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*_!! रात्रि: कालीन वंदन !!_*
*_मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥_*
*_ॐ शार्दूलवाहनाय विद्महे शक्तिधराय धीमहि। तन्नः स्कन्दः प्रचोदयात्॥_*
*_शुक्लाम्बरधरं देवं शशिवर्णं चतुर्भुजम्। स्फटिकमालिकाधारं सर्वाभरणभूषितम्॥_*
*_दक्षिणे शक्तिहस्तं च वामतो मयूरवाहनम्। सर्वमङ्गलदातारं स्कन्दं प्रणमाम्यहम्॥_*
*_ॐ काकध्वजाय विद्महे खड्गहस्ताय धीमहि। तन्नो सौरिः प्रचोदयात्॥_*
*_!! आज रात्रि की पोस्ट :- "षड्मुख देव कार्तिकेय: जन्म, नाम और महिमा का संक्षिप्त इतिहास" !!_*
*_✍🏻सुरेंद्र अरोडा की लेखनी द्वारा,संकद षष्ठी पर विशेष✍🏻_*
*_मित्रों, आइए आज संकद षष्ठी पर मैं आपको भगवान श्री कार्तिकेय जी का इतिहास संक्षेप में बताता हूं :- भगवान कार्तिकेय, "जिन्हें स्कंद, मुरुगन, सुब्रमण्यम आदि नामों से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म में प्रमुख देवताओं में से हैं।" उनके जन्म की कथा कई पुराणों में वर्णित है:_*
*_स्कंद पुराण के अनुसार, जब तारकासुर ने अपने तप से ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त किया कि उसकी मृत्यु केवल "शिव-पुत्र के हाथों ही हो सकती है।" चूंकि शिवजी सती की मृत्यु के बाद तपस्या में लीन थे, "इसलिए देवताओं ने कामदेव को शिव की तपस्या भंग करने भेजा।" क्रोधित शिव ने कामदेव को भस्म कर दिया। बाद में, शिव के तेज को अग्नि ने ग्रहण किया और गंगा में छोड़ दिया। गंगा ने उस तेज को सरोवर में रख दिया, "जहाँ से छह कुमार पैदा हुए। पार्वती ने उन सभी को एक शरीर में मिला दिया, जिससे छह मुख वाले कार्तिकेय का जन्म हुआ।" महाभारत और अन्य ग्रंथों के अनुसार, शिव का वीर्य अग्नि में गिरा, फिर अग्नि से गंगा में और फिर बाद में शरवण नामक सरोवर में छह कुमारों के रूप में प्रकट हुआ। भगवान कार्तिकेय के प्रमुख नाम और अर्थ निम्नलिखित हैं :-_*
*_1) कार्तिकेय - कृत्तिका नक्षत्र में जन्म लेने के कारण_*
*_2) स्कंद - शिव के वीर्य से स्कंदित ( उछले ) होने के कारण_*
*_3) मुरुगन ( तमिल ) - सुंदर युवक के रूप में_*
*_4) सुब्रमण्यम - शुभ मंगलकारी_*
*_5) षण्मुख / षडानन - छह मुख वाले_*
*_6) गुह - गुप्त रहने वाले तथा_*
*_7) तारकजित् - तारकासुर के विजेता।_*
*_मित्रों, भगवान कार्तिकेय का पालन-पोषण कृत्तिका नक्षत्र की छह माताओं ( अदिति, दिति, कद्रु, विनता, सुरसा और मुनि ) ने किया। उन्होंने ब्रह्मा जी से समस्त वेद, शास्त्र और शस्त्र विद्या प्राप्त की। वे इतने तेजस्वी थे कि जन्म लेते ही हाथ में शक्ति धारण कर युद्ध के लिए तैयार हो गए। तारकासुर के अत्याचारों से पीड़ित देवताओं ने कार्तिकेय को सेनापति बनाया। भगवान कार्तिकेय ने तारकासुर के साथ भीषण युद्ध किया और उसका वध किया। इस विजय के बाद इंद्र ने उन्हें "देवसेनापति" ( देवताओं के सेनापति ) का पद प्रदान किया।_*
*_भगवान कार्तिकेय का विवाह इंद्र की पुत्री देवसेना से हुआ जो दैवीय सेना की अधिष्ठात्री देवी थीं। दक्षिण भारत की एक वन्य कन्या वल्ली जिनसे उनका प्रेम विवाह हुआ। यह कथा विशेष रूप से तमिल परंपरा में प्रसिद्ध है। भगवान कार्तिकेय का वाहन: मोर ( मयूर ), जो अहंकार का प्रतीक है। शस्त्र: शक्ति ( भाला ), जो दैवीय शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है। ध्वज: मुर्गा ( कुक्कुट ) !_*👌🏻
*_🙏🏻शनिवार, सप्ताहांत रात्रि की सुंदर, मधुर एवं सौम्य मंगलमय बेला में, आप सभी मित्रजनों को भगवान बजरंगबली जी तथा श्री शनिदेव जी का आशीर्वाद प्राप्त हो। भगवान आपके भंडारे भरपूर रखें, आपको सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करें तथा आप सदैव खुश रहें। इन्हीं शुभकामनाओं सहित सुमंगलम स्नेहिल रात्रि वंदन, मित्रों। यदि यह पोस्ट आपको अच्छी लगी हो, तो कृपया इसे अपने सभी परिचितों के साथ साझा करें। धन्यवाद सहित आपका अपना, डॉ० एस० एस० अरोडा 9877906419🙏🏻_*
*_विशेष :-_*
*_☝🏻मित्रों, "भगवान कार्तिकेय ज्ञान, बल और शौर्य के देवता माने जाते हैं। वे सेनापति और योद्धाओं के अधिपति हैं।" दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु में "मुरुगन के रूप में अत्यधिक पूजनीय हैं।" स्कंद पुराण, शिव पुराण, महाभारत आदि में उनका विस्तृत वर्णन है। तमिल महीने कार्तिक ( अक्टूबर-नवंबर ) में "स्कंद षष्ठी का त्योहार मनाया जाता है।" उनके मंदिरों में पलानी मंदिर ( तमिलनाडु ) - सबसे प्रसिद्ध मंदिर, स्वामीनाथ मंदिर ( स्वामीमलाई, तमिलनाडु ), तिरुथनि मंदिर ( तमिलनाडु ), पज़हमुदिरचोलाई मंदिर ( तमिलनाडु ), तिरुपरंकुंरम मंदिर ( तमिलनाडु ) तथा कुमारकोट्टम मंदिर ( केरल ) प्रमुख हैं। "भगवान कार्तिकेय छह मुख छह प्रमुख षड्वर्ग ( काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर ) पर विजय के प्रतीक हैं।" वे आत्मज्ञान और आध्यात्मिक जागृति के देवता भी माने जाते हैं। भगवान कार्तिकेय की कथाएं न केवल वीरता और बल की प्रतीक हैं, "बल्कि वे ज्ञान, निष्ठा और धर्म की रक्षा के आदर्श भी प्रस्तुत करती हैं।" ज्यादा ना लिखते हुए, पोस्ट को यहीं समाप्त करता हूं। यदि पोस्ट लिखते समय भुलवश व्याकरण संबंधी या अन्य कोई त्रुटि रह गई हो, तो कृपया क्षमा कर दीजिएगा।_*👏🏻
*_!! ┈┉❀꧁ Զเधॆ Զเधॆ ꧂❀┉┈ !!_*
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