महान समाज सुधारक एवं स्वराज के प्रणेता लोकमान्य बालगंगाधर तिलक जी की 105 वी पुण्यतिथि पर मैं आपको कोटिश: नमन तथा विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।देशभक्त बालगंगाधर तिलक जी ने नारा दिया था कि "स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा"।आप आधुनिक भारत के पहले राजनीतिक नेता थे जिन्होंने ब्रिटिश शासन के प्रति अपने व्यक्तिगत विरोध को राष्ट्रीय आंदोलन में बदलकर भारत की स्वतंत्रता की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।बालगंगाधर तिलक जी दादाभाई नौरोजी को अपना राजनीतिक गुरु मानते थे।बाल गंगाधर तिलक ने दो समाचार पत्र शुरू किए थे: केसरी और मराठा। केसरी मराठी भाषा में था,और मराठा अंग्रेजी भाषा में।अखिल भारतीय होम रूल लीग, एक राष्ट्नीतिक संगठन था जिसकी स्थापना 1916 में बाल गंगाधर तिलक द्वारा भारत में स्वशासन के लिए राष्ट्रीय मांग का नेतृत्व करने के लिए "होम रूल" के नाम के साथ की गई थी।भारत को ब्रिटिश राज में एक डोमिनियन का दर्जा प्राप्त करने के लिए ऐसा किया गया था।बाल गंगाधर तिलक अपनी राष्ट्र भक्ति, देश के प्रति अपने अथक त्याग व बलिदान के लिए जाने जाते हैं।आप के काल में कोई दूसरा ऐसा नेता नहीं था जिसे जनता आप से अधिक प्यार करती हो।जनता आप को 'लोकमान्य' कहकर पुकारती थी।ब्रिटिश अधिकारियों ने बाल गंगाधर तिलक को भारतीय अशांति का जनक कहा था।वैलेंटाइन चिरोल एक प्रमुख ब्रिटिश पत्रकार थे।आप ने बाल गंगाधर तिलक को "भारतीय अशांति का जनक" की उपाधि दी थी।उग्रवादी नेता बाल गंगाधर तिलक स्वामी विवेकानंद को अपना राजनीतिक गुरु मानते हैं।आप 1905 ई के बंगाल विभाजन के बाद स्वदेशी आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल थे और आप ने आयातित वस्तुओं के बहिष्कार और स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग को बढ़ावा दिया।आप भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के गरम दल के नेता थे।1908 में लोकमान्य तिलक ने क्रान्तिकारी प्रफुल्ल चाकी और क्रान्तिकारी खुदीराम बोस के बम हमले का समर्थन किया जिसकी वजह से उन्हें बर्मा (अब म्यांमार) स्थित मांडले की जेल भेज दिया गया।जेल से छूटकर वे फिर कांग्रेस में शामिल हो गये और 1916 में एनी बेसेंट जी के समकालीन होम रूल लीग की स्थापना की।इस आन्दोलन का मुख्य उद्देश्य भारत में स्वराज स्थापित करना था।इसमें चार या पांच लोगों की टुकड़ियां बनाई जाती थी जो पूरे भारत में बड़े-बड़े राजनेताओं और वकीलों से मिलकर 'होम रूल लीग' का मतलब समझाया करते थे।एनी बेसेंट,जो आयरलैंड से भारत आई हुई थीं,उन्होंने वहां पर होमरूल लीग जैसा प्रयोग देखा था,उसी तरह का प्रयोग उन्होंने भारत में करने का सोचा।आप ने जनजागृति का कार्यक्रम पूरा करने के लिए महाराष्ट्र में गणेश उत्सव तथा शिवाजी उत्सव सप्ताह भर मनाना प्रारंभ किया।सन 1919 ई. में कांग्रेस की अमृतसर बैठक में हिस्सा लेने के लिये स्वदेश लौटने के समय तक लोकमान्य तिलक इतने नरम हो गये थे कि उन्होंने मॉन्टेग्यू-चेम्सफ़ोर्ड सुधारों के द्वारा स्थापित लेजिस्लेटिव कौंसिल (विधायी परिषद) के चुनाव के बहिष्कार की गान्धी जी की नीति का विरोध ही नहीं किया इसके बजाय लोकमान्य तिलक ने क्षेत्रीय सरकारों में कुछ हद तक भारतीयों की भागीदारी की शुरुआत करने वाले सुधारों को लागू करने के लिये प्रतिनिधियों को यह सलाह अवश्य दी कि वे उनके प्रत्युत्तरपूर्ण सहयोग की नीति का पालन करें लेकिन नये सुधारों को निर्णायक दिशा देने से पहले ही 1 अगस्त,1920 ई. को बम्बई में आप की मृत्यु हो गयी।मरणोपरान्त श्रद्धाञ्जलि देते हुए गान्धी जी ने आप को आधुनिक भारत का निर्माता कहा और जवाहरलाल नेहरू ने भारतीय क्रान्ति का जनक बतलाया।आप का देश की आजादी के लिए किया गया संघर्ष हम भारतवासियो को आजीवन प्रेरित करता रहेगा तथा हमेशा हम सभी को नई ऊर्जा देगा।🥲शत् शत् नमन🥲🇮🇳🇮🇳🇮🇳🙏
#🌞 Good Morning🌞 #👍 डर के आगे जीत👌 #🥰मोटिवेशन वीडियो #🙌 Never Give Up #लोकमान्य बालगंगाधर तिलक जी की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि