Sachin Sharma
701 views •
नानी का फ़ोन - एक मार्मिक कहानी
कहानी की शुरुआत
सर्दियों की हल्की धूप कमरे में फैल रही थी। छोटे से घर में एक बूढ़ी औरत—मीरा देवी, जिसे पूरा मोहल्ला प्यार से “नानी” बुलाता था—अपने पुराने और धीमे फोन को बार-बार अनलॉक कर रही थी।
हर दिन की तरह आज भी वो इंतज़ार में थीं।
एक वीडियो कॉल… बस एक बार।
कुछ ज़्यादा नहीं चाहिए था उन्हें। बस अपनी बेटी की आवाज़, अपने नाती की हंसी… और दो मिनट की बात।
लेकिन आज फिर स्क्रीन पर वही लिखा आया—
“Call declined.”
“User busy.”
मीरा देवी मुस्कुराईं… लेकिन वो मुस्कान सिर्फ होंठों तक सिमट कर रह गई।
उन्होंने धीमी आवाज़ में खुद से कहा,
“कोई बात नहीं… शायद काम में होंगे। बाद में कर लेंगे।”
कमरे में सन्नाटा था। दीवारों पर पुराने फोटो टंगे थे — बेटियों की शादी, दामाद की मुस्कान, नाती के जन्म की तस्वीरें।
लेकिन असली जिंदगी में…
फोटोज मुस्कुराती रही।
और रिश्ते चुप होते गए।
---
नाती आरव—जिसने कभी सोचा ही नहीं था…
आरव 17 साल का लड़का था। व्यस्त अपनी दुनिया में — फोन, सोशल मीडिया, दोस्तों और पढ़ाई में।
नानी को वो बहुत प्यार करता था, लेकिन “बात बाद में कर लूँगा” कहकर अक्सर टाल देता था।
उस दिन भी जब नानी ने उसे वीडियो कॉल किया, वो एक गेम खेल रहा था।
स्क्रीन पर नाम चमका:
“Nani Calling…”
आरव ने नज़र डाली, एक सेकंड रुका…
और फौरन फोन साइड में रख दिया।
“बाद में बात कर लूँगा…” उसने खुद से कहा।
लेकिन वो ‘बाद में’ कई हफ्तों से कभी आया ही नहीं था।
---
नानी का फोन… आज कुछ अलग था
शाम तक नानी ने शायद 6–7 बार कॉल किया था।
हर बार काट दिया गया या किसी ने उठाया ही नहीं।
पर आज आरव को थोड़ा अजीब लगा।
नानी इतनी बार कॉल नहीं करती थीं।
रात को उसने मां से पूछा,
“मां, नानी ठीक तो हैं? क्यों बार-बार कॉल कर रही थीं?”
मां ने थकी आवाज़ में कहा,
“मुझे क्या पता? सुबह कॉल की थी, बोलीं कि तुमसे बात करनी है। शायद वही होगी।”
बस… बात वहीं खत्म।
पर आरव के मन में एक बेचैनी बैठ चुकी थी।
---
अगली सुबह — एक चुभता हुआ सन्नाटा
सुबह उठकर आरव ने मोबाइल देखा।
एक मिस्ड कॉल फिर दिखाई दी — रात 1:47 AM की।
“Nani Calling…”
उसके दिल की धड़कन एक पल को रुक गई।
नानी रात में क्यों कॉल करेंगी?
वो घबराहट में तुरंत नानी को कॉल करने लगा।
लेकिन फोन स्विच्ड ऑफ आ रहा था।
पहली बार उसे एहसास हुआ कि उसने कई दिनों से नानी को “जानबूझकर” इग्नोर किया है।
पहली बार उसे लगने लगा कि शायद सच में कुछ गड़बड़ है।
वो तुरंत अपनी मां के पास गया।
दोनों ने जल्दी-जल्दी तैयार होकर ऑटो लिया और नानी के घर पहुँचे।
घर का दरवाज़ा थोड़ा सा खुला हुआ था।
आरव ने धीरे से पुकारा,
“नानी…?”
कोई जवाब नहीं।
घर में अजीब सा सन्नाटा था।
मां भागती हुई अंदर गईं।
और फिर…
एक पल जो कभी भुलाया नहीं जा सकता।
मीरा देवी अपने कुर्सी पर ही सोई हुई थीं।
उनके हाथ में फोन था।
स्क्रीन पर वही—अधूरी वीडियो कॉल।
उनकी सांसे… रुक चुकी थीं।
कमरे में पड़ोसन खड़ी थी। वो बोली,
“रात में प्रकॉप हुआ होगा… उन्होंने कई बार किसी को फोन करने की कोशिश भी की थी।”
आरव वहीं बैठ गया।
उसकी आंखों से आंसू रुक नहीं रहे थे।
उसे अचानक याद आया —
रात 1:47 की मिस्ड कॉल…
दिनभर के ignored calls…
और वो एक सेकंड जिसमें उसने गेम खेलते हुए नानी की कॉल काट दी थी।
उसे ऐसे लगा जैसे किसी ने उसके सीने पर पत्थर रख दिया हो।
---
नानी की आखिरी लिखी हुई पर्ची
घर साफ करते समय आरव को मेज के नीचे एक छोटी सी मुड़ी हुई पर्ची मिली।
लिखा था:
> “आरव, तुम्हारी बोर्ड परीक्षा है…
बस दो मिनट तुमसे बात करनी थी।”
और नीचे
“अपना ख्याल रखना — नानी।”
आरव टूटकर रो पड़ा।
उसे एहसास हुआ कि नानी अकेली थीं…
और वो हमेशा सोचता रहा कि
“बाद में बात कर लूंगा।”
---
आज भी जब फोन बजता है…
अब वो हर कॉल उठाता है।
अपनी मां की, अपनी मौसी की, अपने पापा की, हर किसी की।
क्योंकि उसे समझ आ चुका था कि
एक दिन…
हर फोन आखिरी फोन बन सकता है।
और पछतावे की आग जिंदगी भर जलाती है।
---
कहानी का संदेश
हम अक्सर सोचते हैं कि
“बाद में कर लूंगा…”
“अभी काम है…”
“फुर्सत में कॉल कर दूंगा…”
पर बूढ़े माता-पिता, नानी-दादी, दादा-नाना…
ये लोग जल्दी नाराज़ नहीं होते,
लेकिन हर मिस्ड कॉल के पीछे एक उम्मीद टूट जाती है।
थोड़ा सा वक्त…
2 मिनट…
एक “हाँ नानी, कैसी हो?”
बस इतना काफी होता है किसी बूढ़े दिल के लिए।
---
तो दोस्तों अगर आपको मेरी लिखी हुई यह कहानी पसंद आई है, तो कृपया मुझे Follow जरूर करें 🙏
कहानी अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के पास जरूर भेजें 🙏
---
#📚कविता-कहानी संग्रह #📓 हिंदी साहित्य #👀रोमांचक कहानियाँ 🕵️♂️ #⭐ प्रेरणादायक कहानियां #☝अनमोल ज्ञान
12 likes
11 shares