விழிப்புணர்வு பதிவு
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महिला जननांग विकृति के खिलाफ शून्य सहनशीलता आज दुनियाभर में महिला जननांग विकृति के खिलाफ शून्य सहनशीलता का अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाया जा रहा है। इसे पहली बार 6 फरवरी, 2003 ई को मनाया गया था। इसके बाद से हर साल 6 फरवरी को महिला जननांग विकृति के खिलाफ शून्य सहनशीलता का अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य महिला जननांग विकृति कुप्रथा को जड़ से समाप्त करना और लोगों में महिलाओं के प्रति जननांग विकृति कुप्रथा को जड़ से समाप्त करना और लोगों में महिलाओं के प्रति सम्मान और स्नेह पैदा करना है। दुनिया के कई देशों में यह कुप्रथा जारी है। खासकर अफ्रीका महादेश में सबसे अधिक है। इसके लिए यह निर्धारित किया गया है कि 2030 तक महिला जननांग विकृति कुप्रथा को समाप्त किया जाए। इसकी शुरुआत नाइजीरिया की पूर्व राष्ट्रपति और महिला जननांग विकृति के खिलाफ शून्य सहनशीलता चलाने वाली अभियान की प्रवक्ता Stella Obasanjo ने की। जब उन्होंने 6 फरवरी, 2003 को महिला जननांग विकृति के खिलाफ शून्य सहनशीलता दिवस मनाने की घोषणा की। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी इसे स्वीकार किया। इसके लिए 2007 में संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) और संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने महिला जननांग विकृति उत्पीड़न के खिलाफ संयुक्त अभियान चलाया था। साथ ही सन 2012 ई में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने एक प्रस्ताव पारित कर 6 फरवरी को महिला जननांग विकृति के खिलाफ शून्य सहनशीलता का अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित कर दिया। #जागरूकता दिवस
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विश्व कैंसर दिवस विश्व कैंसर दिवस 4 फरवरी को कैंसर के बारे में जागरूकता बढ़ाने और इसकी रोकथाम, पहचान और उपचार को प्रोत्साहित करने के लिए मनाया जाता है। विश्व कैंसर दिवस, 2008 में लिखे गए विश्व कैंसर घोषणा के लक्ष्यों का समर्थन करने के लिए यूनियन फॉर इंटरनेशनल कैंसर कंट्रोल (यूआईसीसी) के नेतृत्व में कार्यरत है। विश्व कैंसर दिवस का प्राथमिक लक्ष्य कैंसर और बीमारी के कारण होने वाली मौतों को कम करना है। बहुत से लोग कैंसर को दूर करने के लिए आध्यात्मिकता का भी सहारा लेते हैं। साल 1933 में इस दिन को मनाने की शुरुआत हुई थी और इसके पीछे ये उद्देश्य रहता है कि लोगों को इस बीमारी और इससे बचने के तरीकों को लेकर जागरूक किया जा सके। कैंसर कोई आम बीमारी नहीं है, बल्कि ये एक गंभीर बीमारी है। कई लोग इससे जंग जीत जाते हैं, तो कई लोग जिंदगी की रेस में हार भी जाते हैं और इस बीमारी के कारण उनकी जान चली जाती है। कैंसर भी कई तरह के होते हैं। इनमें स्तन कैंसर, सर्वाइकल कैंसर, पेट का कैंसर, ब्लड कैंसर, गले का कैंसर, गर्भाशय का कैंसर, अंडाशय का कैंसर, प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) कैंसर, मस्तिष्क का कैंसर, लिवर (यकृत) कैंसर, बोन कैंसर, मुंह का कैंसर और फेफड़ों का कैंसर शामिल है। #जागरूकता दिवस
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विश्व कुष्ठ दिवस हर साल 30 जनवरी को विश्व कुष्ठ रोग दिवस मनाया जाता है। गांधी जी बेहद दयालु प्रवृति के व्यक्ति थे। उन्हें समाज के सभी वर्गों के लोगों से बराबर स्नेह था। खासकर रोगियों के प्रति उनके मन में बेहद प्यार और दुलार था। गांधी जी छूआछूत के खिलाफ थे। उनका मानना था कि छूआछूत से समाज में असमानता फैलती है। राष्ट्रपति महात्मा गांधी ने कुष्ठ रोगियों को समाज की मुख्य धारा से जोडऩे के लिए सफल प्रयास किया। इसके चलते उनकी पुण्यतिथि पर विश्व कुष्ठ रोग दिवस मनाया जाता है। समाजसेवी ने की थी। अगर आपको नहीं पता है, तो आइए विश्व कुष्ठ रोग दिवस के बारे में सब कुछ जानते हैं- जैसा कि हम सब जानते हैं कि विश्व कुष्ठ रोग दिवस हर साल 30 जनवरी को मनाया जाता है। इसे मनाने का मुख्य उद्देश्य सत्य और अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि देना और लोगों को कुष्ठ रोग के प्रति जागरूक करना है। कुष्ठ रोग दिवस मनाने की शुरुआत राउल फोलेरो ने सन 1954 ई में की शुरुआत की। उन्होंने (गांधी जी के कुष्ठ रोगियों के प्रति दया और स्नेह) यह दिवस गांधी जी को समर्पित किया है। यह एक जीर्ण संक्रमण रोग है। इससे त्वचा, श्वसन तंत्र, आंखें और तंत्रिकाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। यह बीमारी मायकोबैक्टीरियम लैप्री नामक जीवाणु के चलते होती है। आधुनिक समय में इसका टीका उपलब्ध है। अतः कुष्ठ रोग अब संक्रामक नहीं है। हालांकि, मरीज के लगातार संपर्क में बने रहने से संक्रमित होने का खतरा बढ़ जाता है। इसके लिए कुष्ठ रोग के मरीजों को टीका लेना चाहिए। वहीं, मरीज के आगुंतकों को भी आवश्यक सावधानियां जरूर बरतनी चाहिए। पूर्व में कुष्ठ रोग के प्रति ऐसा मत था कि यह रोग छूने से फैलती है। यह सरासर गलत और भ्रामक है। #जागरूकता दिवस
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