जीवन मुक्ति का अर्थ है जीते जी मुक्त हो जाना। क्योंकि जो जीते जी मुक्त नहीं हुआ,
जो देह के रहते विदेह नहीं हुआ वह मृत्यु पश्चात भी मुक्त नहीं हो सकता है।
साधक को जीते जी अर्थात जीवन रहते ही मुक्ति की अभिलाषा रखनी चाहिए और उसकी सारी साधना , सेवा और पुरुषार्थ भी इसी ओर लगा होना चाहिए।।
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