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🙏🔱🖼️ अयोध्या से कला के कैनवास तक: 22 जनवरी 2024 को राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा ने सिर्फ आध्यात्मिक उत्साह नहीं जगाया बल्कि पर्यटन, स्थानीय अर्थव्यवस्था और भीड़-प्रबंधन जैसी वैज्ञानिक-लॉजिस्टिक चुनौतियाँ भी सामने रख दीं; अब 2025 का Deepotsav 26 लाख दीयों के साथ गिनीज़ रिकॉर्ड की ओर बढ़ने का इरादा दिखा रहा है — ये धार्मिक उत्सव सामुदायिक ऊर्जा, इन्फ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा-प्रबंधन (जल, बिजली, सुरक्षा) के समन्वय पर निर्भर होते हैं। 🔱 त्रिशूल का प्रतीक (शिव-आइकॉनोग्राफी) तीन गुणों—सृजन, पालन, विनाश—का संतुलन बताता है; प्रतीकों का यह त्रिकालीय अर्थ समाज में नैतिक संतुलन और रीति-रिवाजों को संरचित करता है जो मनोवैज्ञानिक रूप से पैटर्न-आधारित मान्यता और सामूहिक पहचान बनाता है। 🖼️ पारंपरिक कलाएँ जैसे मधुबनी और तंजौर अपनी प्राकृतिक रंगरति, उच्च कॉन्ट्रास्ट और दोहराव वाले पैटर्न से दृश्य ध्यान को तुरंत खींचती हैं — neuroscience के हिसाब से उच्च कंट्रास्ट और रिपीट पैटर्न याददाश्त और शेयर-योग्यता बढ़ाते हैं, इसलिए ये कला सोशल मीडिया और सांस्कृतिक संरक्षण दोनों में शक्तिशाली है। “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन” — कर्म पर ध्यान और फल की आस-त्याग का यह संदेश धर्म, कला और समाज में संतुलन का सशक्त हुक (hook) है। #अयोध्या #RamMandir #Deepotsav2025 #त्रिशूल #Madhubani #Tanjore #धर्मऔरकला
@ѕυииγ👈🙏 @@༺🔱शिवा हूं मैं🔱༻ ✺͜͡𒋨➳➫और शिवा सच्चाई का अंश ह #🙏🔱🖼️ #राणा ने विष दिया #छोड़कर अमृत विष पीने वाले बस भोले बाबा हैं #viral #---
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