मेरी कविता

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महंगाई के आगे टेके घुटने, कर दिया है खुद को सरेंडर। कल तक था महंगा पेट्रोल, आज महंगा हुआ सिलेंडर। व्यंजन बनाना और खाना, होगा सिर्फ घर के अंदर। नुक्कड के ढाबे ठेलों की, लाइन हो जाएगी छूमंतर। खा लो घर की सब्जी पूरी, बीवी को समझो सिकंदर। मजे से खाओ दाल रोटी, बन जाओ मस्त कलंदर। ✍🏻सुमित मानधना 'गौरव'😎 #📚कविता-कहानी संग्रह #kavita #कविता #trending
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Mahendra Narayan
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समरसता की चाँदनी, खिले जहाँ चहुँ ओर I मानवता ग्रसती नही, अमा - निशा की भोर ॥ #📚कविता-कहानी संग्रह #✍मेरे पसंदीदा लेखक #कविता #👍📝 हिन्दी साहित्य 💐🌹 अधूरे अल्फाज 🌺 #📗प्रेरक पुस्तकें📘
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