उत्तर प्रदेश सरकार ने अभी हाल में हर शिक्षण संस्थाओं में बन्दे मातरम गीत गाए जाने की जो अनिवार्यता घोषित की है
उससे मुझे व्यक्तिगत कोई आपत्ति नही है मुझे राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत दोनों के गाते समय राष्ट्रप्रेम की गौरवमयी अनुभूति होती है।
लेकिन भारत के संविधान के निर्माताओं ,
(जिनमें अनेक स्वतंत्रता सेनानी देश भक्त और क़ानून के जानकार थे)ने
ऐसी किसी अनिवार्यता की बाध्यता का प्रावधान नहीं रखा है।राष्ट्रगान के गायन के समय सावधान मुद्रा में खड़े होने की परंपरा की बाध्यता है,लेकिन गाने की बाध्यता नहीं रखी है।उत्तर प्रदेश की सरकार संविधान की मूल भावना के विपरीत बहुसंख्यक वाद की कट्टर राजनीति का समर्थन करती है ।
प्रकारान्तर से बहुसंख्यक वाद की कट्टरता आतंकवाद को बढ़ावा देने का काम करती है,इसलिए देश हित में नहीं है।संविधान की भावना के अनुसार नहीं है सर्वोच्च न्यायालय ने कई फैसलों में कहा है कि संविधान की अनुच्छेद 19/1 (a) में सबको स्वतंत्रता है कि वह राष्ट्र गान या गीत गाए या नहीं गाये।
1986 ई के सर्वोच्च न्यायालय के बिजोए इमैनुएल/बनाम केरल सरकार वाद में स्पष्ट किया गया है कि किसी को राष्ट्रगान या राष्ट्रगीत गाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है।मुझे राष्ट्रगीत या राष्ट्रगान गाने में कोई आपत्ति नहीं है लेकिन मुझे इस बात की आपत्ति जरुर है कि स्वतंत्र देश में कोई चीज किसी पर धोपी नहीं जानी चाहिए क्योंकि भारतीय संविधान ने हम भारतीयों को स्वतंत्रता का अधिकार दिया है जिससे के हिसाब से हम सभी कोई भी चीज करने या न करने के लिए स्वतंत्र हैं।भारतीय संविधान द्वारा नागरिकों को दिए गए मौलिक अधिकारों का एक समूह है जो अनुच्छेद (19-22) में निहित है।यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता,जैसे कि भाषण और अभिव्यक्ति,शांतिपूर्ण सभा,संघ बनाने,आवागमन करने,निवास करने और कोई भी व्यवसाय अपनाने की स्वतंत्रता सुनिश्चित करता है।🇮🇳भारत माता की जय 🇮🇳।🇮🇳वंदे मातरम्🇮🇳🙏
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