कर्म

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sn vyas
3K views 26 days ago
🙏🙏🛐ॐ श्री परमात्मने नमः🛐🙏🙏 🙏कर्म का सिद्धांत पुस्तक से 🙏 #भाग_१३ 🏹🎻🪔📝🦚🔥🦚📝🪔🎻🏹 🥰 प्रारब्ध कहाँ अजमाना, पुरुषार्थ कहाँ करना। 🥰 आदमी को जीवनकाल दौरान अनेक चीजें प्राप्त करने की कामना होती है , और धन, स्त्री ,पुत्र ,मकान ,मोटर, कीर्ति, दान , ध्यान , मोक्ष ,धर्म आदि बहुत सी चीजें प्राप्त करने की उसकी इच्छाएं और कामनाएं होती है। यह तमाम इच्छाओं का शास्त्रों में मुख्य चार विभाग किया है। *(1) धर्म* *(2) अर्थ* *(3) काम* *(4)मोक्ष* *उपरोक्त चार पदार्थ आदमी को प्राप्त करने चाहिए । धर्म से अर्थ की प्राप्ति करनी चाहिए । अधर्म से प्राप्त किया हुआ अर्थ अनर्थ बन जाता है।* *धर्म और अर्थ से प्राप्त किए हुए काम से तृप्त होकर जीव को आखरी ध्येय मोक्ष प्राप्त करना चाहिए। इन चार पदार्थ में से धर्म और मोक्ष के लिए आदमी को सतत पुरुषार्थ करना चाहिए । उसको कभी प्रारब्ध के ऊपर छोड़ना ही नहीं ।* *जब कि अर्थ और काम प्राप्त करने का आदमी को प्रारब्ध पर छोड़ देना चाहिए। उसके लिए पुरुषार्थ करने की आवश्यकता नहीं है। किंतु हम लोग उसको उल्टी दिशा में घूमते रहते हैं ।* *अर्थ और काम प्रारब्ध के ऊपर छोड़ देने के बदले,, उसके लिए आदमी सतत रात-दिन पुरुषार्थ करता है और आखिर प्रारब्ध के आगे मंद हो जाता है । जबकि धर्म और मोक्ष के लिए आदमी को हमेशा सतर्क रहकर पुरुषार्थ करना चाहिए । किंतु उसको केवल प्रारब्ध पर छोड़ देते हैं। और इसलिए वह दोनों तरफ से उलझन में पड़ जाता है।* *महाभारत में महर्षि व्यास ने कहा है कि----* *दोनों हाथ ऊंचा करके मैं सारे जगत को चेतावनी दे रहा हूं,,, किन्तु कोई मेरी सुनता ही नहीं,,,, धर्म से ही अर्थ और काम की प्राप्ति होती है । तो उस धर्म का क्यों सेवन नहीं करते हो ? ,,,,* *इतना एक सनातन सत्य मानव को कहने के लिए इतिहास का दृष्टांत के रूप में उपयोग करके महर्षि व्यास ने संपूर्ण महाभारत की रचना की है । तुम भाग्यवान हो तो उसको पढ़ लेना।* क्रमशः ✍🏽 #कर्म #कर्म ही पूजा है #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 #🙏💐श्रीमद्भागवत गीता💐🙏 bhagwat geeta #श्रीमद्भागवत गीता के श्लोक ॐ
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sn vyas
1K views 22 days ago
🙏🙏🛐ॐ श्री परमात्मने नमः🛐🙏🙏 🙏कर्म का सिद्धांत पुस्तक से 🙏 🌺 भाग 1️⃣7️⃣ 🌺 🏹🎻🪔📝🦚🔥🦚📝🪔🎻🏹 🥰 तो फिर मोक्ष कब ?🥰 *मानव मात्र मोक्ष का अधिकारी है , और मानव शरीर मोक्ष प्राप्त करने के लिए ही मिला है । मानव शरीर धारण करके मोक्ष प्राप्त नहीं करेंगे तो फिर चौरासी लाख़ योनियों में फिर से भटकने की दशा आएगी।* *मनुष्य मात्र देह के बंधनों से छूटकर परम ब्रह्म में लीन होने की इच्छा करें तो वह समर्थ है और स्वतंत्र भी है । क्योंकि वह परात्पर ब्रह्म का ही अंश है। और उसमें ही लीन होने के लिए , मोक्ष प्राप्त करने के लिए , उसका आखिरी सर्जन हुआ है।* *किंतु जब तक वह इस जन्म के संपूर्ण प्रारब्ध भोग नहीं लेगा और पिछले अनादिकाल के अनेक जन्म जन्मांतर के जमा हुए असंख्य हिमालय भर जाए , उतने संचित कर्म के ढेर, इस जीवनकाल दरमियान साफ नहीं करेगा, भस्म नहीं करेगा, तब तक उसको बार-बार अनंत काल तक अनेक जन्म , अनेक देह, धारण करना ही पड़ेगा , और तब तक उसको मोक्ष मिल ही नहीं सकता।* *उसको मोक्ष प्राप्त करने की तीव्र इच्छा हो जाए , उसको प्राप्त करना हो तो उसे तमाम संचित कर्मों का ध्वंस करना पड़ेगा । तमाम संचित कर्मों को ज्ञानाग्नि से भस्म करना पड़ेगा और वर्तमान जीवन के प्रारब्ध कर्मों को पूरी तरह से भोग लेना पड़ेगा।* *इस जीवनकाल दरमियान अभी से ही उसको नए क्रियमाण कर्म इस तरह से करने पड़ेंगे, कि करते ही तुरंत फल देकर शांत हो जाए। उसमें से एक भी क्रियमाण कर्म संचित कर्म में जमा होने नहीं पावे।* *किंतु कठिनाई यह है कि, जीव उसके जीवन काल दरमियान भोगने के पात्र हुए प्रारब्ध कर्मों को भोंगते भोंगते नए असंख्य क्रियमाण कर्म करता है जो भोगने के लिए दूसरे असंख्य जन्म धारण करने पड़ते हैं।* *इस विष -चक्र का अंत आता ही नहीं ,, इसलिए पहले तो, इस जीवनकाल दरमियान और उसके पश्चात जो जो क्रियमाण कर्म हम करें,, वह ऐसे कुशलतापूर्वक करें जिससे वह कर्म कदापि संचित में जमा न होने पावे। और वह भविष्य में नए देह के बंधन में डाले नहीं ,,, बस ऐसी कुशलतापूर्वक काम करते रहने का ही नाम योग है।* *इसलिए गीता में भगवान ने योग की व्याख्या की है कि---* *योग: कर्मसु कौशलम्* क्रमशः .... ✍🏽 #कर्म #कर्म ही पूजा है #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 #🙏💐श्रीमद्भागवत गीता💐🙏 bhagwat geeta #श्रीमद्भागवत गीता के श्लोक ॐ
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