bhagwadgita

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RaysVeda
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🪔 श्रीमद्भगवद्गीता अध्ययन – Day 18 📖 अध्याय 1 | अर्जुन विषाद योग | श्लोक 18 द्रुपदो द्रौपदेयाश्च सर्वशः पृथिवीपते। सौभद्रश्च महाबाहुः शङ्खान्दध्मुः पृथक्पृथक्॥१८॥ 🌿 अर्थ: हे राजन्! राजा द्रुपद, द्रौपदी के पुत्र तथा महाबाहु अभिमन्यु ने भी अपने-अपने शंख अलग-अलग बजाए। ✨ आज की सीख: महान उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए प्रत्येक व्यक्ति का योगदान महत्वपूर्ण होता है। जब सभी अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करते हैं, तब सफलता और विजय का मार्ग प्रशस्त होता है। 💡 चिंतन: क्या मैं अपने जीवन में अपने कर्तव्यों को पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ निभा रहा हूँ? 🙏 कमेंट में लिखें — "जय श्रीकृष्ण" 📌 इस पोस्ट को SAVE करें और गीता ज्ञान की इस दिव्य यात्रा से जुड़े रहें।Follow- Raysveda #bhagwatgeeta ##🙏🌞bhagwatgeeta#devotional#Srikrisna#positive morning🙏🌞🌅 #bhakti #SanatanDharma #Bhaktireels
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