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#🌙 गुड नाईट
🌙 गुड नाईट - शुभणुंत्रि good Nழht ஒழ5 आपकी रात सुकून भरी हो। शुभणुंत्रि good Nழht ஒழ5 आपकी रात सुकून भरी हो। - ShareChat
☯️🕉️🌳🌻🌈🌝🌈🌹🌳🕉️☯️ *_!! संध्या: कालीन वंदन !!_* *_शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशम्। विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्॥_* *_मङ्गलं भगवान् विष्णुर्मङ्गलं गरुडध्वजः। मङ्गलं पुण्डरीकाक्षो मङ्गलायतनो हरिः॥_* *_ॐ जीवं जीवं न ऊतये जीवं देवेषु नस्कृतम्। जीवन्तमग्न आ हुवे स नो बृहस्पतिर्दधातु॥_* *_!! बोधि वृक्ष की छाँव तक: गौतम बुद्ध के जीवन की यात्रा भाग 2 !!_* *_✍🏻सुरेंद्र अरोडा की लेखनी द्वारा, बुद्ध जयंती की पूर्व संध्या पर विशेष।✍🏻_* *_☝🏻मित्रों, गहन ध्यान के बाद तीन पहरों में उन्हें पूर्व जन्मों का ज्ञान (पूर्वानिवासानुस्मृति ज्ञान), दिव्य चक्षु (सभी प्राणियों के जन्म-मरण का दर्शन) एवं प्रतीत्यसमुत्पाद (कार्य-कारण की श्रृंखला का साक्षात्कार) प्राप्त हुआ। भोर होते ही वे सम्यक संबोधि (पूर्ण ज्ञान) को प्राप्त हुए और बुद्ध (जागृत) बन गए। "वृक्ष का नाम बोधि वृक्ष पड़ा और स्थान बोधगया के नाम से प्रसिद्ध हुआ।" बुद्धत्व प्राप्ति के बाद उन्होंने सात सप्ताह विभिन्न स्थानों पर बिताए: पहला सप्ताह बोधि वृक्ष के नीचे, दूसरा अजपाल नीग्रोध वृक्ष के नीचे, तीसरा मुचिलिंद नाग के फन के नीचे, चौथा राजायतन वृक्ष के नीचे (यहाँ तपुस्स और भल्लिका नामक व्यापारियों ने उनसे शरण ली)। प्रारंभ में बुद्ध ने अपने ज्ञान को सिखाने में संकोच किया, क्योंकि वह अत्यंत गहन और सूक्ष्म था। लेकिन ब्रह्मा सहम्पति के अनुरोध पर उन्होंने उपदेश देने का निर्णय लिया। प्रथम उपदेश (धर्मचक्रप्रवर्तन सूत्र) सारनाथ (वाराणसी के निकट) के ऋषिपतन मृगदाव में पाँच पूर्व तपस्वी साथियों (पंचवर्गीय भिक्षु) को दिया। यह घटना धर्मचक्र प्रवर्तन कहलाती है और यहीं से बौद्ध संघ की स्थापना हुई।_* *_मित्रों, गौतम बुद्ध की प्रमुख शिक्षाएँ निम्नलिखित हैं: चार आर्य सत्य – दुख, समुदय, निरोध, मार्ग; तथा आर्य अष्टांगिक मार्ग – सम्यक दृष्टि, संकल्प, वाणी, कर्मांत, आजीविका, व्यायाम, स्मृति, समाधि। प्रमुख सिद्धांत: अनात्मवाद, प्रतीत्यसमुत्पाद, कर्म, पुनर्जन्म, निर्वाण। त्रिरत्न: बुद्ध, धम्म, संघ। पंचशील: अहिंसा, अचौर्य, ब्रह्मचर्य, सत्य, नशे से दूरी। 80 वर्ष की आयु में पावा (मल्ल गणराज्य) में लोहार चुन्द के भोजन के बाद वे बीमार पड़े और कुशीनगर में दो साल वृक्षों के बीच महापरिनिर्वाण को प्राप्त हुए। अंतिम शब्द थे: "वय धम्मा संखारा, अप्पमादेन सम्पादेथा" (हे भिक्षुओं, सब संस्कार क्षणभंगुर हैं, सावधानीपूर्वक अपने लक्ष्य की पूर्ति में लग जाओ)। उनके उपदेश त्रिपिटक में संग्रहित हैं। गौतम बुद्ध केवल एक धार्मिक गुरु ही नहीं, अपितु एक युगप्रवर्तक, समाज सुधारक और मानवता के पथप्रदर्शक थे, जिनकी शिक्षाएँ आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी 2500 वर्ष पूर्व थीं।_*👌🏻 *_🙏🏻बृहस्पतिवार सांयकाल की सुंदर, मधुर एवं सौम्य मंगल बेला में आप सभी मित्रजनों को भगवान श्री हरि विष्णु जी एवं देवगुरु बृहस्पति जी का आशीर्वाद प्राप्त हो ! भगवान श्री सत्यनारायण जी आपके भंडारे भरपूर रखें, आपको सुख, शांति एवं समृद्धि प्रदान करें तथा आप सदैव खुश रहें ! इन्हीं शुभकामनाओं के साथ सुमंगलम, स्नेहिल संध्या वंदन, मित्रों। आप एवं आपके समस्त परिवारजनों को बुद्ध जयंती, कूर्म जयंती, श्रमिक दिवस एवं बैसाख पूर्णिमा की अग्रिम ढेरों बधाइयां और हार्दिक शुभकामनाएं। यदि यह पोस्ट आपको अच्छी लगी हो, तो कृपया इसे अपने सभी परिचितों के साथ साझा करें ! धन्यवाद सहित आपका अपना, डॉ० सुरेंद्र अरोड़ा 9780077479🙏🏻_* *_विशेष :-_* *_☝🏻मित्रों, गौतम बुद्ध का जीवन हमें सिखाता है कि सत्य की खोज बाहरी आडंबरों में नहीं, "बल्कि अपने भीतर के ध्यान, अनुशासन और करुणा में है।" बोधि वृक्ष की छाँव से लेकर कुशीनगर के महापरिनिर्वाण तक की यह यात्रा केवल एक ऐतिहासिक कथा नहीं, "बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के लिए एक जीवंत दर्पण है"—जो हमें प्रश्न करने को विवश करती है: क्या हम आज उसी अप्पमादेन ( प्रमादरहित सजगता ) के साथ अपने जीवन के संकल्पों को पूरा कर रहे हैं ? शायद बुद्धत्व का अर्थ किसी दूर के आकाश में नहीं, "बल्कि हमारी एक-एक सांस की सचेतनता में छिपा है।” ज्यादा ना लिखते हुए, पोस्ट को यहीं समाप्त करता हूं। यदि पोस्ट लिखते समय भूलवश व्याकरण संबंधी या अन्य कोई त्रुटि रह गई हो, तो कृपया क्षमा कर दीजिएगा।_*👏🏻 *_!! बुद्धं शरणं गच्छामि, धर्मं शरणं गच्छामि, संघं शरणं गच्छामि !! ॐ मणिपद्मे हूँ !!_* ☯️🕉️🌴🌾🛕🌝🛕💐🌴🕉️☯️ #🌜 शुभ संध्या🙏
☯️🕉️🌳🌻🌈☀️🌈🌹🌳🕉️☯️ *_!! बोधि वृक्ष की छाँव तक : गौतम बुद्ध के जीवन की यात्रा भाग - 1 !!_* *_✍🏻सुरेंद्र अरोडा की लेखनी द्वारा, बुद्ध जयंती की पूर्व संध्या पर विशेष।✍🏻_* *_☝🏻मित्रों, गौतम बुद्ध का जन्म और कार्यकाल छठी शताब्दी ईसा पूर्व का है। यह वह युग था जब चीन में "कन्फ्यूशियस और लाओ-त्से, फारस (ईरान) में जोरोस्टर, यूनान में पाइथागोरस तथा भारत में महावीर स्वामी जैसे महान विचारकों ने नए धार्मिक और दार्शनिक मार्गों का सूत्रपात किया।" उनका जन्म लगभग 563 ईसा पूर्व लुंबिनी वन (वर्तमान नेपाल), कपिलवस्तु के निकट हुआ था। "उनके पिता राजा शुद्धोधन, जो शाक्य गणराज्य के प्रमुख थे, और माता का नाम महामाया देवी था।" उनके बचपन का नाम सिद्धार्थ था। जन्म के सात दिन बाद माता महामाया का निधन हो गया। फिर उनका पालन-पोषण मौसी महाप्रजापती गौतमी ने किया; इसी कारण वे "गौतम" कहलाए। जन्म के समय ऋषि असित ने भविष्यवाणी की थी कि यह बालक या तो चक्रवर्ती सम्राट बनेगा या महान संन्यासी। सिद्धार्थ ने गुरु विश्वामित्र से वेद, उपनिषद, राजकाज और युद्ध-विद्या की शिक्षा ली। वे कुश्ती, घुड़दौड़, तीरंदाजी और रथ चलाने में निपुण थे।_* *_लगभग 16 वर्ष की आयु में उनका विवाह "राजकुमारी यशोधरा" (जिन्हें गोपा या भद्दकच्चा भी कहा जाता था) से संपन्न हुआ, जिनसे उन्हें पुत्र राहुल प्राप्त हुआ। पिता शुद्धोधन ने उन्हें तीन महल (रम्म, सुरम्म और सुभा) दे रखे थे – एक-एक प्रत्येक ऋतु के लिए – जहाँ वे सारी सुख-सुविधाओं के साथ रहते थे। एक दिन जब सिद्धार्थ बगीचे की सैर पर निकले, तो उन्होंने क्रमशः देखा: एक वृद्ध – "बुढ़ापे की पीड़ा," एक रोगी – "बीमारी की पीड़ा," एक मृत शरीर – "मृत्यु की पीड़ा," एवं एक साधु – "शांत और संतुष्ट व्यक्ति।" इन दृश्यों ने उन्हें गहराई से विचलित कर दिया। उन्होंने महसूस किया कि जीवन में दुख, बुढ़ापा और मृत्यु अनिवार्य हैं "और इनसे मुक्ति का मार्ग खोजना आवश्यक है।" एक रात सिद्धार्थ ने अपने नवजात पुत्र राहुल और पत्नी यशोधरा को सोता छोड़कर, सहायक छन्न और घोड़े कंथक के साथ राजमहल छोड़ दिया। यह घटना "महाभिनिष्क्रमण" कहलाती है। अनोमा नदी पार करके उन्होंने अपने केश कटवा लिए और छन्न व कंथक को वापस पिता के पास भेज दिया।_* *_वे ज्ञान की खोज में विभिन्न गुरुओं के पास गए। गुरु आलार कलाम के पास गए (ध्यान की विधियाँ सीखीं), "लेकिन संतुष्ट नहीं हुए।" उद्दक रामपुत्त के पास गए, उनसे भी "संतुष्टि नहीं मिली।" तदुपरांत उन्होंने उरुवेला (आधुनिक बोधगया) के पास निरंजना नदी के तट पर छह वर्षों तक अत्यंत कठोर तपस्या की। इस दौरान पाँच तपस्वी (कोण्डन्न, वप्प, भद्दिय, महानाम और अस्सजि) उनके साथ थे, "जो बाद में पंचवर्गीय भिक्षु कहलाए।" इतनी कठोर साधना की कि शरीर क्षीण हो गया, लेकिन ज्ञान की प्राप्ति नहीं हुई। अंततः उन्होंने महसूस किया कि न तो अत्यधिक भोग-विलास और न ही अत्यधिक कठोर तपस्या सही मार्ग है। "उन्होंने मध्य मार्ग को अपनाने का निर्णय लिया और बोधि वृक्ष के नीचे थोड़ा विश्राम करने बैठ गए।" सुजाता नामक ग्रामीण महिला ने उन्हें खीर अर्पित की। इसके बाद सिद्धार्थ ने निरंजना नदी में स्नान किया और बोधगया (बिहार) में एक पीपल वृक्ष के नीचे पूर्व दिशा की ओर मुख करके ध्यान मुद्रा में बैठ गए और प्रण किया: "चाहे मेरी त्वचा, नसें और हड्डियाँ सूख जाएँ, शरीर का मांस और रक्त समाप्त हो जाए, लेकिन जब तक मैं सम्यक ज्ञान प्राप्त नहीं कर लेता, इस स्थान से नहीं उठूँगा।" जैसे ही वे ध्यान में डूबे, मार (भोग और मोह का देवता) ने उन पर आक्रमण किया। मार ने उन्हें बहकाने के लिए अपनी तीन पुत्रियों – तृष्णा, अरति और राग – को भेजा, लेकिन सिद्धार्थ अटल रहे।_* 🤔 *_क्रमशः .........._* ☯️🕉️🌴🌾🌈🌅🌈💐🌴🕉️☯️ #🌜 शुभ संध्या🙏
☯️🕉️🌳🌻🛕🌞🛕🌹🌳🕉️☯️ *_!! प्रातः कालीन वंदन !!_* *_आदिदेवं जगत्कारणं श्रीधरं लोकनाथं विभुं व्यापकं शंकरम् ! सर्वभक्तेष्टं मुक्तिदं माधवं सत्यनारायणं विष्णुमीशं भजे !!_* *_देवानां च ऋषीणां च गुरुं काञ्चनसन्निभम् ! बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिम् !!_* *_देवमन्त्री विशालाक्षः सदा लोकहिते रतः ! अनेकशिष्यसंपूर्णः पीडां हरतु मे गुरुः !!_* *_युद्धे चक्रधरं देवं प्रवासे च त्रिविक्रमम् ! नारायणं तनुत्यागे श्रीधरं प्रियसंगमे !!_* *_दुःस्वप्ने स्मर गोविन्दं संकटे मधुसूदनम् !_* *_ॐ वरुणः पाप्मानं मे हन्तु सत्यधर्मा परिपातु विश्वतः ! यथाहमिहीनः स्यां यथा मा दुष्कृतं स्पृशत् ! ॐ स्वस्ति !!_* *_यः सेनानीर्वसूनां यः पृष्ठीनां नियोधकः। यो रथानां वाहांश्च स नो वायुर्मृडयातु नः॥_* *_!! ༺꧁ प्रभात पुष्प ꧂༻ !!_* *_☝🏻मित्रों, हम अक्सर दूसरों की गलतियों को गिनने में इतना व्यस्त हो जाते हैं कि "अपनी ही कमियों को देखने का समय नहीं पाते।" लेकिन सच्ची नज़र वही है जो पहले अपने आईने को साफ करे। दूसरों को नसीहत देना आसान है, "पर उस नसीहत को खुद पर लागू करना कठिन।" जब हम किसी को सलाह देते हैं, "तो वह सलाह पहले हमारे अपने जीवन में खुशबू की तरह महकनी चाहिए" अन्यथा वह केवल एक खोखला उपदेश बनकर रह जाती है। किसी के पाप गिनने से हम पवित्र नहीं हो जाते, "बल्कि अपनी खामियों को सुधारने से हम वास्तव में बेहतर बनते हैं।"👌🏻_* *_🙏🏻बृहस्पतिवार प्रातःकाल की पवित्र "मंगल बेला" पर विधाता आपको सदैव अक्षय आरोग्य, धन एवं ऊर्जा प्रदान करें। सुरेंद्र अरोड़ा की ओर से आपके लिए मंगलमय शुभकामनाएं। आपके स्वास्थ्य, सफलता एवं यश-कीर्ति की वृद्धि के लिए असीमित दुआओं के साथ... सुमंगलम् ,स्नेहिल भोर-वंदन, मित्रों। भगवान श्री हरि विष्णु जी एवं देवगुरु बृहस्पति जी का स्नेहिल शुभ आशीर्वाद आप सभी मित्रजनों पर सदैव बना रहे। आपके जीवन की प्रत्येक सुबह आपके जीवन में नई आशा और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करे। मन में प्रसन्नता, बुद्धि में विवेक और आत्मा में शांति का वास सदा बना रहे। मस्त रहें, व्यस्त रहें, स्वस्थ रहें, समस्त पाप-कर्मों से दूर रहें तथा "प्रकृति के एहसानमंद और शुक्रगुज़ार रहें।"🙏🏻_* *_!! ┈┉❀꧁ Զเधॆ Զเधॆ ꧂❀┉┈ !!_* ☯️🕉️🌴🌾🌈☀️🌈💐🌴🕉️☯️ #🌞 Good Morning🌞
☯️🕉️🌳🌻🛕🌝🛕🌹🌳🕉️☯️ *_!! रात्रिकालीन वंदन !!_* *_एकदन्तं महाकाय तप्तचामीकरप्रभम्। लम्बोदरं विशालाक्षं वन्देहं गणनायकम्॥_* *_अष्टभिर्मातृभिः सार्धं अष्टभिः सिद्धिभिः सह। पूजितं यत्र नित्यं च तं विनायकमाश्रये॥_* *_ॐ श्यामाङ्गाय विद्महे सुमनोहराय धीमहि। तन्नोबुधः प्रचोदयात्॥_* *_ॐ चन्द्रपुत्राय विद्महे रोहिणीप्रियाय धीमहि। तन्नोबुधः प्रचोदयात्॥_* *_!! पीड़ा का अर्थ: "दंड नहीं, करुणा की अग्नि" !!_* *_✍🏻सुरेंद्र अरोडा की लेखनी द्वारा, चिंतन योग्य एक विचारोत्तेजक पोस्ट।✍🏻_* *_☝🏻मित्रों, जीवन के मार्ग पर चलते हुए हम अक्सर दो प्रश्न पूछ बैठते हैं: “मेरे साथ ही ऐसा क्यों होता है ? भगवान ने मुझे यह पीड़ा क्यों दी ?” लेकिन क्या कभी हमने सोचा कि पीड़ा स्वयं एक उपहार हो सकती है ? सुबह के पैराग्राफ में जो लिखा गया था, उसके अनुसार — “मैं ईश्वर के हर निर्णय पर प्रसन्न हूँ, क्योंकि उसने मुझे पीड़ा सहने वालों की श्रेणी में रखा है, न कि पीड़ा देने वालों में।” यह वाक्य अपने आप में "क्रांतिकारी है।" यह हमें सोचने पर विवश करता है:_* *_👉🏻 पीड़ा देने वाला कौन ? पीड़ा सहने वाला कौन ?_* *_समाज में अक्सर शक्ति का गलत अर्थ “पीड़ा देने की क्षमता” से लगा लिया जाता है। लेकिन सच्चा पराक्रम है — "पीड़ा को रचनात्मकता और करुणा में बदलना।" जो सहता है, वह समझता है। जो समझता है, वह दूसरों को उस पीड़ा से बचाने का सामर्थ्य रखता है।_* *_2👉🏻 पीड़ा — वह अग्नि जो घमंड जलाती है।_* *_सुबह के पैराग्राफ में पीड़ा को “सहानुभूति और करुणा की अग्नि” कहा गया है। अग्नि तपाती है, "लेकिन सोना भी उसी में निखरता है।" पीड़ा के बिना मनुष्य स्वार्थी, असहिष्णु और कठोर बन सकता है। वही व्यक्ति जिसने गहरा दर्द देखा हो, चुपचाप बैठे दूसरे के आंसू समझ लेता है।_* *_3👉🏻 जिसने सहना सीख लिया, वही सच्चा सहारा देता है।_* *_यह पंक्ति तर्क से भरी है। जैसे कोई डॉक्टर बीमारी को तब तक नहीं समझ सकता "जब तक उसने रोगी को न देखा हो" — वैसे ही सच्चा सहारा वही दे सकता है "जिसका कभी कोई सहारा टूटा हो।" तो पीड़ा कमजोरी नहीं, बल्कि सबसे बड़ी शिक्षक है।_* *_4👉🏻 बड़ों का आशीर्वाद — वह पानी जो जड़ों तक पहुंचता है।_* *_बड़ों का आशीर्वाद उतना ही सूक्ष्म और शक्तिशाली है "जितना पानी की उस बूंद का होना जो पौधे को अंदर से जीवित रखे।" बिना आशीर्वाद के प्रयास अधूरे हैं; बिना संघर्ष के आशीर्वाद अंधा हो सकता है।_* *_5👉🏻 आशीर्वाद और संघर्ष: ईश्वर की दो नेमतें।_* *_एक बढ़ने के लिए, दूसरा गहरा होने के लिए। आशीर्वाद हमें ऊपर उठाता है — "प्रसन्नता, अवसर, स्नेह।" संघर्ष हमें अंदर उतारता है — "धैर्य, समझ, आत्मविश्वास, और सच्ची विनम्रता।" जिस वृक्ष की जड़ें गहरी हों, "वह तूफान में नहीं गिरता।" जिस व्यक्ति ने पीड़ा को गहराई से जिया हो, वह सफलता में नहीं झूमता — वह और अधिक स्थिर हो जाता है। क्या पीड़ा हमेशा हमें बेहतर इंसान बनाती है ? "या यह हम पर निर्भर है कि हम उससे क्या सीखें ?" क्या हम उन लोगों से अधिक सहानुभूति रखते हैं, "जिन्होंने हमारी ही तरह दुख उठाया हो ?" क्या बिना दुख के सच्ची विनम्रता आ सकती है ?_* 🤔👌🏻 *_🙏🏻बुधवार की सुंदर, मधुर एवं सौम्य मंगल रात्रि में, आप सभी मित्रजनों को भगवान गणपति जी का आशीर्वाद प्राप्त हो। गणपति बप्पा आपका भंडारे भरपूर रखें, आपको सुख, शांति व समृद्धि प्रदान करें, और आप सदा खुश रहें। "हर विपत्ति में बप्पा आपका साथ दें, हर सपना आपका साकार हो।" इन्हीं शुभकामनाओं के साथ, आप सभी को सुमंगलम, स्नेहिल रात्रि वंदन, मित्रों। यदि पोस्ट अच्छी लगी हो तो कृपया इसे अपने सभी परिचितों में साझा करें। धन्यवाद सहित, आपका अपना डॉ. सुरेंद्र अरोड़ा 9780077479🙏🏻_* *_विशेष :-_* *_☝🏻मित्रों, जब मैं पीड़ा में हूँ, तो मैं अपने आप से पूछता हूँ — "क्या आज यह कष्ट किसी को बेहतर सहारा देने के लिए मुझे तैयार कर रहा है ?” यदि ईश्वर पर विश्वास है तो मानना होगा कि उसकी योजना में "हर दुख का कोई न कोई अर्थ छिपा है।" और यदि ईश्वर पर विश्वास नहीं है, तब भी यह सत्य है — जिसने सच्चा सहारा देना सीखा, उसने पीड़ा को समझा था। किसी को यह याद दिलाना ज़रूरी है कि "संघर्ष का अर्थ विनाश नहीं, बल्कि गहरा निर्माण है।" ज्यादा ना लिखते हुए, पोस्ट को यहीं समाप्त करता हूं। यदि पोस्ट लिखते समय भूलवश व्याकरण संबंधी या अन्य कोई त्रुटि रह गई हो, तो कृपया क्षमा कर दीजिएगा।_*👏🏻 *_!! ┈┉❀꧁ Զเधॆ Զเधॆ ꧂❀┉┈ !!_* ☯️🕉️🌴🌾🌈😴🌈💐🌴🕉️☯️ #🌙 गुड नाईट