शुभ संस्कृत दिवस
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sn vyas
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#शुभ संस्कृत दिवस विश्व संस्कृत दिवस 〰️〰️🌼🌼〰️〰️ #संस्कृत देवभाषा है। यह सभी भाषाओँ की जननी है । संस्कृत का तात्पर्य परिष्कृत, परिमार्जित,पूर्ण, एवं अलंकृत है। यह भाषा इन सभी विशेषताओं से पूर्ण है। यह भाषा अति परिष्कृत एवं परिमार्जित है। इस भाषा में भाषागत त्रुटियाँ नहीं मिलती हैं जबकि अन्य भाषाओँ के साथ ऐसा नहीं है। यह परिष्कृत होने के साथ-साथ अलंकृत भी है। अलंकर इसका सौंदर्य है। अतः संस्कृत को #पूर्ण_भाषा का दर्जा दिया गया है। भारत में प्रतिवर्ष श्रावणी पूर्णिमा के पावन अवसर को संस्कृत दिवस के रूप में मनाया जाता है। श्रावणी पूर्णिमा अर्थात् रक्षा बन्धन ऋषियों के स्मरण तथा पूजा और समर्पण का पर्व माना जाता है। वैदिक साहित्य में इसे श्रावणी कहा जाता था। इसी दिन गुरुकुलों में वेदाध्ययन कराने से पहले यज्ञोपवीत धारण कराया जाता है। इस संस्कार को #उपनयन अथवा उपाकर्म संस्कार कहते हैं। इस दिन पुराना यज्ञोपवीत भी बदला जाता है। ब्राह्मण यजमानों पर रक्षासूत्र भी बांधते हैं। ऋषि ही संस्कृत साहित्य के आदि स्रोत हैं इसलिए श्रावणी पूर्णिमा को ऋषि पर्व और संस्कृत दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन राज्य तथा जिला स्तरों पर संस्कृत दिवस आयोजित किए जाते हैं। इस अवसर पर संस्कृत कवि सम्मेलन, लेखक गोष्ठी, छात्रों की भाषण तथा श्लोकोच्चारण प्रतियोगिता आदि का आयोजन किया जाता है, जिसके माध्यम से संस्कृत के विद्यार्थियों, कवियों तथा लेखकों को उचित मंच प्राप्त होता है। आईये संस्कृत सीखें👇 स:-वह अहम्-मैं त्वम्-तू न-नहीं अस्ति-है कः-कौन नास्ति-नहीं है यदा-जब कदा-तब सदा-हमेशा भव-हो जाना धावति-दौड़ता है भ्रष्ट-गिरा हुआ शिष्यः-पढ़ने वाला दासः-नौकर भानुः-सूर्य गुरुः-पढ़ानेवाला बन्धुः-सम्बन्धी तवते-तेरा मम-मेरा तस्य-उसका कृपा-दया मार्गः-रास्ता कुत्र-कहां यत्र-जहां अत्र-यहां तत्र-वहां सर्वत्र-सब स्थान पर किम्-क्या तदा-तब यदि-अगर तर्हि-तो यथा-जैसे तथा-वैसे कथम्-कैसे श्वः-कल (आगामी दिन ) हृाः-कल (बिता दिन ) अद्य-आज दिवा-दिन में मध्याह्रे-दोपहर में अपि-भी च-और एकम्-एक अन्यः-दूसरा कर्म-कार्य पात्रम्-बर्तन मुखम्-मुँह नेत्रम्-आँख साभार~पं देव शर्मा💐 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️
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