⛰️ अरावली पर्वतमाला का इतिहास (Aravali Parvat History in Hindi)
अरावली पर्वतमाला भारत की ही नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे प्राचीन पर्वतमालाओं में से एक है। इसका निर्माण लगभग 250 करोड़ वर्ष पहले हुआ था — जब धरती अभी जीवन के प्रारंभिक चरण में थी।
📜 1️⃣ भूवैज्ञानिक इतिहास (Geological History)
अरावली का निर्माण
➡️ Archaean Era (आर्कियन काल) में हुआ
➡️ हिमालय से भी कई गुना पुरानी है
जब अफ्रीका और भारत एक ही महाद्वीप (Gondwana) का हिस्सा थे, तब अरावली बनी थी।
कभी ये पर्वत हिमालय जितने ऊँचे थे, लेकिन करोड़ों वर्षों की घिसाई (erosion) से ये आज छोटी पहाड़ियाँ बन गए।
🏜️ 2️⃣ रेगिस्तान को रोकने वाली दीवार
अरावली पर्वतमाला आज भी राजस्थान के थार रेगिस्तान को हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में फैलने से रोकती है।
अगर अरावली न होती तो — ➡️ दिल्ली
➡️ गुरुग्राम
➡️ आगरा
➡️ पश्चिमी UP
सब रेगिस्तान बन चुके होते।
🏹 3️⃣ अरावली और प्राचीन सभ्यताएँ
अरावली क्षेत्र में:
भील
मीणा
गुर्जर
राजपूत
जैसी प्राचीन जनजातियाँ और योद्धा जातियाँ पनपीं।
इन्हीं पहाड़ों में महाराणा प्रताप ने मुगलों के विरुद्ध गुरिल्ला युद्ध लड़ा।
🏰 4️⃣ ऐतिहासिक किले
अरावली पर स्थित प्रमुख दुर्ग:
चित्तौड़गढ़
कुंभलगढ़
रणथंभौर
आमेर किला
अलवर किला
ये पहाड़ियाँ भारत की रक्षा दीवार थीं।
🛕 5️⃣ धार्मिक महत्व
अरावली में स्थित:
माउंट आबू
दिलवाड़ा जैन मंदिर
एकलिंग जी मंदिर
हजारों साल से आध्यात्मिक केंद्र रहे हैं।
⚠️ 6️⃣ आज का संकट
आज अरावली को:
खनन
अवैध कटाई
रियल एस्टेट
नष्ट कर रहे हैं।
यदि अरावली खत्म हुई — ➡️ दिल्ली 40°C से ऊपर
➡️ जल संकट
➡️ धूल भरी आँधियाँ
➡️ खेती तबाह
🌍 निष्कर्ष
अरावली केवल पहाड़ नहीं, भारत की जलवायु ढाल है।
यह हमारी सांसों, बारिश और भविष्य की रक्षा करती है।
"हिमालय भारत का मुकुट है,
लेकिन अरावली भारत की ढाल है।"
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