गरीब, सेवक होय करि ऊतरे, इस पृथ्वी के मांहि।
जीव उधारन जगतगुरू, बार बार बलि जांहि ।।
परमात्मा कबीर साहिब जी (सेबक) दास बनकर (ऊतरे) ऊपर आकाश में अपने निवास स्थान सतलोक से गति करके उतरकर नीचे पृथ्वी के ऊपर आए। उद्देश्य बताया है कि जीवों का, काल जाल से उद्धार करने के लिए जगत गुरू बनकर आए। मैं (संत गरीबदास जी) अपने सतगुरू कबीर जी पर बार-बार बलिहारी जाऊँ।
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