राणा उदय सिंह (द्वितीय) मेवाड़ के महाराणा थे और उन्हें उदयपुर शहर की स्थापना के लिए जाना जाता है। उनका जन्म 1522 में हुआ था और वे महाराणा सांगा और रानी कर्णावती के चौथे पुत्र थे। उनके जीवन की कुछ प्रमुख घटनाएँ इस प्रकार हैं:
बचपन में संघर्ष: राणा सांगा की मृत्यु के बाद उनके सौतेले भाई बनवीर ने उदय सिंह को मारने की कोशिश की। लेकिन पन्ना धाय नामक उनकी धाय माँ ने अपने पुत्र का बलिदान देकर उदय सिंह की जान बचाई और उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले गईं।
राज्याभिषेक और शासन: 1540 में मेवाड़ के सरदारों ने कुंभलगढ़ में उनका राज्याभिषेक किया। उन्होंने बनवीर को हराकर चित्तौड़ पर अधिकार किया और मेवाड़ के महाराणा बने।
उदयपुर की स्थापना: 1559 में उन्होंने अरावली पहाड़ियों के बीच एक सुरक्षित स्थान पर उदयपुर शहर की स्थापना की और उसे अपनी नई राजधानी बनाया।
चित्तौड़ का तीसरा साका: 1567 में जब अकबर ने चित्तौड़ पर हमला किया, तो उदय सिंह ने अपने सरदारों की सलाह पर किले की जिम्मेदारी जयमल और पत्ता को सौंप दी और स्वयं मेवाड़ के पहाड़ों में चले गए। इस युद्ध में जयमल और पत्ता ने वीरतापूर्वक लड़ते हुए अपने प्राणों की आहूति दी, जिसे चित्तौड़ का तीसरा साका कहा जाता है।
राणा उदय सिंह का 1572 में निधन हो गया। उनके बाद उनके बड़े पुत्र महाराणा प्रताप ने मेवाड़ की बागडोर संभाली।
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