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#🙏 प्रेरणादायक विचार ##भगवद गीता🙏🕉️ #🙏गीता ज्ञान🛕 #मेरे विचार #❤️जीवन की सीख
🙏 प्रेरणादायक विचार - प्रयत्नाद्यतमानस्तु योगी संशुद्धकिल्बिषः 1 अनेकजन्मसंसिद्द्धस्ततो याति परां गतिम्।l परन्तु प्रयत्नपूर्वक अभ्यास करनेवाला योगी तो पिछले अनेक जन्मोंके संस्कारबलसे इसी जन्ममें पापोंसे रहित हा फिर तत्काल संसिद्ध होकर सम्पूर्ण  ही परमगतिको प्राप्त हो जाता है Il ४५ Il तपस्विभ्योउधिको योगी ज्ञानिभ्योउपि मतोउधिकः | कर्मिभ्यश्चाधिको योगी तस्माद्योगी भवार्जुन १। योगी तपस्वियोंसे श्रेष्ठ है, शास्त्रज्ञानियोंसे भी श्रेष्ठ माना गया है और सकाम कर्म करनेवालोंसे भी योगी बह ' शब्दसे श्रनानौोंके बरनें जन्न लेनेवाला योगश्रप्ट परुप समड़ना चाहिने। श्रेष्ठ है; इससे हे अर्जुन ! हा ।l ४६ Il লু সীর্যী योगिनामपि मद्गतेनान्तरात्मना । सर्वेषां श्रदद्धावान्भजते या मां स मे युक्ततमो मतः ११  योगियोंमें भी जो श्रद्धावान् योगी मुझमें সম্পুত लगे हुए अन्तरात्मासे निरन्तर भजता है, मुझको वह योगी मुझे परम श्रेष्ठ मान्य है Il ४७ Il ३> तत्सदिति श्रीमद्भगवदीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसंवादे आत्मसंयमयोगो  नाम षष्ठाडध्यायः II ६।l -==0-=-= श्रीमदभगवदगीता अध्याय 6 प्रेस , गोरखपुर से साभार যীলা प्रयत्नाद्यतमानस्तु योगी संशुद्धकिल्बिषः 1 अनेकजन्मसंसिद्द्धस्ततो याति परां गतिम्।l परन्तु प्रयत्नपूर्वक अभ्यास करनेवाला योगी तो पिछले अनेक जन्मोंके संस्कारबलसे इसी जन्ममें पापोंसे रहित हा फिर तत्काल संसिद्ध होकर सम्पूर्ण  ही परमगतिको प्राप्त हो जाता है Il ४५ Il तपस्विभ्योउधिको योगी ज्ञानिभ्योउपि मतोउधिकः | कर्मिभ्यश्चाधिको योगी तस्माद्योगी भवार्जुन १। योगी तपस्वियोंसे श्रेष्ठ है, शास्त्रज्ञानियोंसे भी श्रेष्ठ माना गया है और सकाम कर्म करनेवालोंसे भी योगी बह ' शब्दसे श्रनानौोंके बरनें जन्न लेनेवाला योगश्रप्ट परुप समड़ना चाहिने। श्रेष्ठ है; इससे हे अर्जुन ! हा ।l ४६ Il লু সীর্যী योगिनामपि मद्गतेनान्तरात्मना । सर्वेषां श्रदद्धावान्भजते या मां स मे युक्ततमो मतः ११  योगियोंमें भी जो श्रद्धावान् योगी मुझमें সম্পুত लगे हुए अन्तरात्मासे निरन्तर भजता है, मुझको वह योगी मुझे परम श्रेष्ठ मान्य है Il ४७ Il ३> तत्सदिति श्रीमद्भगवदीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसंवादे आत्मसंयमयोगो  नाम षष्ठाडध्यायः II ६।l -==0-=-= श्रीमदभगवदगीता अध्याय 6 प्रेस , गोरखपुर से साभार যীলা - ShareChat
#मेरे विचार ##भगवद गीता🙏🕉️ #🙏कर्म क्या है❓ #🙏 प्रेरणादायक विचार #📖जीवन का लक्ष्य🤔
मेरे विचार - ٦٦ [R] जीतनै रै जीत पहले और ह्वार सै पहले हर॰ चाहिए। कभी नर्ह्ी भाननी MN ٦٦ [R] जीतनै रै जीत पहले और ह्वार सै पहले हर॰ चाहिए। कभी नर्ह्ी भाननी MN - ShareChat
##भगवद गीता🙏🕉️ #🙏कर्म क्या है❓ #🙏 प्रेरणादायक विचार #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #मेरे विचार
#भगवद गीता🙏🕉️ - फखवर 0 धनी बनने के प्रयास में हो सकता है॰ असफलता प्राप्त परतु @1 गुणवान बनने के प्रयास 61 Fuad नर्ही होते। M फखवर 0 धनी बनने के प्रयास में हो सकता है॰ असफलता प्राप्त परतु @1 गुणवान बनने के प्रयास 61 Fuad नर्ही होते। M - ShareChat
##भगवद गीता🙏🕉️ #मेरे विचार
#भगवद गीता🙏🕉️ - फखवर 0 धनी बनने के प्रयास में हो सकता है॰ असफलता प्राप्त परतु @1 गुणवान बनने के प्रयास 61 Fuad नर्ही होते। M फखवर 0 धनी बनने के प्रयास में हो सकता है॰ असफलता प्राप्त परतु @1 गुणवान बनने के प्रयास 61 Fuad नर्ही होते। M - ShareChat
#मेरे विचार #🙏 प्रेरणादायक विचार #📖जीवन का लक्ष्य🤔 ##भगवद गीता🙏🕉️ #🙏कर्म क्या है❓
मेरे विचार - प्रयत्नाद्यतमानस्तु योगी संशुद्धकिल्बिषः 1 अनेकजन्मसंसिद्द्धस्ततो याति परां गतिम्।l परन्तु प्रयत्नपूर्वक अभ्यास करनेवाला योगी तो पिछले अनेक जन्मोंके संस्कारबलसे इसी जन्ममें पापोंसे रहित हा फिर तत्काल संसिद्ध होकर सम्पूर्ण  ही परमगतिको प्राप्त हो जाता है Il ४५ Il तपस्विभ्योउधिको योगी ज्ञानिभ्योउपि मतोउधिकः | कर्मिभ्यश्चाधिको योगी तस्माद्योगी भवार्जुन १। योगी तपस्वियोंसे श्रेष्ठ है, शास्त्रज्ञानियोंसे भी श्रेष्ठ माना गया है और सकाम कर्म करनेवालोंसे भी योगी बह ' शब्दसे श्रनानौोंके बरनें जन्न लेनेवाला योगश्रप्ट परुप समड़ना चाहिने। श्रेष्ठ है; इससे हे अर्जुन ! हा ।l ४६ Il লু সীর্যী योगिनामपि मद्गतेनान्तरात्मना । सर्वेषां श्रदद्धावान्भजते या मां स मे युक्ततमो मतः ११  योगियोंमें भी जो श्रद्धावान् योगी मुझमें সম্পুত लगे हुए अन्तरात्मासे निरन्तर भजता है, मुझको वह योगी मुझे परम श्रेष्ठ मान्य है Il ४७ Il ३> तत्सदिति श्रीमद्भगवदीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसंवादे आत्मसंयमयोगो  नाम षष्ठाडध्यायः II ६।l -==0-=-= श्रीमदभगवदगीता अध्याय 6 प्रेस , गोरखपुर से साभार যীলা प्रयत्नाद्यतमानस्तु योगी संशुद्धकिल्बिषः 1 अनेकजन्मसंसिद्द्धस्ततो याति परां गतिम्।l परन्तु प्रयत्नपूर्वक अभ्यास करनेवाला योगी तो पिछले अनेक जन्मोंके संस्कारबलसे इसी जन्ममें पापोंसे रहित हा फिर तत्काल संसिद्ध होकर सम्पूर्ण  ही परमगतिको प्राप्त हो जाता है Il ४५ Il तपस्विभ्योउधिको योगी ज्ञानिभ्योउपि मतोउधिकः | कर्मिभ्यश्चाधिको योगी तस्माद्योगी भवार्जुन १। योगी तपस्वियोंसे श्रेष्ठ है, शास्त्रज्ञानियोंसे भी श्रेष्ठ माना गया है और सकाम कर्म करनेवालोंसे भी योगी बह ' शब्दसे श्रनानौोंके बरनें जन्न लेनेवाला योगश्रप्ट परुप समड़ना चाहिने। श्रेष्ठ है; इससे हे अर्जुन ! हा ।l ४६ Il লু সীর্যী योगिनामपि मद्गतेनान्तरात्मना । सर्वेषां श्रदद्धावान्भजते या मां स मे युक्ततमो मतः ११  योगियोंमें भी जो श्रद्धावान् योगी मुझमें সম্পুত लगे हुए अन्तरात्मासे निरन्तर भजता है, मुझको वह योगी मुझे परम श्रेष्ठ मान्य है Il ४७ Il ३> तत्सदिति श्रीमद्भगवदीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसंवादे आत्मसंयमयोगो  नाम षष्ठाडध्यायः II ६।l -==0-=-= श्रीमदभगवदगीता अध्याय 6 प्रेस , गोरखपुर से साभार যীলা - ShareChat
#❤️जीवन की सीख #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #मेरे विचार #🙏कर्म क्या है❓ #🙏 प्रेरणादायक विचार
❤️जीवन की सीख - ]] फखवरी गहरे दुःख हमेशा निःशब्द और मौन होते है। M ]] फखवरी गहरे दुःख हमेशा निःशब्द और मौन होते है। M - ShareChat
#🙏कर्म क्या है❓ #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏 प्रेरणादायक विचार #मेरे विचार #❤️जीवन की सीख
🙏कर्म क्या है❓ - फखवरी 10 भाग्य बारिशि के पानी के समान होता है॰ और परिश्रम कुएँ के जल के सामान होता है। M फखवरी 10 भाग्य बारिशि के पानी के समान होता है॰ और परिश्रम कुएँ के जल के सामान होता है। M - ShareChat
#🙏 प्रेरणादायक विचार #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #❤️जीवन की सीख #मेरे विचार #🙏कर्म क्या है❓
🙏 प्रेरणादायक विचार - ட அகி cafe विढानै !7{ सै॰ शरीर कौ सुँदर बनाा सक्तै है॰ लैकिन पूर जीवन सुँदर दनाना है तौ रिशश्तौं वव स॰ @clci % ्ैचिज  बिढाना ह्वौचाा | MN ட அகி cafe विढानै !7{ सै॰ शरीर कौ सुँदर बनाा सक्तै है॰ लैकिन पूर जीवन सुँदर दनाना है तौ रिशश्तौं वव स॰ @clci % ्ैचिज  बिढाना ह्वौचाा | MN - ShareChat
#मेरे विचार #🙏गीता ज्ञान🛕 ##भगवद गीता🙏🕉️ #❤️जीवन की सीख #📖जीवन का लक्ष्य🤔
मेरे विचार - भवति धीमताम्। अथवा योगिनामेव ক্তুল एतद्धि दुर्लभतरं लोके जन्म यदीदृशम्।१  वैराग्यवान् पुरुष उन लोकोंमें न जाकर अथवा जन्म लेता है | परन्तु ज्ञानवान् योगियोंके ही कुलमें इस प्रकारका जो यह जन्म है, सो संसारमें निःसन्देह ೯Il *? Il दुर्लभ अत्यन्त बुद्धिसंयोगं लभते पौर्वदेहिकम्। तत्र तं यतते च ततो भूयः संसिद्धौ कुरुनन्दन।। वहाँ  उस पहले शरीरमें संग्रह किये हुए बुद्धि - संयोगको अर्थात् समबुद्धिरूप योगके संस्कारोंको अनायास ही प्राप्त होे जाता है और हे कुरुनन्दन ! उसके प्रभावसे वह फिर परमात्माकी प्राप्तिरूप सिद्धिके लिये पहलेसे भी बढ़कर प्रयत्न करता है Il ४३ Il पूर्वाभ्यासेन तेनैव ह्रियते ह्यवशोषपि सः| योगस्य   शब्दब्रह्मातिवर्तते ११ जिज्ञासुरपि श्रीमानोंके घरमें जन्म लेनेवाला योगभ्रष्ट वह पराधीन हुआ भी उस पहलेके अभ्याससे ही निःसन्देह भगवान्की ओर आकर्षित किया जाता है॰ तथा समबुद्धिरूप योगका  भी वेदमें कहे हुए सकाम  जिज्ञासु " कर्मोंके फलको उल्लंघन कर जाता है ।l ४४ Il श्रीमदभगवदगीता अध्याय 6 प्रेस , गोरखपुर से साभार যীলা भवति धीमताम्। अथवा योगिनामेव ক্তুল एतद्धि दुर्लभतरं लोके जन्म यदीदृशम्।१  वैराग्यवान् पुरुष उन लोकोंमें न जाकर अथवा जन्म लेता है | परन्तु ज्ञानवान् योगियोंके ही कुलमें इस प्रकारका जो यह जन्म है, सो संसारमें निःसन्देह ೯Il *? Il दुर्लभ अत्यन्त बुद्धिसंयोगं लभते पौर्वदेहिकम्। तत्र तं यतते च ततो भूयः संसिद्धौ कुरुनन्दन।। वहाँ  उस पहले शरीरमें संग्रह किये हुए बुद्धि - संयोगको अर्थात् समबुद्धिरूप योगके संस्कारोंको अनायास ही प्राप्त होे जाता है और हे कुरुनन्दन ! उसके प्रभावसे वह फिर परमात्माकी प्राप्तिरूप सिद्धिके लिये पहलेसे भी बढ़कर प्रयत्न करता है Il ४३ Il पूर्वाभ्यासेन तेनैव ह्रियते ह्यवशोषपि सः| योगस्य   शब्दब्रह्मातिवर्तते ११ जिज्ञासुरपि श्रीमानोंके घरमें जन्म लेनेवाला योगभ्रष्ट वह पराधीन हुआ भी उस पहलेके अभ्याससे ही निःसन्देह भगवान्की ओर आकर्षित किया जाता है॰ तथा समबुद्धिरूप योगका  भी वेदमें कहे हुए सकाम  जिज्ञासु " कर्मोंके फलको उल्लंघन कर जाता है ।l ४४ Il श्रीमदभगवदगीता अध्याय 6 प्रेस , गोरखपुर से साभार যীলা - ShareChat
#📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏 प्रेरणादायक विचार #❤️जीवन की सीख #🙏गीता ज्ञान🛕 #मेरे विचार
📖जीवन का लक्ष्य🤔 - 109 फँरी ताकत आवाज मैँ नह्री अपनै विचरौ भैँ रखौ ॰ क्यौँकि फसल बारिश से हौती है बढ़़ सै नर्ही। MN 109 फँरी ताकत आवाज मैँ नह्री अपनै विचरौ भैँ रखौ ॰ क्यौँकि फसल बारिश से हौती है बढ़़ सै नर्ही। MN - ShareChat