राधे - राधे ॥ आज का भगवद् चिन्तन ॥
30 - 11 - 2025
🪷 || गीता चिंतन || 🪷
जीवन की समर भूमि में किंकर्तव्यविमूढ़ स्थिति में पड़ा प्रत्येक मनुष्य ही अर्जुन है। जीवन में जब-जब अनिर्णय की स्थिति में पहुँच जाओ और उचित-अनुचित के निर्धारण में विवेक आपका साथ न दे रहा हो तब-तब आप गीता जी की शरण में चले जाना। गीता जी अपने शरणागत को प्रत्येक अनिर्णय की स्थिति से बाहर निकालकर वास्तविक एवं श्रेष्ठ कर्तव्य का बोध कराती है।
जीवन के सर्वश्रेष्ठ प्रबंधन का नाम ही श्रीमद्भगवद्गीता है। गीता जी की शरण में जाने के बाद अर्जुन ने कहा कि मेरा मोह नष्ट हो गया है और मैंने अपनी उस स्मृति को प्राप्त कर लिया है जो मुझे मेरे कर्तव्य पथ का बोध कराती है। ठीक इसी प्रकार आज भी पार्थ की ही तरह गीता जी द्वारा अपने प्रत्येक शरणागत जीव के संशयों का नाश कर उसे उसकी वास्तविक स्थिति एवं कर्तव्यों का बोध कराया जाता है।
जय श्री राधे कृष्ण
============================
#गीता #गीता जयंती