मा ' अध्यात्म ' नामसे कहा ٦٩٩ है तथा भावको उत्पत्न करनेवाला जो भूतोंके जाता ನT @ ೩೯ कर्म ' नामसे कहा गया है Il ३ Il श्रीमदभगवदगीता अध्याय 8 प्रेस , गोरखपुर से साभार যীলা अथाष्टमोडध्यायः अजुन उवाच किं तद्ब्रह्म किमध्यात्मं किं कर्म पुरुपोत्तम 1 अधिभूतं च किं प्रोक्तमधिदैवं किमुच्यते ।I अर्जुनने कहा- हे पुरुपोत्तम ! वह ग्रह्म क्या है ? अध्यात्म क्या है ? कर्म क्या है ? अधिभूत नामसे क्या कहा गया है और अधिदैव किसको कहते हैँ II १ II देहेउस्मिन्मधुसूदन।  अधियज्ञः कथं कोउत्र प्रयाणकाले च कथं ज्ञेयोउसि नियतात्मभिः II हे मधुसूदन ! यहाँ अधियज्ञ कौन है ? और वह इस शरीरमें कैसे है ? तथा युक्तचित्तवाले पुरुपोंद्वारा अन्त समयमें आप किस प्रकार जाननेमें आते हैँ II२ Il श्रीभगवानुवाच अक्षरं ब्रह्म परमं स्वभावोधध्यात्ममुच्यते। भूतभावोद्भवकरो विसर्गः कर्मसञ्ज्ितः ।। श्रीभगवान्ने कहा= परम अक्षर ' ग्रह्म ' है, अपना अर्थात् जीवात्मा ' अध्यात्म ' नामसे कहा ٦٩٩ है तथा भावको उत्पत्न करनेवाला जो भूतोंके जाता ನT @ ೩೯ कर्म ' नामसे कहा गया है Il ३ Il श्रीमदभगवदगीता अध्याय 8 प्रेस , गोरखपुर से साभार যীলা - ShareChat
#🙏 प्रेरणादायक विचार #मेरे विचार #❤️जीवन की सीख #🌷शुभ रविवार #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏 प्रेरणादायक विचार - 22 ८२८६ जवव हम ओँधैरै मै दीचा हृथ ्ैँ लैकर चलतै हैँ॰ तौ थ्रम रहुता है कि हृम दीचै कौ लैकर चल रह्रै हैँ जवकि सच्चाई एकदम ढल्डी है॰ दीया हर्मैं लैकर चल रह्ा ह्ौता J 22 ८२८६ जवव हम ओँधैरै मै दीचा हृथ ्ैँ लैकर चलतै हैँ॰ तौ थ्रम रहुता है कि हृम दीचै कौ लैकर चल रह्रै हैँ जवकि सच्चाई एकदम ढल्डी है॰ दीया हर्मैं लैकर चल रह्ा ह्ौता J - ShareChat
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#🙏गीता ज्ञान🛕 ##भगवद गीता🙏🕉️ #🙏 प्रेरणादायक विचार #मेरे विचार #❤️जीवन की सीख
🙏गीता ज्ञान🛕 - जरामरणमोक्षाय मामाश्रित्य यतन्ति  ये। ते ब्रह्म तद्विदुः कृत्स्नमध्यात्मं कर्म चाखिलम्।।  जो मेरे शरण होकर जरा और मरणसे छूटनेके लिये यत्न करते हैेँ, वे पुरुप उस ग्रह्मको, सम्पूर्ण अध्यात्मको, सम्पूर्ण कर्मको जानते हैं II २९ II साधिभूताधिदैवं मां साधियज्ञं च ये विदुः | प्रयाणकालेउपि च मां ते विदुर्युक्तचेतसः I। जो पुरुप अधिभूत और अधिदैवके सहित तथा अधियज्ञके सहित ( सवका आत्मरूप ) मुझे अन्तकालमें भी जानते हेँ, वे युक्तचित्तवाले पुरुप मुझे जानते हेँ সথানি সাদ ষা ভান ইঁ Il ২০ Il ३ँ तत्सदिति श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिपत्सु ग्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसंवादे ज्ञानविज्ञानयोगो মদসাৎয়াঘ: |l ৩ Il I 0 श्रीमदभगवदगीता अध्याय 7 W; गोरखपुर से साभार যীলা जरामरणमोक्षाय मामाश्रित्य यतन्ति  ये। ते ब्रह्म तद्विदुः कृत्स्नमध्यात्मं कर्म चाखिलम्।।  जो मेरे शरण होकर जरा और मरणसे छूटनेके लिये यत्न करते हैेँ, वे पुरुप उस ग्रह्मको, सम्पूर्ण अध्यात्मको, सम्पूर्ण कर्मको जानते हैं II २९ II साधिभूताधिदैवं मां साधियज्ञं च ये विदुः | प्रयाणकालेउपि च मां ते विदुर्युक्तचेतसः I। जो पुरुप अधिभूत और अधिदैवके सहित तथा अधियज्ञके सहित ( सवका आत्मरूप ) मुझे अन्तकालमें भी जानते हेँ, वे युक्तचित्तवाले पुरुप मुझे जानते हेँ সথানি সাদ ষা ভান ইঁ Il ২০ Il ३ँ तत्सदिति श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिपत्सु ग्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसंवादे ज्ञानविज्ञानयोगो মদসাৎয়াঘ: |l ৩ Il I 0 श्रीमदभगवदगीता अध्याय 7 W; गोरखपुर से साभार যীলা - ShareChat
#❤️जीवन की सीख #🙏 प्रेरणादायक विचार #👍 डर के आगे जीत👌 #मेरे विचार #📖जीवन का लक्ष्य🤔
❤️जीवन की सीख - 24 पली लौभ आपकै भीतर दया और प्रैम कौ सयाप्त करनै लजता है॰ इसलिए समच रहतै लौभ का त्याग कर दीजिए। MN 24 पली लौभ आपकै भीतर दया और प्रैम कौ सयाप्त करनै लजता है॰ इसलिए समच रहतै लौभ का त्याग कर दीजिए। MN - ShareChat