भगवान वराह जयंती
भगवान विष्णु के तीसरे अवतार, भगवान वराह, को समर्पित एक महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार है। यह जयंती हर साल भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है, जो आमतौर पर अगस्त या सितंबर के महीने में पड़ती है।
भगवान वराह का महत्व
हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, हिरण्याक्ष नामक एक शक्तिशाली असुर ने पृथ्वी को चुराकर समुद्र की गहराइयों में छुपा दिया था। पृथ्वी को बचाने के लिए, भगवान विष्णु ने वराह (जंगली सूअर) का रूप धारण किया। उन्होंने अपने विशाल दांतों पर पृथ्वी को उठाया और हिरण्याक्ष का वध करके उसे वापस उसके स्थान पर स्थापित किया।
यह अवतार भगवान विष्णु की शक्ति, पराक्रम और सृष्टि को बचाने की उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
भगवान वराह जयंती कैसे मनाई जाती है?
इस दिन भक्त उपवास रखते हैं और भगवान वराह की पूजा-अर्चना करते हैं। मंदिरों और घरों में विशेष पूजा और आरती का आयोजन किया जाता है। लोग मंत्रों का जाप करते हैं और भगवान विष्णु के भजन गाते हैं। कई जगहों पर भागवत पुराण का पाठ भी किया जाता है, जिसमें भगवान वराह की कथा का वर्णन है।
यह पर्व हमें बुराई पर अच्छाई की विजय और धर्म की रक्षा का संदेश देता है।
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