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☯️🕉️🌳🌻🛕🌝🛕🌹🌳🕉️☯️ *_!! रात्रि : कालीन वंदन !!_* *_सत्यनारायणं देवं वन्देऽहं कामदं प्रभुम्। लीलया विततं विश्वं येन तस्मै नमो नमः॥_* *_ध्यायेत् सत्यं गुणातीतं गुणत्रयसमन्वितम्। लोकनाथं त्रिलोकेशं कौस्तुभाभरणं हरिम्॥_* *_नीलवर्णं पीतवस्त्रं श्रीवत्साङ्कं सुभूषितम्। गोविन्दं गोकुलानन्दं ब्रह्माद्यैरपि पूजितम्॥_* *_ॐ विश्वामित्राय विद्महे, धनुर्हस्ताय धीमहि, तन्नो जीवः प्रचोदयात्॥_* *_ॐ जलबीजाय विद्महे, नीलपुरुषाय धीमहि, तन्नो वरुणः प्रचोदयात्॥_* *_!! प्रेम का बाजार और दिल की पहचान: "क्या सच्चा प्यार सिर्फ एक ही बार आता है ?" !!_* *_✍🏻सुरेंद्र अरोडा की लेखनी द्वारा, चिंतन योग्य एक विचारोत्तेजक पोस्ट।✍🏻_* *_☝🏻मित्रों, "सुबह मैंने सच्चे प्रेम, रिश्तों की गहराई एवं एकनिष्ठता के महत्व से संबंधीत एक परिच्छेद ( पैराग्राफ ) लिखा था।" निम्नलिखित पोस्ट उसी परिच्छेद का विस्तृत रूप है। "आज के दौर में जहाँ रिश्ते क्लिक पर बनते और स्वाइप पर टूटते हैं, वहाँ प्रेम की परिभाषा को लेकर एक गंभीर बहस छिड़ गई है।" हम अक्सर यह कहावत सुनते हैं कि "लड़कियों के लिए छत्तीस आते हैं और छत्तीस जाते हैं", लेकिन क्या यह सोच हमें 'सच्चे प्रेम की गहराई' से दूर तो नहीं ले जा रही ?_* *_यह विचार कि "प्यार करने वाला सिर्फ एक ही आता है और उसके बाद जो आते हैं, वे बॉयफ्रेंड नहीं, अपितु कस्टमर कहलाते हैं," बेहद गहरा और विचारोत्तेजक है। यह हमें रिश्तों के बढ़ते 'उपभोक्तावाद' पर सोचने को मजबूर करता है। जब हम रिश्तों को 'विकल्प' और 'अवसर' की नजर से देखने लगते हैं, "तो प्रेम की पवित्रता खत्म हो जाती है।" यदि हर नए रिश्ते को हम पिछले रिश्ते का विकल्प या अगले रिश्ते की तैयारी समझें, तो हम कभी किसी के साथ 'पूर्ण रूप से' जुड़ ही नहीं पाते। जैसा कि कहा गया है, "सच्चा प्रेम बाज़ार नहीं, यह तो वह एहसास है जो दिल में उतरकर पहचान बन जाता है।" यह पहचान ही है जो हमें किसी दूसरे इंसान में 'घर' जैसा एहसास कराती है।_* *_मित्रों, हर रिश्ते को अस्थायी समझकर जीना खुद को भँवर में डालना है। "यह पंक्ति आधुनिक डेटिंग कल्चर के सबसे बड़े सत्य को उजागर करती है।" जब हम यह सोचकर किसी रिश्ते में जाते हैं कि 'चलेगा तो ठीक, नहीं तो कोई और मिल जाएगा', तो हम उस रिश्ते को पनपने का मौका ही नहीं देते। ऐसे में सामने वाला व्यक्ति हमारे जीवन में 'समय का उपभोक्ता' मात्र रह जाता है, न कि 'समय का साथी'। यह बात केवल लड़कियों के लिए ही नहीं, "बल्कि हर उस इंसान के लिए है जो सच्चा प्रेम चाहता है।" सवाल है कि क्या हम सही व्यक्ति की तलाश कर रहे हैं या सिर्फ दिल की दीवारों पर दस्तक देने वालों की भीड़ इकट्ठा कर रहे हैं ? "जिसके पास आपका दिल है, वही आपका है; बाकी बस उस दिल तक पहुँचने के असफल प्रयास हैं।" यह एक कड़वा सच है कि बहुत से रिश्ते हमारे जीवन में सिर्फ इसलिए आते हैं ताकि हमें यह एहसास करा सकें कि आखिर हमारा दिल किसके पास है।_* *_तो फिर "सच्चा प्यार " पहचानें कैसे ? शायद इस कसौटी पर कि "सच्चा प्यार वह है जो तोड़े नहीं, संवारे, और जो ठहरने के लिए आए, न कि सिर्फ गुज़रने के लिए।" एक सच्चा प्यार आपकी कमजोरियों को नहीं गिनता, "बल्कि उन्हें अपनी ताकत बनाता है।" वह आपके जीवन में तूफान की तरह नहीं, बल्कि लंगर की तरह आता है - जो आपको स्थिरता दे। "वह सिर्फ अच्छे वक्त का हिस्सा नहीं बनता, बल्कि बुरे वक्त में आपकी ढाल बन जाता है।"👌🏻_* *_🙏🏻बृहस्पतिवार रात्रि की सुंदर, मधुर एवं सौम्य मंगल बेला में आप सभी मित्रजनों को भगवान श्री हरि विष्णु जी एवं देवगुरु बृहस्पति जी का आशीर्वाद प्राप्त हो ! भगवान श्री सत्यनारायण जी आपके भंडारे भरपूर रखें, आपको सुख, शांति एवं समृद्धि प्रदान करें तथा आप सदैव खुश रहें ! इन्हीं शुभकामनाओं के साथ सुमंगलम, स्नेहिल रात्रि वंदन, मित्रों ! यदि यह पोस्ट आपको अच्छी लगी हो, तो कृपया इसे अपने सभी परिचितों के साथ साझा करें ! धन्यवाद सहित आपका अपना, डॉ० एस. एस. अरोड़ा 9770077479🙏🏻_* *_विशेष :-_* *_☝🏻मित्रों,"आज जरूरत है इस बात पर विचार करने की कि हम रिश्तों में क्या ढूंढ रहे हैं।" क्या हमें 'कस्टमर' चाहिए जो हमारी ख्वाहिशों को पूरा करें और चले जाएँ ? या हमें 'प्रेमी' चाहिए जो हमारी पहचान बन जाए ? यह पोस्ट किसी एक लिंग विशेष को लक्षित करके नहीं लिखी गई है, "बल्कि यह हर उस दिल के लिए है जो सच्चे प्रेम की तलाश में है।" आज के दौर में जहाँ रिश्ते डिस्पोजेबल होते जा रहे हैं, "वहाँ यह याद दिलाना जरूरी है कि कुछ चीजें स्थायी होती हैं, कुछ रिश्ते बनाए जाते हैं ठहरने के लिए।" तो अगली बार जब कोई आपके जीवन में आए, तो खुद से पूछिए - क्या यह व्यक्ति मेरे दिल में उतरकर मेरी पहचान बनेगा, या फिर यह भी उन असफल प्रयासों में से एक होगा "जो सिर्फ दिल तक पहुँचना चाहते थे, पर पहुँच न सके ?" क्योंकि सच्चा प्यार भीड़ नहीं, पहचान मांगता है। "आप #🌙 गुड नाईट क्या सोचते हैं ? क्या आज का दौर सच्चे प्रेम को मुश्किल बना रहा है या फिर हमने खुद प्रेम को मुश्किल बना लिया है ?" ज्यादा ना लिखते हुए, पोस्ट को यहीं समाप्त करता हूं। यदि पोस्ट लिखते समय भुलवश व्याकरण संबंधी या अन्य कोई त्रुटि रह गई हो, तो कृपया क्षमा कर दीजिएगा।_*👏🏻 *_!! ┈┉❀꧁ Զเधॆ Զเधॆ ꧂❀┉┈ !!_* ☯️🕉️🌴🌾🌈😴🌈💐🌴🕉️☯️
☯️🕉️🌳🌻🛕🌞🛕🌹🌳🕉️☯️ *_!! प्रात: कालीन वंदन !!_* *_शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशम् ! विश्वाधारंगगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम् !!_* *_मङ्गलं भगवान् विष्णुर्मङ्गलं गरुडध्वजः ! मङ्गलंपुण्डरीकाक्षो मङ्गलायतनो हरिः !!_* *_ॐ जीवं जीवं न ऊतये जीवं देवेषु नस्कृतम् ! जीवन्तमग्न आ हुवेस नो बृहस्पतिर्दधातु !!_* *_!! क्या वोटिंग में फिंगरप्रिंट अनिवार्य होना चाहिए ? - "राघव चड्डा के प्रश्न पर विचार।" !!_* *_✍🏻सुरेंद्र अरोडा की लेखनी द्वारा, चिंतन योग्य एक विचारोत्तेजक पोस्ट।✍🏻_* *_☝🏻मित्रों, हाल ही में राज्य सभा सांसद राघव चड्डा ने संसद में एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया है - "जब हर छोटे-बड़े कार्य के लिए फिंगरप्रिंट अनिवार्य कर दिया गया है, तो मतदान के समय फिंगरप्रिंट लेना अनिवार्य क्यों नहीं ?" यह प्रश्न भारतीय लोकतंत्र की पारदर्शिता और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जुड़ा है। आइए, आज आपको मैं इस संदर्भ पर अपने विचार बताता हूं। आज डिजिटल इंडिया के युग में सिम कार्ड लेने के लिए फिंगरप्रिंट अनिवार्य है। बैंक खाता खोलने के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन। आधार से जुड़ी हर सेवा के लिए फिंगरप्रिंट। "यहां तक कि राशन कार्ड, पासपोर्ट जैसे दस्तावेजों के लिए भी बायोमेट्रिक जानकारी अनिवार्य !" लेकिन लोकतंत्र के सबसे पवित्र कर्तव्य - मतदान के समय, पहचान सत्यापन का मौजूदा तरीका केवल फोटो पहचान पत्र पर निर्भर करता है।_* *_👉🏻 तार्किक विश्लेषण, पक्ष में तर्क:_* *_1) पहचान की पुष्टि: फिंगरप्रिंट से मतदाता की पहचान 100% सुनिश्चित की जा सकती है, जिससे फर्जी मतदान पर रोक लगेगी।_* *_2) तकनीकी संगति: जब हर दैनिक कार्य में बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण अनिवार्य है, "तो राष्ट्र निर्माण के सबसे महत्वपूर्ण कार्य में यह क्यों नहीं ?"_* *_3) पारदर्शिता: इससे चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और जनता का विश्वास मजबूत होगा।_* *_4) डुप्लीकेट वोटों पर रोक: एक व्यक्ति द्वारा कई बार मतदान की संभावना समाप्त हो जाएगी।_* *_2👉🏻 विपक्ष में तर्क :-_* *_1) गोपनीयता का मुद्दा: मतदान की गोपनीयता भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला है। फिंगरप्रिंट से मतदाता की पहचान उजागर हो सकती है कि उसने किसे वोट दिया।_* *_2) तकनीकी चुनौतियाँ: ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क समस्या, बिजली की कमी, और तकनीकी साक्षरता की कमी।_* *_3) डेटा सुरक्षा: संवेदनशील बायोमेट्रिक डेटा के दुरुपयोग की आशंका।_* *_4) समावेशिता: वृद्ध, शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्ति जिनके फिंगरप्रिंट स्पष्ट नहीं होते, उनके मतदान अधिकारों पर प्रश्नचिह्न।_* *_👉🏻 चिंतन योग्य बिंदु :-_* *_1) क्या हमारी तकनीकी क्षमता और डेटा सुरक्षा व्यवस्था इतनी मजबूत है कि "करोड़ों मतदाताओं के बायोमेट्रिक डेटा को सुरक्षित रख सके ?"_* *_2) "क्या यह कदम मतदान प्रतिशत को प्रभावित करेगा ?" क्या लोग अपने बायोमेट्रिक डेटा को साझा करने से कतराएंगे ?_* *_3) क्या फिंगरप्रिंट अनिवार्य करने से चुनाव प्रक्रिया में देरी और जटिलता नहीं बढ़ेगी ?_* *_मित्रों, "राघव चड्डा का प्रश्न गहन चिंतन का विषय है। एक ओर जहां तकनीकी विकास और पारदर्शिता की मांग है, वहीं दूसरी ओर लोकतांत्रिक मूल्यों और गोपनीयता की रक्षा भी आवश्यक है।" यह आवश्यक है कि इस मुद्दे पर व्यापक विमर्श हो, जिसमें न केवल राजनीतिक दल "बल्कि तकनीकी विशेषज्ञ, संवैधानिक विशेषज्ञ और आम नागरिक भी शामिल हों।" कोई भी निर्णय लेने से पहले पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चुनिंदा क्षेत्रों में इसका परीक्षण किया जा सकता है। लोकतंत्र की मजबूती के लिए जहां नवाचार आवश्यक है, "वहीं मूलभूत अधिकारों और स्वतंत्रताओं की रक्षा भी उतनी ही जरूरी है।" इस संतुलन को साधते हुए ही किसी निर्णय पर पहुंचना उचित होगा। "लोकतंत्र केवल मतदान का अधिकार नहीं, बल्कि विवेकपूर्ण निर्णय लेने की क्षमता का नाम है।" 🤔👌🏻_* *_🙏🏻बृहस्पतिवार पूर्वाह्न की सुंदर, मधुर एवं सौम्य मंगल बेला में आप सभी मित्रजनों को भगवान श्री हरि विष्णु जी एवं देवगुरु बृहस्पति जी का आशीर्वाद प्राप्त हो। भगवान श्री सत्यनारायण जी आपके भंडारे भरपूर रखें, आपको सुख, शांति एवं समृद्धि प्रदान करें तथा आप सदैव खुश रहें। इन्हीं शुभकामनाओं के साथ सुमंगलम, स्नेहिल भोर वंदन, मित्रों। यदि यह पोस्ट आपको अच्छी लगी हो, तो कृपया इसे अपने सभी परिचितों के साथ साझा करें। धन्यवाद सहित आपका अपना, डॉ० एस. एस. अरोड़ा 9780077479🙏🏻_* *_विशेष :-_* *_☝🏻मित्रों, राज्य सभा सांसद राघव चड्डा द्वारा उठाया गया यह प्रश्न कि मतदान के समय फिंगरप्रिंट अनिवार्य क्यों नहीं है, "भारतीय लोकतंत्र की चुनावी प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण विचार है। हालाँकि, इस मुद्दे पर बहस के दौरान ही उन्हें राज्य सभा से निलंबित किए जाने की घटना लोकतांत्रिक मूल्यों और संसद में विचार-विमर्श की स्वतंत्रता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।" मेरा भारत सरकार से विनम्र निवेदन है कि किसी भी लोकतंत्र में विपक्षी सांसदों द्वारा उठाए गए सवालों को दबाने के बजाय, "उन पर गंभीरता से चर्चा होनी चाहिए, खासकर जब वह सवाल चुनाव सुधार जैसे संवेदनशील विषय से जुड़ा हो।" राघव चड्डा के निलंबन ने इस बहस को और व्यापक बना दिया है कि आखिर हम अपने लोकतंत्र की मजबूती के लिए कितने गंभीर हैं, और क्या हम वास्तव में ऐसे सवालों का सामना करने के लिए तैयार हैं "जो हमारी व्यवस्था की कमियों को उजागर करते हैं।" ज्यादा ना लिखते हुए, पोस्ट को यहीं समाप्त करता हूं। यदि पोस्ट लिखते समय भुलवश व्याकरण संबंधी या अन्य कोई त्रुटि रह गई हो, तो कृपया क्षमा कर दीजिएगा।_*👏🏻 *_!! ┈┉❀꧁ Զเधॆ Զเधॆ ꧂❀┉┈ !!_* ☯️🕉️🌴🌾🌈☀️🌈💐🌴🕉️☯️ #🌞 Good Morning🌞
☯️🕉️🌳🌻🛕🌞🛕🌹🌳🕉️☯️ *_!! प्रातः कालीन वंदन !!_* *_आदिदेवं जगत्कारणं श्रीधरं लोकनाथं विभुं व्यापकं शंकरम् ! सर्वभक्तेष्टं मुक्तिदं माधवं सत्यनारायणं विष्णुमीशं भजे !!_* *_देवानां च ऋषीणां च गुरुं काञ्चनसन्निभम् ! बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिम् !!_* *_देवमन्त्री विशालाक्षः सदा लोकहिते रतः ! अनेकशिष्यसंपूर्णः पीडां हरतु मे गुरुः !!_* *_युद्धे चक्रधरं देवं प्रवासे च त्रिविक्रमम् ! नारायणं तनुत्यागे श्रीधरं प्रियसंगमे !!_* *_दुःस्वप्ने स्मर गोविन्दं संकटे मधुसूदनम् !_* *_ॐ वरुणः पाप्मानं मे हन्तु सत्यधर्मा परिपातु विश्वतः ! यथाहमिहीनः स्यां यथा मा दुष्कृतं स्पृशत् ! ॐ स्वस्ति !!_* *_यः सेनानीर्वसूनां यः पृष्ठीनां नियोधकः। यो रथानां वाहांश्च स नो वायुर्मृडयातु नः॥_* *_!! ༺꧁ प्रभात पुष्प ꧂༻ !!_* *_☝🏻मित्रों, जो लड़कियाँ यह सोचती हैं कि उनके जैसे छत्तीस आएँगे और छत्तीस जाएँगे, तो समझ लो—"प्यार करने वाला सिर्फ एक ही आता है। उसके बाद जो आते हैं, वे बॉयफ्रेंड नहीं, अपितु कस्टमर कहलाते हैं।" सच्चा प्रेम बाज़ार नहीं, यह तो वह एहसास है जो दिल में उतरकर पहचान बन जाता है। हर रिश्ते को अस्थायी समझकर जीना खुद को भँवर में डालना है, "जहाँ हर आने वाला समय का उपभोक्ता मात्र रह जाता है।" जिसके पास आपका दिल है, वही आपका है; बाकी बस उस दिल तक पहुँचने के असफल प्रयास हैं। पहचानो—"सच्चा प्यार वह है जो तोड़े नहीं, संवारे, और जो ठहरने के लिए आए, न कि सिर्फ गुज़रने के लिए।"👌🏻_* *_🙏🏻बृहस्पतिवार प्रातःकाल की पवित्र "मंगल बेला " पर विधाता आपको सदैव अक्षय आरोग्य, धन एवं ऊर्जा प्रदान करें। सुरेंद्र अरोड़ा की ओर से आपके लिए मंगलमय शुभकामनाएं। आपके स्वास्थ्य, सफलता एवं यश-कीर्ति की वृद्धि के लिए असीमित दुआओं के साथ... सुमंगल, स्नेहिल भोर-वंदन, मित्रों। भगवान श्री हरि विष्णु जी एवं देवगुरु बृहस्पति जी का स्नेहिल शुभ आशीर्वाद आप सभी मित्रजनों पर सदैव बना रहे। मस्त रहें, व्यस्त रहें, स्वस्थ रहें, समस्त पाप-कर्मों से दूर रहें तथा प्रकृति के "एहसानमंद" और "शुक्रगुज़ार" रहें।🙏🏻_* *_!! ┈┉❀꧁ Զเधॆ Զเधॆ ꧂❀┉┈ !!_* ☯️🕉️🌴🌾🌈☀️🌈💐🌴🕉️☯️ #🌞 Good Morning🌞
☯️🕉️🌳🌹🛕🌝🛕🌻🌳🕉️☯️ *_!! रात्रि: कालीन वंदन !!_* *_एकदन्तं महाकाय तप्तचामीकरप्रभम्। लम्बोदरं विशालाक्षं वन्देहं गणनायकम्॥_* *_अष्टभिर्मातृभिः सार्धं अष्टभिः सिद्धिभिः सह। पूजितं यत्र नित्यं च तं विनायकमाश्रये॥_* *_ॐ श्यामाङ्गाय विद्महे सुमनोहराय धीमहि। तन्नोबुधः प्रचोदयात्॥_* *_ॐ चन्द्रपुत्राय विद्महे रोहिणीप्रियाय धीमहि। तन्नोबुधः प्रचोदयात्॥_* *_!! जीवन की त्रिवेणी: "आभार, कृतज्ञता और सतर्कता का संगम।" !!_* *_✍🏻सुरेंद्र अरोडा की लेखनी द्वारा, चिंतन योग्य एक विचारोत्तेजक पोस्ट।✍🏻_* *_☝🏻मित्रों, "सुबह मैंने जीवन दर्शन, आत्म- विकास तथा मानसिक शांति से संबंधीत एक परिच्छेद ( पैराग्राफ ) लिखा था। निम्नलिखित पोस्ट उसी परिच्छेद का विस्तृत रूप है।" मित्रों, आज मैं आपसे जीवन के उस गहरे सत्य पर चर्चा करना चाहता हूँ, "जिसे अक्सर हम भागदौड़ में भूल जाते हैं।" परिच्छेद में प्रस्तुत विचार हमारे अस्तित्व की तीन महत्वपूर्ण धाराओं को संगम कराता है - जिन्हें हम "जीवन की त्रिवेणी" कह सकते हैं।_* *_हममें से कई लोग असाधारण प्रतिभा लेकर जन्मे हैं, "तो कईयों को अद्वितीय रूप मिला है।" ये वरदान हैं, हमारी कमाई नहीं। जैसे एक माली को बगीचे में खिले फूलों पर गर्व हो सकता है, "लेकिन उन फूलों को उगाने वाली शक्ति से अलग होकर वे फूल मुरझाने लगते हैं।" ठीक यही स्थिति हमारी प्रतिभा और रूप की है। तर्क यह है कि जब हम समझ जाते हैं कि यह सब हमारा अपना नहीं है, "बल्कि एक उच्च शक्ति का प्रसाद है, तो स्वतः ही विनम्रता आती है।" यह विनम्रता ही इन उपहारों की सुंदरता को अक्षुण्ण रखती है। जिस क्षण अहंकार आता है, ये उपहार अपनी चमक खोने लगते हैं।_* *_मित्रों, "ये वो उपलब्धियाँ हैं जो हमारी मेहनत, लगन और समर्पण से मिलती हैं।" इनके लिए कृतज्ञ होना आवश्यक है - उन लोगों के प्रति जिन्होंने हमारा साथ दिया, उन परिस्थितियों के प्रति जो हमारे अनुकूल बनीं, और उस ईश्वर के प्रति जिसने हमें यह सब करने की शक्ति दी। परंतु यहाँ एक गहरा सत्य छिपा है - "इन्हें कभी जीवन का लक्ष्य मत बनने दो।" प्रसिद्धि क्षणभंगुर है, धन आता-जाता रहता है। यदि ये जीवन का केंद्र बन गए, "तो इनके जाने पर जीवन शून्य हो जाता है।" इन्हें साधना बनाए रखें, साध्य नहीं।_* *_यह सबसे महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण पहलू है। हमारी परिस्थितियाँ हमारे हाथ में नहीं होतीं, हमारी प्रतिभा हमारे नियंत्रण में नहीं होती, "लेकिन हमारी मनोवृत्ति और हमारा अहंकार पूरी तरह हमारी अपनी रचना है।" यही वह क्षेत्र है जहाँ हमारा पूर्ण नियंत्रण है और यहीं हमारी असली परीक्षा भी है। "इसलिए इनके प्रति सतर्क रहना अनिवार्य है।" जैसे एक कुशल माली बगीचे से अनचाहे खरपतवार निकालता रहता है, वैसे ही हमें "अपनी मनोवृत्ति से नकारात्मकता और अहंकार के खरपतवार निरंतर निकालते रहना चाहिए।" यह सतर्कता ही हमारे चरित्र की नींव है।_*👌🏻 *_🙏🏻बुधवार रात्रि की सुंदर, मधुर एवं सौम्य मंगल बेला में, आप सभी मित्रजनों को भगवान गणपति जी का आशीर्वाद प्राप्त हो। गणपति बप्पा आपके भंडारे भरपूर रखें, आपको सुख, शांति व समृद्धि प्रदान करें तथा आप सदा खुश रहें। इन्हीं शुभकामनाओं के साथ, आप सभी को सुमंगलम स्नेहिल रात्रि वंदन, मित्रों। यदि यह पोस्ट अच्छी लगी हो, तो कृपया इसे अपने सभी परिचितों में प्रेषित करें। धन्यवाद सहित — आपका अपना, डॉ. एस.एस. अरोड़ा 9780077479🙏🏻_* *_विशेष :-_* *_☝🏻मित्रों, जब ये तीनों धाराएँ - उपहारों के प्रति आभार, उपलब्धियों के प्रति कृतज्ञता, और स्वयं के प्रति सतर्कता - एक साथ प्रवाहित होती हैं, "तब जीवन में अद्भुत संतुलन बनता है।" बाहरी उपलब्धियाँ चाहे जितनी भव्य हों, "यदि भीतर अशांति है तो सब व्यर्थ है।" सच्ची सफलता वह है जो विनम्रता और आत्मचिंतन के मार्ग पर चलकर प्राप्त होती है। यह वह सफलता है जो न केवल आपको, "बल्कि आपके आसपास के सभी को प्रकाशित करती है।" तो आइए, आज हम सब संकल्प करें कि प्रतिभा पाकर गर्वित नहीं, "आभारी रहेंगे।" धन-प्रसिद्धि पाकर अंहकारी नहीं, "कृतज्ञ रहेंगे।" और अपनी मनोवृत्ति के प्रति इतने सतर्क रहेंगे कि "अहंकार कभी हमारे चरित्र को मलिन न कर पाए।" यही वह त्रिवेणी है, जिसमें डुबकी लगाकर हम जीवन के वास्तविक अर्थ से जुड़ सकते हैं। "बाहरी चमक-धमक से बड़ा है भीतर का उजाला, और वह उजाला विनम्रता और आत्मचिंतन की गंगा में ही मिलता है।" ज्यादा ना लिखते हुए, पोस्ट को यहीं समाप्त करता हूं। यदि पोस्ट लिखते समय भुलवश व्याकरण संबंधी या अन्य कोई त्रुटि रह गई हो, तो कृपया क्षमा कर दीजिएगा।_*👏🏻 *_!! ┈┉❀꧁ Զเधॆ Զเधॆ ꧂❀┉┈ !!_* ☯️🕉️🌴🌾🌈😴🌈💐🌴🕉️☯️ #🌙 गुड नाईट
*_!! ज़िन्दगी: "एक अधूरा एहसास " !!_* *_✍🏻प्रिया शर्मा जी की कलम से।✍🏻_* *_☝🏻मित्रों, निम्नलिखित कविता प्रिया शर्मा जी ने पोस्ट की थी। मैंने केवल इसकी व्याकरण अशुद्धियों को ठीक करके इसे सुंदर शिर्षक प्रदान किया है।_* *_एक अधूरा ख़्वाब और टूटी हुई यादें, ज़िन्दगी अब बस कुछ अधूरी-सी बातें रह गई हैं।_* *_कहाँ गए वो दिन जब सब कुछ अपना था, आज हर कोई पराया है, बस एक तन्हाई का साया है।_* *_वो हँसी, वो खुशी, वो प्यार के पल, सब खो गए जैसे पानी के बुलबुले।_* *_दिल में दर्द है और आँखों में नमी, ज़िन्दगी अब बन गई है एक अधूरी-सी कहानी।_* *_क्यों रूठ गई किस्मत ? क्यों हम हो गए अकेले ? ज़िन्दगी के इस सफ़र में क्यों बसे हैं गम के मेले ?_* *_कोई तो बताए क्या है इस दर्द की दवा, कैसे जिएँ हम जब हर खुशी हो चुकी है फ़ना ?_* *_अब तो बस इंतज़ार है उस दिन का, जब ये दर्द खत्म होगा और मिलेगी राहत की घड़ी।_* *_पर तब तक जी लेंगे हम इस दर्द के साथ, क्योंकि यही तो है ज़िन्दगी – "एक अधूरा-सा एहसास। "_* *_✍🏻कविता शर्मा👏🏻_* #🌜 शुभ संध्या🙏
☯️🕉️🌳🌻🛕🌞🛕🌹🌳🕉️☯️ *_!! प्रातःकालीन वंदन !!_* *_प्रातः स्मरणीयं गणनाथमनाथबन्धुं सिन्दूरफालपरिशोभितगण्डयुग्मम्।_* *_उद्दण्डविघ्नपरिखण्डनचण्डदण्डं मार्कण्डेयादिसुरनायकवृन्दवन्दितम्॥_* *_गणपतिर्विघ्नराजो लम्बोदरो गजाननः।_* *_द्विमातुरश्च हेरम्ब एकदन्तो गणाधिपः।_* *_विनायकश्चारुकर्णः पशुपतिर्भवात्मजः॥_* *_प्रियङ्गुकलिकाश्यामं रूपेणाप्रतिमं भुवि। वायुभूतं समारुह्य भ्राम्यन्तं सर्वदा ग्रहैः॥_* *_सर्वदेवमयं देवं लोकानां हितकारकम्। नमामि बुधं सुरासुरैः स्तूयमानं सदा शुभम्॥_* *_ॐ गजध्वजाय विद्महे सुखहस्ताय धीमहि। तन्नो बुद्धिः प्रचोदयात्॥_* *_!! ༺꧁ प्रभात पुष्प ꧂༻ !!_* *_☝🏻मित्रों, प्रतिभा और रूप ईश्वर के अनमोल उपहार हैं, इनके लिए सदैव "आभारी " रहें — यह विनम्रता ही इनकी सुंदरता को बनाए रखती है। प्रसिद्धि और धन मानवीय प्रयासों की देन हैं, इन्हें पाकर "कृतज्ञ " रहें, परंतु इन्हें जीवन का लक्ष्य न बनने दें। "मनोवृत्ति और अहंकार पूरी तरह आपकी अपनी रचना हैं," इसलिए इनके प्रति "सतर्क " रहें — यही आपके चरित्र की नींव है। जीवन की यह "त्रिवेणी " हमें सिखाती है कि "बाहरी उपलब्धियों से अधिक महत्वपूर्ण है आंतरिक संतुलन, और सच्ची सफलता विनम्रता एवं आत्मचिंतन के मार्ग पर चलकर ही प्राप्त होती है।"_*👌🏻 *_🙏🏻बुधवार प्रातःकाल की पवित्र "मंगल बेला" में, विधाता आपको सदैव अक्षय आरोग्य, धन और ऊर्जा प्रदान करें। सुरेंद्र अरोड़ा की ओर से आपके लिए मंगलमय शुभकामनाएँ। आपके स्वास्थ्य, सफलता एवं यश-कीर्ति की असीमित दुआओं के साथ, सुमंगलम स्नेहिल भोर वंदन, मित्रों। आप एवं आपके समस्त परिवारजनों को शीतला अष्टमी, कालाष्टमी, मासिक कृष्ण जन्माष्टमी, दिल्ली फतेह दिवस तथा धूम्रपान निषेध दिवस की ढेरों बधाइयां और हार्दिक शुभकामनाएं। भगवान श्री गणेश जी का स्नेहिल शुभ आशीर्वाद आप सभी मित्रजनों पर सदैव बना रहे ! मस्त रहें, व्यस्त रहें, स्वस्थ रहें, समस्त पाप-कर्मों से दूर रहें, तथा "प्रकृति के प्रति एहसानमंद और कृतज्ञ बने रहें !"🙏🏻_* *_!! ┈┉❀꧁ Զเधॆ Զเधॆ ꧂❀┉┈ !!_* ☯️🕉️🌴🌾🛕🌞🛕💐🌴🕉️☯️ #🌞 Good Morning🌞
☯️🕉️🌳🌻🛕🌝🛕🌹🌳🕉️☯️ *_!! रात्रि:कालीन वंदन !!_* *_ॐ अंजनी पुत्राय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि। तन्नो हनुमत् प्रचोदयात्॥_* *_ॐ नमो भगवते पंचवदनाय सर्वदुष्टानां वशंकराय सर्वभूताद्म नमः स्वाहा।_* *_ॐ अंगारकाय विद्महे भूमिपुत्राय धीमहि। तन्नो मंगलः प्रचोदयात्॥_* *_ॐ जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते॥_* *_!! जीवन का गणित: "स्वीकारो, बदलो, या दूर हो जाओ।" !!_* *_✍🏻सुरेंद्र अरोडा की लेखनी द्वारा, चिंतन योग्य एक प्रेरणादायक विचारोत्तेजक पोस्ट।✍🏻_* *_☝🏻मित्रों, "सुबह मैंने जीवन दर्शन से संबंधीत एक परिच्छेद (पैराग्राफ ) लिखा था। निम्नलिखित पोस्ट उसी परिच्छेद का विस्तृत रूप है।" जीवन हमेशा हमारी मर्जी से नहीं चलता। "यह एक ऐसी नदी है जो कभी शांत बहती है, कभी रपटों पर गिरती है, और कभी भंवरों में फंसा देती है।" ऐसे में अगर हम हर लहर से लड़ने निकल पड़े, तो तैरना मुश्किल हो जाता है। इसलिए जरूरी है कि हम जीवन के निम्नलिखित सुनहरे नियम समझें :-_* *_1👉🏻 बदलो, स्वीकारो, या दूर हो जाओ :-_* *_यह सबसे बड़ा मंत्र है। अगर कोई परिस्थिति, कोई आदत, या कोई रिश्ता आपको कमजोर कर रहा है और उसे बदलने की गुंजाइश है, "तो पूरी ताकत लगाकर उसे बदल डालो।" लेकिन अगर वह चीज आपके नियंत्रण से बाहर है—जैसे कोई बीती बात, या किसी और की सोच—"तो उसे स्वीकार करना सीखो।" स्वीकारो का मतलब हार मानना नहीं, "बल्कि मैदान को समझना है।" और हां, अगर कोई चीज इतनी विषैली है कि न तो बदली जा सके और न ही स्वीकारी जा सके, "तो उससे दूरी बना लेना ही समझदारी है।" दूरी कायरता नहीं, आत्म-संरक्षण है।_* *_2👉🏻 समय और घटनाएं तय हैं :-_* *_वक्त तय है, घटना तय है। इसका मतलब यह नहीं कि हम नियतिवादी बनकर बैठ जाएं। "इसका मतलब यह है कि हर चीज का एक समय होता है।" सर्दी के बाद बसंत आता ही है। आज अगर आप कुछ खो रहे हैं, "तो समझो कि आपके हाथ किसी बेहतर चीज को भरने के लिए खाली हो रहे हैं।" जितना बेहतर तुम खो रहे हो, "उससे बेहतर तुम्हें मिलेगा"—यह सिर्फ एक सुविचार नहीं, बल्कि जीवन का क्रम है।_* *_3👉🏻 क्रोध और मुसीबत से सही जगह लड़ो :-_* *_क्रोध आए तो आईने के सामने खड़े हो जाओ और खुद से लड़ो। अपनी कमजोरियों से लड़ो। "लोगों से लड़ने से सिर्फ रिश्ते टूटते हैं, समस्याएं नहीं सुलझती।" इसके विपरीत, जब मुसीबत आए, तो यह मत सोचो कि मैं बेकार हूं। "यह समझो कि समय ने करवट बदली है।" मुसीबत से लड़ने के लिए अपने मनोबल को कमजोर मत पड़ने दो। "समय से लड़ो, खुद से नहीं"—क्योंकि तुम स्वयं अपने सबसे बड़े सहारा हो।_* *_मित्रों, तुम्हारे समस्त घावों को भरने की ताकत सिर्फ तुम्हारे अंदर है। दुनिया ढांढस बंधा सकती है, दवा दे सकती है, "लेकिन असली मरहम तुम्हारा आत्मविश्वास और आत्म-प्रेम है।" जब तुम खुद के लिए पर्याप्त हो जाते हो, तो दुनिया की कोई तूफान तुम्हें उखाड़ नहीं सकता। जो तुम्हें मिला है, "वह तुम्हारी राह का पत्थर नहीं, सीढ़ी है।" ठोकरें तुम्हें गिराने नहीं, "सिखाने आती हैं।" हर मोड़ पर एक अनकहा सबक छिपा है। अगर आप उसे पढ़ना सीख जाएं, तो हर असफलता एक डिग्री बन जाती है।_* *_मित्रों, शब्दों से पहले मौन बोलता है। जब शब्द दम तोड़ देते हैं, तब मौन ही सबसे बड़ा उत्तर होता है। और हां, सीमाएं तय करना सीखो—"अपने दिल पर नहीं, अपनी कमजोरियों पर। जो तुम्हें बार-बार तोड़ता है, उसे छोड़ना सीखो, वरना टूटना तय है।" हर सवाल का जवाब देना जरूरी नहीं, क्योंकि कुछ सवाल सिर्फ तुम्हारी परीक्षा लेने के लिए होते हैं, तुम्हें जवाब सुनने के लिए नहीं।जब लगे कि सब खत्म हो गया, तब रुककर देखो। "अक्सर, वही अंत एक नई शुरुआत का झूठा नाम होता है।" जब खुद पर भरोसा हो, तो हर मंजिल तुम्हारे कदमों में होती है। बस चलते रहने की जरूरत है।_* 👌🏻 *_🙏🏻मंगलवार रात्रि की सुंदर, मधुर एवं सौम्य मंगल बेला में, आप सभी मित्रजनों को भगवान बजरंगबली जी का आशीर्वाद प्राप्त हो। मंगलमय भगवान आपके भंडारे भरपूर रखें, आपको सुख, शांति व समृद्धि प्रदान करें तथा आप सदा खुश रहें। इन्हीं शुभकामनाओं के साथ, आप सभी को सुमंगलम स्नेहिल रात्रि वंदन, मित्रों ! यदि यह पोस्ट अच्छी लगी हो, तो कृपया इसे अपने सभी परिचितों में प्रेषित कर पुण्य लाभ अर्जित करें। धन्यवाद सहित — आपका अपना, डॉ. एस.एस. अरोड़ा 9780077479🙏🏻_* *_विशेष :-_* *_☝🏻मित्रों, तो आज से यह संकल्प लें कि जो बदल सकता है, "उसे बदलने का साहस रखूंगा।" जो नहीं बदल सकता, "उसे स्वीकारने की शक्ति रखूंगा।, और जो सहन नहीं हो सकता, "उससे दूर हो जाने की समझदारी रखूंगा।" क्योंकि असली जीत खुद को संवारने में है, खोने और पाने के खेल में नहीं। ज्यादा ना लिखते हुए, पोस्ट को यहीं समाप्त करता हूं। यदि पोस्ट लिखते समय भुलवश व्याकरण संबंधी या अन्य कोई त्रुटि रह गई हो, तो कृपया क्षमा कर दीजिएगा।_*👏🏻 *_!! ┈┉❀꧁ Զเधॆ Զเधॆ ꧂❀┉┈ !!_* ☯️🕉️🌴🌾🛕😴🛕💐🌴🕉️☯️ #🌙 गुड नाईट
☯️🕉️🌳🌹📚🌞📚🌻🌳🕉️☯️ *_!! प्रातः कालीन वंदन !!_* *_गोष्पदीकृतवारीशं मशकीकृतराक्षसम् !रामायणमहामालारत्नं वन्देऽनिलात्मजम् !!_* *_अञ्जनानन्दनं वीरं जानकीशोकनाशनम् ! कपीशमक्षहन्तारं वन्दे लंकाभयंकरम् !!_* *_वामे करे वैरिभिदं वहन्तं शैलं परिश्रिंखलहारटंकम् ! दधानमच्छं तु सुवर्णवर्णं भजे ज्वलत्कुण्डलमाञ्जनेयम् !!_* *_उद्यदादित्यसंकाशमुदारभुजविक्रमम् ! कन्दर्पकोटिलावण्यं सर्वविद्याविशारदम् !!_* *_ॐ भौमाय विद्महे, लोहितांगाय धीमहि, तन्नो मंगलः प्रचोदयात्।_* *_!! एक मशाल जो अंधकार में राह दिखाती है !!_* *_✍🏻सुरेंद्र अरोड़ा की लेखनी द्वारा, सावित्रीबाई फुले जी की 129वीं पुण्यतिथि पर विशेष।✍🏻_* *_☝🏻मित्रों, आज सावित्रीबाई फुले जी की पुण्यतिथि पर उस महान विभूति को शत-शत नमन, वंदन, अभिनंदन और प्रणाम, जिसने उस दौर में शिक्षा की अलख जगाई, "जब औरत और दलित होना ही सबसे बड़ा अपराध माना जाता था।" सोचिए, वह समय था जब लड़कियों को पढ़ाना पाप समझा जाता था, जब एक विधवा का सिर मुंडवाकर उसे समाज से बहिष्कृत कर दिया जाता था, और जब छुआछूत जैसी बुराई ने समाज को टुकड़ों में बांट रखा था। उस कालखंड में सावित्रीबाई फुले ने न केवल स्वयं पढ़ना सीखा, बल्कि देश की पहली महिला शिक्षिका बनकर लड़कियों और दलितों के लिए स्कूल खोले।_* *_लेकिन यह राह आसान नहीं थी। उनके साथ हुए अन्याय ने दिखाया कि सच्चाई की राह पर चलना कितना कठिन होता है। जब वह स्कूल जाती थीं, तो रूढ़िवादी लोग, "विशेषकर उच्च जाति के तथाकथित ठेकेदार, उन पर कीचड़, पत्थर और गोबर फेंकते थे। यहां तक कि बाल गंगाधर तिलक जैसे प्रतिष्ठित नेताओं ने भी लड़कियों और गैर-ब्राह्मणों के लिए स्कूल खोले जाने का विरोध किया था," जिससे फुले दंपति को घर से निकाल दिया गया, लेकिन सावित्रीबाई रुकीं नहीं। उनके पास एक अतिरिक्त साड़ी रहती थी, गंदी होने पर बदल लेती थीं और आगे बढ़ जाती थीं। यह दृढ़ संकल्प ही है जो इतिहास बदलता है।_* *_मित्रों, उनके साथ हुआ यह अन्याय सिर्फ शारीरिक नहीं था। उन्होंने देखा कि कैसे विधवाओं के सिर मुंडवाकर उन्हें जीने से ज्यादा मरने पर मजबूर कर दिया जाता था। "इसी अन्याय के खिलाफ उन्होंने बालहत्या प्रतिबंधक गृह खोला, जहां बलात्कार की शिकार गर्भवती विधवाएं सुरक्षित रह सकें और उनके बच्चों को पढ़ाया जा सके।" उन्होंने न केवल छुआछूत मिटाने के लिए अपने घर में कुआं खुदवाकर सबको पानी पीने का हक दिया, बल्कि एक विधवा के बेटे यशवंत को गोद लेकर समाज के हर उस व्यक्ति को शिक्षित बनाया, जिसे सदियों से अशिक्षा की जंजीरों में जकड़ा गया था।_* *_उन्होंने नारी शिक्षा के साथ-साथ विधवा विवाह, छुआछूत जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ भी संघर्ष किया। महिला सेवा मंडल जैसी संस्थाओं के जरिए उन्होंने महिलाओं को उनके अधिकारों के लिए जागरूक किया। जब 1890 में पति ज्योतिराव का निधन हुआ, "तो उन्होंने उस समय की कट्टर परंपरा को तोड़ते हुए स्वयं ही उनकी चिता को अग्नि दी—यह उस दौर में एक क्रांतिकारी कदम था।" प्लेग के समय उन्होंने मरीजों की सेवा की और इसी सेवा के दौरान वह स्वयं इस बीमारी से ग्रसित होकर 10 मार्च 1897 को इस दुनिया से विदा हो गईं। लेखनी को विराम देते हुए, सुरेंद्र अरोडा आज सावित्रीबाई फुले जी की 129वीं पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धानवत श्रद्धांजलि अर्पित करता है।_* 💐👏🏻 *_🙏🏻मंगलवार प्रातः काल की सुंदर, मधुर एवं सौम्य मंगल बेला में, आप सभी मित्रजनों को भगवान बजरंगबली जी का आशीर्वाद प्राप्त हो। मंगलमय भगवान आपके भंडारे भरपूर रखें, आपको सुख, शांति व समृद्धि प्रदान करें तथा आप सदा खुश रहें। इन्हीं शुभकामनाओं के साथ, आप सभी को सुमंगलम स्नेहिल भोर वंदन, मित्रों ! यदि यह पोस्ट अच्छी लगी हो, तो कृपया इसे अपने सभी परिचितों में प्रेषित करें।धन्यवाद सहित — आपका अपना, डॉ. एस.एस. अरोड़ा 97870077479🙏🏻_* *_विशेष :-_* *_☝🏻मित्रों, "आज जब हम शिक्षित हैं, स्मार्टफोन चलाते हैं, ऊंचे ओहदों पर काम करते हैं, तो क्या हम कभी सोचते हैं कि यह सब संभव किसके बलिदानों से हुआ ? क्या हम सिर्फ अधिकारों की बात करते हैं या कर्तव्यों का भी निर्वाह करते हैं ?" क्या हम अपने आसपास फैली सामाजिक बुराइयों—"जैसे जातिवाद, छुआछूत या महिलाओं के प्रति भेदभाव—के खिलाफ आवाज उठाते हैं ?" क्या हम किसी के जीवन में उम्मीद की किरण बन पाते हैं ? सावित्रीबाई फुले ने कहा था — "शिक्षा गुलामी की जंजीरों को तोड़ने की तलवार है।" आइए, उनकी पुण्यतिथि पर हम यह संकल्प लें कि हम उनके सपनों का भारत बनाएंगे — "जहां हर बच्ची शिक्षित हो, जहां जात-पात का भेद न हो, जहां हर इंसान सम्मान से जी सके। उनका जीवन हमें सिखाता है कि एक व्यक्ति भी, यदि दृढ़ संकल्पित हो, तो पूरे समाज को बदल सकता है।" ज्यादा न लिखते हुए, पोस्ट को यहीं समाप्त करता हूं। यदि पोस्ट लिखते समय भूलवश व्याकरण संबंधी या अन्य कोई त्रुटि रह गई हो, तो कृपया क्षमा कर दीजिएगा।👏🏻_* *_!! ┈┉❀꧁ Զเधॆ Զเधॆ ꧂❀┉┈ !!_* ☯️🕉️🌴🌾📚☀️📚💐🌴🕉️☯️ #🌞 Good Morning🌞
☯️🕉️🌳🌹🛕🌞🛕🌻🌳🕉️☯️ *_!! प्रातः कालीन वंदन !!_* *_मनोजवं मारुतुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥_* *_धरणीगर्भसंभूतं विद्युत्कान्तिसमप्रभम्। कुमारं शक्तिहस्तं तं मङ्गलं प्रणमाम्यहम्॥_* *_भूमिपुत्रो महातेजा जगतां भयकृत् सदा। वृष्टिकृद् वृष्टिहर्ता च पीडां हरतु मे कुजः॥_* *_सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥_* *_पद्मरागमणि कुण्डलत्विषा पाटलीकृत कपोल मस्तकम्। दिव्य हेम कदलीवनान्तरे भावयामि पवमाननन्दनम्।।_* *_!! ༺꧁ प्रभात पुष्प ꧂༻ !!_* *_☝🏻मित्रों, जो बदला जा सके "उसे बदलो," जो बदला न जा सके "उसे स्वीकारो," और जो स्वीकारा न जा सके "उससे दूर हो जाओ।" वक्त तय है, जगह तय है, घटना तय है, घटित होना तय है। जितना बेहतर तुम खो रहे हो, "उससे बेहतर तुम्हें मिलेगा।" क्रोध आए तो खुद से लड़ो, "लोगों से नहीं।" मुसीबत आए तो समय से लड़ो, "खुद से नहीं।" तुम स्वयं के लिए इतने पर्याप्त हो कि "तुम्हारे समस्त घाव तुम स्वयं ही भर सकते हो।" जो तुम्हें मिला है, वह तुम्हारी राह का "पत्थर नहीं, सीढ़ी है," हर मोड़ पर छुपा है कोई "अनकहा सबक," चुप रहना सीखो, क्योंकि शब्दों से पहले "मौन बोलता है," और जब लगे कि सब खत्म हुआ, तब "नई शुरुआत खड़ी है।" सीमाएं तय करो, दिल पर नहीं, "अपनी कमजोरियों पर," जो तुम्हें तोड़ता है, उसे छोड़ो, "वरना टूटना तय है," हर सवाल का जवाब न दो, क्योंकि कुछ सवाल "सिर्फ परीक्षा हैं," और जब खुद पर भरोसा हो, तो हर मंजिल "तेरे कदमों में है।"_*👌🏻 *_🙏🏻मंगलवार प्रातःकाल की पवित्र "मंगल बेला" में, विधाता आपको सदैव अक्षय आरोग्य, धन और ऊर्जा प्रदान करें। सुरेंद्र अरोड़ा की ओर से आपके लिए मंगलमय शुभकामनाएँ। आपके स्वास्थ्य, सफलता एवं यश-कीर्ति की असीमित दुआओं के साथ, सुमंगलम स्नेहिल भोर वंदन, मित्रों। आप एवं आपके समस्त परिवारजनों को शीतला सप्तमी की ढेरों बधाइयां और हार्दिक शुभकामनाएं।भगवान बजरंगबली जी का स्नेहिल शुभ आशीर्वाद आप सभी मित्रजनों पर सदैव बना रहे ! मस्त रहें, व्यस्त रहें, स्वस्थ रहें, समस्त पाप-कर्मों से दूर रहें, तथा "प्रकृति के प्रति एहसानमंद और कृतज्ञ बने रहें !"🙏🏻_* *_!! ┈┉❀꧁ Զเधॆ Զเधॆ ꧂❀┉┈ !!_* ☯️🕉️🌴🌾🌈☀️🌈💐🌴🕉️☯️ #🌞 Good Morning🌞