जागो—ये लाइन पढ़ते ही दिल में झन्नासा जागेगा: राधा-कृष्ण का वह दिव्य मेल — जहाँ राधा को हिंदू दर्शन में ह्लादिनी (आध्यात्मिक आनंद की प्रधान शक्ति) माना जाता है, वही प्रेम का मतलब केवल रोमाँस नहीं बल्कि आत्मिक पूर्णता है। राधा के बारे में कहा गया है — “राधा का प्रेम इतना निस्वार्थ और दिव्य था कि उन्होंने कृष्ण को भी मोह लिया” — यही लाइन दिल को चीर देती है और भक्त की तड़प का सार बोलती है। वैज्ञानिक नज़र से भी यह समझना रोचक है: गहरे प्रेम और भक्ति के अनुभव मस्तिष्क के डोपामिनेरजिक रिवॉर्ड-सिस्टम को सक्रिय करते हैं — इसलिए श्रद्धा में मिलने वाला आनन्द जैविक रूप से ‘रिवॉर्ड’ जैसा महसूस होता है, न कि सिर्फ कल्पना। और हाँ, राधा-अष्टमी जैसी परंपराएँ (31 अगस्त 2025 को विश्वभर में उत्सव के साथ मनाई गई) हमें यह याद दिलाती हैं कि भक्ति का सामाजिक और सांस्कृतिक रूप भी जीवन को अर्थ देता है — पर धर्म का असली उद्देश्य आत्मशुद्धि है, न कि अंधानुकरण या व्यापार। ✨🙏 राधे राधे! 🕊️🌺 #राधाकृष्ण #RadheRadhe #भक्ति #DivineLove #RadhaRani #SpiritualScience
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