एलपीयू के संस्थापक-चांसलर डॉ. अशोक कुमार मित्तल ने इसे अपने "Swadeshi 2.0" अभियान की शुरुआत बताया। यह घोषणा ऐसे समय पर आई है जब अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क (tariff) दोगुना कर 50% तक बढ़ा दिया है।
मित्तल ने कहा —“अगर हमारे पूर्वज ब्रिटिश हुकूमत में विदेशी सामान का बहिष्कार कर सकते थे, तो हम आज क्यों नहीं? अमेरिका ने भारत की ताकत को कम आंका है, अब मजबूती से जवाब देने का समय है।”
एलपीयू में 40,000 से अधिक छात्र हैं और वहाँ पहले ही यह बैन लागू हो चुका है।
मित्तल ने इसे 1905 के स्वदेशी आंदोलन से जोड़ा और इसे आर्थिक आत्मनिर्भरता (economic self-reliance) की दिशा में बड़ा कदम बताया।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी टैरिफ का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर सीमित रहेगा, क्योंकि भारत की GDP का बड़ा हिस्सा (करीब 60%) घरेलू खपत पर आधारित है।
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