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*_!! संध्या: कालीन वंदन !!_*
*_नमस्ते देवि गायत्रि, सावित्रि त्रिपदेक्षरे ! अजरे अमरे मातस्त्राहि मां भवसागरात् !!नमस्ते सूर्यसंकाशे, सूर्यसावित्रिके शुभे ! ब्रह्मविद्ये महाविद्ये, वेदमातर्नमोऽस्तु ते !!_*
*_नम उग्राय वीराय सारंगाय नमो नमः ! नमः पद्मप्रबोधाय प्रचण्डाय नमोऽस्तु ते !!_*
*_ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्। ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ।_*
*_कर्पूरगौरं कररुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम् ! सदा वसन्तं हृदयारवृन्दे भवं भवानी सहितं नमामि !!_*
*_!! फरवरी: प्यार का महीना या एहसासों की मंडी ? !!_*
*_✍🏻सुरेंद्र अरोडा की लेखनी द्वारा, व्यंग्यात्मक शैली में एक विचारोत्तेजक पोस्ट✍🏻_*
*_👉🏻 मित्रों, प्रस्तुत है प्रेम के उस दौर का आईना, "जहाँ फरवरी का महीना भावनाओं के बाज़ार में बदल जाता है।" यहाँ असली एहसास नहीं, बल्कि गुलाब, टेडी और चॉकलेट के सात रंगीन दिन बिक रहे हैं। जेबें चाहे खाली हों, "पर इन दिनों प्यार ने महँगी कालाबाज़ारी का रूप ले लिया है।" यह व्यंग्य उस सच्चाई को उजागर करता है कि जहाँ एक ओर युवा वादों के पुल बाँधते हैं, "वहीं दूसरी ओर फरवरी का दूसरा हफ्ता आते ही थप्पड़ और ब्रेकअप की लात इन सबको धूल चटा देती है।" प्रस्तुत है, प्यार के इस साप्ताहिक मेले पर एक करारा व्यंग्य।_*
*_!! फरवरी आते ही मजनू, गलियों में मँडराते हैं, जेबें खाली होती हैं, पर ख्वाब बड़े सजाते हैं !!_*
*_रोज़ डे :-_*
*_वो अस्सी रुपये का गुलाब, कल दस का बिकता था, पहले उसी के दम पर सच्चा प्यार टिकता था।_*
*_काँटे तो मुफ्त मिलते हैं, फूलों के दाम भारी हैं, ये प्यार है या शायद फूलों की कालाबाज़ारी है।_*
*_प्रपोज़ डे :-_*
*_दूसरे दिन घुटनों के बल, सब "हाँ " सुनने को मरते हैं, कल किसी और से, आज किसी और से कसमें भरते हैं।_*
*_रिजेक्शन का डर ऐसा है, जैसे बोर्ड का कोई पर्चा हो, डर बस इस बात का है कि फालतू में कहीं खर्चा न हो।_*
*_चॉकलेट डे :-_*
*_तीसरे दिन तो मिठास का, ऐसा सैलाब आता है, शुगर की फिक्र छोड़ो, बस कैडबरी का राज आता है।_*
*_अजीब विडंबना है देखिए, कड़वे रिश्तों के दौर में, लोग वफ़ा ढूँढ रहे हैं, डार्क चॉकलेट के शोर में।_*
*_टेडी डे :-_*
*_चौथे दिन वह रुई का भालू, सोफे की शोभा बढ़ाता है, दो दिन बाद वही टेडी, धूल की चादर ओढ़ सो जाता है।_*
*_इंसान को वक़्त नहीं देते, खिलौनों से दिल बहलाते हैं, आशिक अपनी सारी कमाई, रुई के ढेर में लुटाते हैं।_*
*_प्रॉमिस डे :-_*
*_पाँचवें दिन वादों की, झड़ी ज़ोरों से लगती है, चाँद-तारे तोड़ लाऊँगा, यह बात सच्ची लगती है।_*
*_पर हकीकत तो यह है कि वफ़ा निभाने का वादा नहीं होता, और सात समंदर पार जाने का इरादा नहीं होता।_*
*_हग डे और किस डे :-_*
*_छठे और सातवें दिन, नज़ाकत और बढ़ जाती है, मर्यादा और शर्म की रेखा, थोड़ी सी थरथराती है।_*
*_बजरंग दल के खौफ में, पार्कों में जो छिपते हैं, वही वीर योद्धा फिर, सिंगल होने पर लिखते हैं।_*
*_एंटी-वैलेंटाइन वीक :-_*
*_जब गुलाबी बुखार उतरता है, तब असली होश आता है, फरवरी का दूसरा हफ्ता, हकीकत से मिलाता है।_*
*_कल तक जो बाबू-शोना थे, अब वे केस लगते हैं, वैलेंटाइन के बाद वाले दिन, थोड़े क्लेश-से लगते हैं।_*
*_स्लैप डे :-_*
*_पंद्रह तारीख को सारा रोमांस, हवा हो जाता है, इश्क़ का भूत थप्पड़ खाकर, फना हो जाता है।_*
*_यह थप्पड़ गाल पर नहीं, गुमराह यादों पर पड़ता है, जो कल तक सर चढ़ा था, वह अब पैरों में पड़ा रहता है।_*
*_किक डे :-_*
*_सोलह को लात मारो, उन पुरानी कड़वी बातों को, जो नींद उड़ा ले जाती थीं, उन लंबी काली रातों को।_*
*_गिफ्ट वापस करने का कष्ट, अब उठाना छोड़ दो, यादों को फुटबॉल बनाओ, और किक मार कर तोड़ दो।_*
*_परफ्यूम डे :-_*
*_सत्रह को आती है महक, ज़रा खुद की शख्सियत की, अब ज़रूरत नहीं रही, किसी गैर की अहमियत की।_*
*_खुद को इतना महकाओ कि एक्स को भी जलन हो जाए, तुम्हारी खुशबू देखकर, उसका नया वाला मौन हो जाए।_*
*_फ्लर्टिंग डे :-_*
*_अठारह को फिर से पंख, ज़रा फड़फड़ाने लगते हैं, मजनू पुराने पिंजरे से, बाहर आने लगते हैं।_*
*_यह रियल वाला इश्क़ नहीं, बस हल्की-फुल्की मस्ती है, क्योंकि आज के दौर में, वफ़ा थोड़ी सस्ती है।_*
*_कन्फेशन डे :-_*
*_उन्नीस को सच बोलने का, एक दौरा-सा पड़ता है, "हमसे गलती हुई", यह मानने को दिल करता है।_*
*_कोई कहता है "सॉरी", कोई कहता है "तुम बेमिसाल हो", कोई कहना चाहता है, "ए करेजा ! तुम बड़ी बवाल हो।"_*
*_मिसिंग डे :-_*
*_बीस तारीख को थोड़ी, पुरानी टीस जागती है, तन्हाई के साए में, याद फिर से भागती है।_*
*_पर यह याद प्यार की नहीं, बस खालीपन का बहाना है, पुराने जख्मों को कुरेदकर, खुद को फिर रुलाना है।_*
*_ब्रेकअप डे :-_*
*_इक्कीस को अंततः, आज़ादी का बिगुल बजता है, बिना किसी रिलेशनशिप के, अब चेहरा खिलता है।_*
*_न कॉल्स का झंझट, न मैसेज का है इंतज़ार, मुबारक हो आपको, आप जीत गए यह जंग-ए-प्यार।_* 😍
*_!! फरवरी बीतते-बीतते, जेब और दिल दोनों खाली हैं, आशिकों के चेहरों पर, अब आई थोड़ी लाली है !! 😜_*
*_🙏🏻रविवार,संध्या :काल की सुंदर,मधुर व सौम्य मंगल बेला में आप सभी मित्रजनों को भगवान,भास्कर जी एवं मां गायत्री जी का आशीर्वाद प्राप्त हो,मातेश्वरी आपके भन्डारे भरपूर रखें,आपको सुख,शान्ति व समृद्धि प्रदान करें,आप हमेशा खुश रहे, इन्हीं शुभकामनाओं सहित सुमंगलम,स्नेहिल संध्या वंदन मित्रों। आप एवं आपके समस्त परिवारजनों को महाशिवरात्रि पर्व की ढेरों बधाइयां और हार्दिक शुभकामनाएं। बाबा बर्फानी आपके सभी मनोरथ पूर्ण करें। अगर,पोस्ट अच्छी लगी हो तो कृपया अपने सभी जानने वालों में प्रेषित करें। धन्यवाद सहित आपका अपना, डॉ० एस०एस०अरोडा 9877906419🙏🏻_*
*_विशेष :-_*
*_☝🏻मित्रों, उपरोक्त पोस्ट के माध्यम से मैंने फरवरी के "प्यार भरे" महीने की एक सटीक और मार्मिक "व्यंग्यात्मक" तस्वीर पेश करने की कोशिश की है। मैं कहाँ तक सफल हुआ हूँ, "कृपया अपनी प्रतिक्रिया देकर कृतार्थ अवश्य करें।" यह पोस्ट दिखाती है कि "कैसे वैलेंटाइन वीक के नाम पर बाज़ार ने प्यार को दिखावे और महँगे उपहारों का एक फॉर्मूला बना दिया है।" जहाँ एक ओर गुलाब, चॉकलेट और टेडी जैसी चीज़ें प्यार का पर्याय बन गई हैं, "वहीं दूसरी ओर एंटी-वैलेंटाइन वीक सिर्फ एक दिन में बदल जाने वाली भावनाओं की सच्चाई उजागर करता है।" असल में, यह पूरा सफर हमें यही सीख देता है कि "प्यार को किसी खास दिन या तोहफे की ज़रूरत नहीं होती," बल्कि वह एहसासों की वह मिठास है जो रोज़मर्रा की ज़िंदगी में बिना किसी कीमत के बिखरी रहती है। ज़्यादा न लिखते हुए, पोस्ट को यहीं समाप्त करता हूँ। यदि पोस्ट लिखते समय भूलवश व्याकरण संबंधी या अन्य कोई त्रुटि रह गई हो, तो कृपया क्षमा कर दीजिएगा। 👏🏻_*
*_!! ┈┉❀꧁ Զเधॆ Զเधॆ ꧂❀┉┈ !!_*
☯️🕉️🌴🌾🛕🌝🛕💐🌴🕉️☯️ #🌜 शुभ संध्या🙏