विश्व-आत्मकेंद्रित-जागरुकता-दिवस

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सुशील मेहता
2K views 4 days ago
International zero waste day दिसंबर 14, 2022 को, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने शून्य कचरे कार्यक्रम के महत्व को स्वीकार करते हुए घोषणा की कि 2023 से हर साल 30 मार्च को शून्य कचरे के अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाया जाएगा। शून्य कचरे के अंतर्राष्ट्रीय दिवस से दुर्व्यवहार के सतत उत्पादन व प्रथाओं को बढ़ावा मिलेगा और 2030 के विकास के लक्ष्य प्राप्त करने में शून्य कचरे के प्रयासों की महत्ता की समझ बढ़ेगी। संयुक्त राष्ट्र ने डेटा प्रदान किया है जिससे स्पष्ट होता है कि प्रति वर्ष लगभग 2.24 अरब टन नगरीय कचरा उत्पन्न होता है, जिसमें से केवल 55% इसे प्रबंधित संचालित सुविधाओं में फेंका जाता है। साथ ही, लगभग 931 मिलियन टन खाद्य वर्षावधि में खो जाता है या बेकार हो जाता है, और समुद्री पारिस्थितिकी में हर वर्ष लगभग 14 मिलियन टन प्लास्टिक कचरा दाखिल होता है। हर साल 30 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय शून्य कचरे दिवस को मनाना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बताता है कि कचरे को कम करने और टिकाऊ उत्पादन और उपभोग नीतियों को बढ़ावा देने की महत्वपूर्णता क्या है। यह दिवस लोगों को उन तरीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करता है जो कचरे को कम करते हैं, सामग्री को फिर से उपयोग करते हैं और उत्पन्न होने वाले कचरे की मात्रा को कम करते हैं। यह दिन पर्यावरण पर कचरे के नकारात्मक प्रभावों, जैसे भूमि के भरे खेत, प्रदूषण और संसाधन की कमी के बारे में जागरूकता बढ़ाने का एक मौका प्रदान करता है। इसका उद्देश्य 2030 के लिए स्थायी विकास के लक्ष्यों को बढ़ावा देना है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र द्वारा बनाए गए लक्ष्य 11 और 12 शामिल हैं, जो शहरों और समुदायों को अधिक टिकाऊ बनाने और जवाबदेह उपभोग और उत्पादन को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखते हैं। शून्य कचरे के अंतर्राष्ट्रीय दिवस पर सदस्य देश, संयुक्त राष्ट्र संगठन, सिविल समाज, निजी कंपनियां, शैक्षणिक संस्थान, युवा और अन्य हितधारकों को राष्ट्रीय, अवधारणात्मक, क्षेत्रीय और स्थानीय शून्य कचरे पहलों की जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से गतिविधियों में भाग लेने की प्रोत्साहना की जाती है। शून्य कचरे के अंतर्राष्ट्रीय दिवस के अनुदेशक यूएनपी और यूएन-हैबिटेट होते हैं। यह अंतर्राष्ट्रीय दिवस संबंधित सभी परिकल्पनाओं और लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए सेवा करता है, जिसमें संबंधित हैं संवृद्धि के लक्ष्य 11 और 12, जो खाद्य कचरा, प्राकृतिक संसाधनों का उपचय और इलेक्ट्रॉनिक कचरे जैसे सभी प्रकार के कचरे से निपटने के लिए शून्य कचरे पहलों को बढ़ावा देते हुए। #जागरूकता दिवस
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सुशील मेहता
566 views 10 days ago
विश्व टीबी जागरूकता दिवस विश्व टीबी या तपेदिक दिवस हर साल 24 मार्च को मनाया जाता है, क्योंकि 24 मार्च, 1882 को जर्मन फिजिशियन और माइक्रोबायोलॉजिस्ट रॉबर्ट कॉच ने टीबी के बैक्टीरियम यानी जीवाणु माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस (Mycobacterium Tuberculosis) की खोज की थी. उनकी यह खोज आगे चलकर टीबी के निदान और इलाज में बहुत मददगार साबित हुई. इस योगदान के लिए इस जर्मन माइक्रोबायोलॉजिस्ट को 1905 में नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया. यही वजह है कि हर साल विश्व स्वास्थ्य संगठन टीबी के सामाजिक, आर्थिक और सेहत के लिए हानिकारक नतीजों पर दुनिया में उद्देश्य दुनिया में टीबी की बीमारी के लिए लोगों को अवेयर करने के साथ ही इसकी रोकथाम करने से है. यही वजह है कि विश्व टीबी दिवस के मौके पर जागरूकता अभियान चलाने के साथ ही कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। टीबी को आमतौर पर एक संक्रामक रोग माना जाता है, लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हर टीबी संक्रामक नहीं होती है. दरअसल टीबी दो तरह की होती है, पल्मोनरी टीबी और एक्सट्रा पल्मोनरी टीबी. पल्मोनरी टीबी फेफड़ों को प्रभावित करती है, जबकि एक्सट्रा पल्मोनरी टीबी शरीर के दूसरे अंगों में होती है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक पल्मोनरी टीबी संक्रामक होती है. ये रोगी के जरिए दूसरे लोगों को भी संक्रमित करती है, जबकि एक्सट्रा पल्मोनरी टीबी के मरीजों से दूसरे लोगों को संक्रमण का खतरा नहीं होता. चूंकि करीब 70 फीसदी मरीज पल्मोनरी टीबी के शिकार होते हैं, इसलिए ये आम धारणा बन गई है कि टीबी संक्रामक होती है. फीसदी मरीज पल्मोनरी टीबी के शिकार होते हैं, इसलिए ये आम धारणा बन गई है कि टीबी संक्रामक होती है। #जागरूकता दिवस
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