प्रयागराज महाकुंभ 2025 — त्रिवेणी संगम पर श्रद्धा, विज्ञान और ज़िम्मेदारी का अद्भुत मेल: शाही स्नान के पीक दिन पर अनुमानित लगभग 57 मिलियन श्रद्धालुओं की भीड़ ने दिखाया कि तीर्थयात्रा केवल आध्यात्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामूहिक मानव-व्यवहार, जनसांख्यिकी और पर्यावरणीय चुनौतियों का वास्तविक 'लाइव' पेपर है; परंपरा के अनुसार तीर्थ (tirtha) मनोवैज्ञानिक और सामाजिक पारगमन का स्थान है और कुंभ जैसी तिथियाँ खगोलीय गणनाओं पर आधारित हैं — यानी यह positional astronomy का जीवित क्लासरूम भी है; तर्क और विज्ञान स्पष्ट करते हैं कि श्रद्धा-बोध सकारात्मक है, पर भीड़ प्रबंधन, जल-गुणवत्ता, स्वच्छता और स्वास्थ्य-इन्फ्रास्ट्रक्चर की अनदेखी धर्म की आत्मा के खिलाफ और खतरनाक है — इसलिए वैक्सीनेशन, मेडिकल-रैडीनेस, प्लास्टिक-त्याग और सख्त sanitation protocols अपनाना नैतिक और वैज्ञानिक रूप से सही है; "तीर्थ वह पुल है जो विस्मय को जिम्मेदारी से जोड़ता है" — यह विचार यात्रा में सुरक्षा, सम्मान और पर्यावरण की जिम्मेदारी भी साथ लेकर चलने की प्रेरणा दे; 🙏🌊✨ #प्रयागराज #Mahakumbh2025 #तीर्थयात्रा #SpiritualScience #स्वच्छता_जरूरी
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