मित्र, पद्म पुराण के अनुसार 84 लाख योनियों का वर्गीकरण बहुत ही विस्तृत और रोचक है !
1. जलचर (पानी में रहने वाले जीव): 9 लाख (मछली, कछुआ, केकड़ा, जलीय कीट आदि)
2. स्थावर (अचल/वनस्पति): 20 लाख (पेड़-पौधे, घास, लता, वृक्ष आदि)
3. कृमि (कीड़े-मकोड़े): 11 लाख (चींटी, कीट, कीड़े, रेंगने वाले सूक्ष्म जीव आदि)
4. पक्षी (आकाशचर): 10 लाख (चिड़िया, कबूतर, मोर, बाज, हंस आदि)
5. पशु (भूमि पर चलने वाले जीव): 30 लाख (गाय, घोड़ा, सिंह, हाथी, बिल्ली, कुत्ता आदि)
6. मानव (मनुष्य योनि): 4 लाख (पुरुष और स्त्री — मानव रूप)
कुल योग: 84,00,000 योनियाँ
इन सभी योनियों में मनुष्य योनि को विशेष माना गया है क्योंकि यही एकमात्र योनि है जहाँ से जीव मोक्ष, ज्ञान और आत्म-साक्षात्कार का मार्ग प्राप्त कर सकता है।
#वेद पुराण