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*_!! विज्ञान को चुनौती: आग ने तय किए ‘लोकतंत्र के रखवाले’ !!_*
*_✍🏻सुरेंद्र अरोडा की लेखनी द्वारा, हास्य रस से सराबोर चिंतन योग्य एक विचारोत्तेजक पोस्ट।✍🏻_*
*_☝🏻मित्रों, कोलकाता के अलीपुर में स्थित एक 10 मंजिला सरकारी इमारत ( साउथ 24 परगना जिला परिषद ) में 10 जून, 2026 को भीषण आग लगी थी, जिसमें लगभग 4,000 EVM ( इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन ) जलकर खाक हो गईं। "यह घटना अपने आप में चिंताजनक है, लेकिन जिस तरीके से आग लगी, वह कई सवाल खड़े करती है।" कोलकाता की इस आग ने "गुरुत्वाकर्षण" और दहन के सारे नियम तोड़ दिए। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इमारत की दूसरी, तीसरी या चौथी मंजिल पर आग लगी, लेकिन जब तक लपटें शांत हुईं, "तब तक 8वीं और 9वीं मंजिल पर रखे करीब 4,000 EVM चने-भुने हो चुके थे।" खास बात यह कि बीच की "5वीं, 6ठी, और 7वीं मंजिलें " बाल-बाल बच गईं।_*
*_यह कोई साधारण आग नहीं, बल्कि "लेजर-गाइडेड स्मार्ट फायर का कमाल लगता है।" मानो लपटों ने सोशल डिस्टेंसिंग का पाठ पढ़ रखा हो—नीचे वालों को छोड़ा, बीच वालों को नमस्ते किया, और सीधा उसी मंजिल पर जा पहुंची जहां "लोकतंत्र के सबसे कीमती दस्तावेज रखे थे।" सरकार के एक मंत्री महोदय ने स्वयं कहा, “यह सामान्य आग नहीं लगती, तोड़-फोड़ की आशंका है।” इतना तो हम भी समझते हैं। सवाल यह है कि आग को इतनी सटीक ‘लोकेशन’ किसने बताई ?_*
*_पहले चुनाव में EVM खराब होते हैं, फिर अदालत में केस होते हैं, फिर 45 दिन की कानूनी अवधि खत्म होने से ठीक पहले आग लगती है और ‘सबूत’ गायब हो जाते हैं। सच में, यह ‘डबल इंजन’ की सरकार की अपार क्षमता है—एक इंजन विकास को गति देता है, दूसरा इंजन आग को ‘दिशा’ देता है। जांच के लिए एसआईटी ( विशेष जांच दल ) का गठन कर दिया गया है। वो फोरेंसिक टीम आई, सैंपल लिए, और शायद रिपोर्ट आने वाले महीनों में कहीं दब जाएगी। जब तक सच सामने आता, तब तक 4,000 EVM की राख ठंडी हो चुकी होगी।_* 🤔
*_विशेष :-_*
*_☝🏻मित्रों, व्यंग्य तो यह है कि: जब लोकतंत्र की नींव ( EVM ) ही ‘मिस्ट्री फायर’ से राख हो जाएं, तो हम चुनाव के नतीजों पर भरोसा करें या उस ‘अदृश्य हाथ’ पर जिसने माचिस जलाई ? सरकार और प्रशासन की चुप्पी इस बात का सबूत है कि उनके पास आग बुझाने के लिए पानी से ज्यादा ‘बहाने’ हैं। यह पोस्ट समाचार रिपोर्ट्स में सामने आई विसंगतियों (आग का फर्श कूदना ) पर आधारित एक व्यंग्य रचना है, "जिसका उद्देश्य घटना की गंभीरता और जवाबदेही की कमी की ओर ध्यान आकर्षित करना है।" ज्यादा ना लिखते हुए, पोस्ट को यहीं समाप्त करता हूं। यदि पोस्ट लिखते समय भूलवश व्याकरण संबंधी या अन्य कोई त्रुटि रह गई हो, तो कृपया क्षमा कर दीजिएगा।_*👏🏻
*_!! ┈┉❀꧁ Զเधॆ Զเधॆ ꧂❀┉┈ !!_*
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