*सामने आई एक बड़ी रिपोर्ट ने देश को हिला दिया है। 10 अक्टूबर से 14 नवंबर 2025 के बीच MGNREGS के डेटाबेस से करीब 27 लाख मजदूरों के नाम गायब कर दिए गए — और वजह सुनकर किसी की भी आंखें चौंधिया जाएँ।*
ये सब नाम घोस्ट वर्कर, यानी ऐसे भूतिया कर्मचारी थे जिनका जमीन पर कोई अस्तित्व ही नहीं था।
यह सफाई तब हुई जब योजना में e-KYC अनिवार्य किया गया। जैसे ही बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन शुरू हुआ, फर्जी जॉब कार्डों का पूरा गैंग नंगा हो गया। नए रजिस्ट्रेशन की तुलना में हटाए गए नाम लाखों गुना ज़्यादा हैं, जिससे ग्रामीण रोजगार के आँकड़े गिर गए और सालों से बैठे भ्रष्ट नेटवर्क की चूहेदौड़ उजागर हो गई।
इस पर अब ज़बरदस्त राजनीति गरम है। कई लोग कह रहे हैं कि ये दशकों पुरानी कांग्रेस-प्रायोजित लूट का खुलासा है। कुछ लोग इसे सिस्टम की गलती बताकर बचाव की कोशिश कर रहे हैं, मगर रिकॉर्ड साफ है—लाखों “मज़दूर” असल में बनाए ही गए थे ताकि सरकारी पैसा बंट सके।
वैसे भी, मोदी सरकार आने के बाद अलग-अलग राज्यों में फर्जी कर्मचारियों, नकली वेतन बिलों और कैश-फॉर- job जैसे घोटालों का पर्दाफाश होता ही रहा है। मध्य प्रदेश का ₹230 करोड़ वाला पे-स्कैम इसका बड़ा उदाहरण है।
पहले यह पैसा कैश में उड़ाया जाता था। मोदी सरकार ने पेमेंट बैंक खातों में किया। और जैसे ही बैंकों ने KYC से क्रॉस-चेक किया—जगह अलग, फोटो किसी और की, नाम किसी तीसरे का! लाखों “मजदूर” हवा में गायब!
अंदाज़ा लगाइए—यह खेल कुल मिलाकर 10 लाख करोड़ से ज्यादा का है।
अब समझो कि मोदी सरकार से किसे दिक्कत है? वही लोग जिनकी रोज़ की चोरी बंद हो गई।
और हाँ… सोनिया गांधी जी को कोई बता दे, कि इस बार मामला छोटा-मोटा नहीं है — हवा साफ हो रही है, और अब शायद इटली की टिकट ही आखिरी रास्ता बचा है।
क्योंकि बकरे की माँ कब तक खैर मनाएगी? *(PC- CA Rajiv Chandak
#🔴राजनीति ट्रेंड्स #🌐 राष्ट्रीय अपडेट #🗞️पॉलिटिकल अपडेट #📢BMC चुनाव में बीजेपी को बहुमत🙏 #पश्चिम बंगाल चुनाव 2026