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Kripya Andhbhakt Dur Rahe
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बाबा बने तो आस्था, अंबेडकर बने तो FIR — ये कैसी दोहरी नीति सरकार की? जब कोई ढोंगी बाबा लाखों की भीड़ इकट्ठा करे, चमत्कार के नाम पर अंधविश्वास फैलाए, लोगों की जेब और दिमाग दोनों लूटे — तो वो “संस्कृति का रक्षक” कहलाता है। लेकिन जब कोई डॉ. अंबेडकर की तस्वीर उठाकर बराबरी, शिक्षा और अधिकार की बात करे — तो वही सरकार कहती है: “कानून व्यवस्था को खतरा है।” क्या खतरा बाबा से नहीं, जो इंसान को भगवान बना देता है? खतरा उस सोच से है जो इंसान को इंसान बनाती है? संविधान ने हमें सवाल पूछने का हक दिया है, डरकर चुप रहने का नहीं। अगर सवाल पूछना अपराध है, तो चुप रहना देशभक्ति कैसे हो गया? आज FIR किसी अंबेडकरवादी पर है, कल किसी किसान पर होगी, परसों किसी छात्र पर। क्योंकि जब सत्ता को सवाल से डर लगने लगे, तो वो कानून नहीं, डंडे से शासन करती है। ये लड़ाई किसी जाति की नहीं, किसी धर्म की नहीं, ये लड़ाई है — सच बनाम सत्ता की मनमानी की। याद रखिए — जिस दिन बाबा कानून से ऊपर हो जाए और नागरिक कानून से नीचे, उस दिन लोकतंत्र मर जाता है। #📢 ताज़ा खबर 🗞️ #🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान #Kripya Andhbhakt Dur Rahe
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