விழிப்புணர்வு பதிவு
649 Posts • 4M views
विश्व कैंसर दिवस विश्व कैंसर दिवस 4 फरवरी को कैंसर के बारे में जागरूकता बढ़ाने और इसकी रोकथाम, पहचान और उपचार को प्रोत्साहित करने के लिए मनाया जाता है। विश्व कैंसर दिवस, 2008 में लिखे गए विश्व कैंसर घोषणा के लक्ष्यों का समर्थन करने के लिए यूनियन फॉर इंटरनेशनल कैंसर कंट्रोल (यूआईसीसी) के नेतृत्व में कार्यरत है। विश्व कैंसर दिवस का प्राथमिक लक्ष्य कैंसर और बीमारी के कारण होने वाली मौतों को कम करना है। बहुत से लोग कैंसर को दूर करने के लिए आध्यात्मिकता का भी सहारा लेते हैं। साल 1933 में इस दिन को मनाने की शुरुआत हुई थी और इसके पीछे ये उद्देश्य रहता है कि लोगों को इस बीमारी और इससे बचने के तरीकों को लेकर जागरूक किया जा सके। कैंसर कोई आम बीमारी नहीं है, बल्कि ये एक गंभीर बीमारी है। कई लोग इससे जंग जीत जाते हैं, तो कई लोग जिंदगी की रेस में हार भी जाते हैं और इस बीमारी के कारण उनकी जान चली जाती है। कैंसर भी कई तरह के होते हैं। इनमें स्तन कैंसर, सर्वाइकल कैंसर, पेट का कैंसर, ब्लड कैंसर, गले का कैंसर, गर्भाशय का कैंसर, अंडाशय का कैंसर, प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) कैंसर, मस्तिष्क का कैंसर, लिवर (यकृत) कैंसर, बोन कैंसर, मुंह का कैंसर और फेफड़ों का कैंसर शामिल है। #जागरूकता दिवस
6 likes
15 shares
।विश्व आर्द्रभूमि दिवस पूरी दुनिया में 2 फरवरी को विश्व आर्द्रभूमि दिवस (World Wetland Day) के रूप में मनाया गया। गौरतलब है कि आर्द्रभूमि दिवस का आयोजन लोगों और हमारे ग्रह के लिये आर्द्रभूमि की महत्त्वपूर्ण भूमिका के बारे में वैश्विक जागरूकता बढ़ाने के लिये किया जाता है। नमी या दलदली भूमि वाले क्षेत्र को आर्द्रभूमि या वेटलैंड (Wetland) कहा जाता है। दरअसल, वेटलैंड्स वैसे क्षेत्र हैं जहाँ भरपूर नमी पाई जाती है और इसके कई लाभ भी हैं। आर्द्रभूमि जल को प्रदूषण से मुक्त बनाती है। आर्द्रभूमि वह क्षेत्र है जो वर्ष भर आंशिक रूप से या पूर्णतः जल से भरा रहता है। भारत में आर्द्रभूमि ठंडे और शुष्क इलाकों से लेकर मध्य भारत के कटिबंधीय मानसूनी इलाकों और दक्षिण के नमी वाले इलाकों तक फैली हुई है। ♦ वेटलैंड्स को बायोलॉजिकल सुपर-मार्केट कहा जाता है, क्योंकि ये विस्तृत भोज्य-जाल (Food-Webs) का निर्माण करते हैं। ♦ फूड-वेब्स यानी भोज्य-जाल में कई खाद्य श्रृंखलाएँ शामिल होती हैं और ऐसा माना जाता है कि फूड-वेब्स पारिस्थितिक तंत्र में जीवों के खाद्य व्यवहारों का वास्तविक प्रतिनिधित्व करते हैं। #जागरूकता दिवस
11 likes
12 shares
राष्ट्रीय बालिका दिवस हर साल 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाने की शुरुआत साल 2009 में महिला बाल विकास मंत्रालय ने की थी. 24 जनवरी का दिन इसलिए चुना गया क्योंकि इसी दिन साल 1966 में इंदिरा गांधी ने भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली थी। राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाए जाने का उद्देश्य समाज में बालिकाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरुक करना है. साथ ही उनके साथ होने वाले भेदभाव के प्रति भी लोगों को जागरुक करना है. इस दिन राज्य सरकारों की ओर से कई जागरुक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है। बालिका दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों में जागरूकता पैदा करना है, ताकि लड़के और लड़की में किया जाने वाला भेदभाव खत्म हो। गैरकानूनी होने के बावजूद आज भी हमारे देश में लिंग परीक्षण और भ्रूण हत्या के मामले काफी ज्यादा हैं। हमारे समाज में कई मौकों पर कन्या पूजन होता है। लेकिन बेटी पैदा होने पर कई लोगों का मुंह उतर जाता है। वहीं, बेटे के जन्म पर 'सोहर' और जश्न होता है। यह स्थिति देश के करीब-करीब सभी हिस्सों में है। हरियाणा और राजस्थान के हालात तो वहां के लिंगानुपात ही बयान कर देते हैं। लड़कियों को समाज में तरह की कुरीतियां हैं। सरकार राष्ट्रीय बालिका दिवस के माध्यम से उन कुरीतियों को दूर करने की कोशिश कर रही है। #जागरूकता दिवस
14 likes
10 shares