Ramcharitmanas

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Manish Sharma
764 views 17 days ago
🌺 मंगल भवन अमंगल हारी, द्रवहु सो दसरथ अजर बिहारी 🌺 जब दुनिया साथ छोड़ दे, जब अपने भी समझना बंद कर दें, जब हर रास्ता बंद सा लगे… तब बस एक नाम दिल से लेना — श्रीराम ❤️ क्योंकि श्रीराम केवल नाम नहीं, टूटे हुए मन का सहारा हैं, डूबती हुई नैया के किनारा हैं, और हर भक्त की आखिरी उम्मीद हैं। 🙏 जिस घर में राम का नाम गूंजता है, वहाँ दुख ज्यादा देर टिक नहीं पाता। जो सच्चे मन से पुकारता है, श्रीराम उसकी झोली कृपा से भर देते हैं। 🚩 जय श्री राम 🚩 सियावर रामचंद्र की जय 🙏 #जयश्रीराम #RamBhakti #RamCharitManas #ShareChat #BhaktiPost #ManishSharma #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏🏻 मेरे भगवान 🙏🏻 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 #Ramcharitmanas
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Manish Sharma
887 views 11 days ago
रामायण की बालकांड कि इस चौपाई को पढ़ने से जीवन सफल हो जाता है कृपया इस चौपाई को अवश्य जय श्री सीताराम 🙏🙏 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #🕉️सनातन धर्म🚩 #📜 Whatsapp स्टेटस #Ramcharitmanas
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sn vyas
655 views 13 days ago
#रामचरितमानस #🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 #श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️ #रामचरितमानस चौपाई “सकल सुमंगल दायक रघुनायक गुण गान । सादर सुनहि ते तरहि भव सिंधु बिना जलजान ।।“ मानस-महिमा गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा ईश्वरीय प्रेरणा से रचित “श्रीरामचरितमानस” एक दिव्य महाकाव्य है | इसके श्रवणमात्र से जीव का परम कल्याण निश्चित है | इस महाकाव्य में कुछ दस बीस चौपाइयों को छोड़कर सम्पूर्ण ग्रन्थ में प्रत्येक पंक्ति में अखिल ब्रह्माण्डनायक भगवान् श्रीराम के नाम के बीजाक्षर “र” और “म” का समावेश है | इसी लिए ग्रन्थ के प्रारम्भ में ही लिखा है कि इसमें श्रीराम जी का उदार नाम “राम” है – “एहि महँ रघुपति नाम उदारा | अति पावन पुरान उदारा ||”....... (१.९.१) इस प्रकार से श्रीराम नाममय होने के कारण “श्रीरामचरितमानस” श्रीराम जी का ठीक उसी तरह ग्रन्थावतार है, जैसे श्रीमद्भागवत भगवान् श्रीकृष्ण का ग्रन्थावतार माना जाता है | मन लगाकर श्रीरामचरितमानस के श्रवणमात्र से संसृति-क्लेश दूर होता है, ऐसा सन्तों का दृढ विश्वास है | सुनने का विशेष महत्त्व है | यह प्राकृतिक नियम है कि जो कुछ हम कानों से ग्रहण करते हैं, वह मुख से निकलता है | कानों से भगवान् का गुणगान सुनने से जब मुख से वहीं निकालेंगे तो जीवन धन्य हो जाएगा | “श्रीरामचरितमानस” के चार वक्ता-श्रोता हैं—गोस्वामी तुलसीदास जी अपने मन को सुनाते हैं, याज्ञवल्क्य मुनि भारद्वाज को, शिवजी पार्वती जी को और काकभुशुंडि जी पक्षिराज गरुड़ जी को यह कथा सुनाते हुए कथा-श्रवण पर विशेष जोर देते हैं | “श्रीरामचरितमानस” में यह वर्णन क्रमश: इस प्रकार से है :- १. गोस्वामी जी अपने मन से कहते हैं :- “सुख भवन संसय समन दवन विषाद रघुपति गुन गना || तजि सकल आस भरोस गावहि सुनहि सन्तत सठ मना ||”.....(५.६० छंद) २. याज्ञवल्क्यजी, भारद्वाज मुनि से कहते हैं :- “ तात सुनहु सादर मनु लाई | कहउँ राम कै कथा सुहाई ||”.....(१.४७.५) ३. भगवान् शंकर,माता पार्वती जी से कहते हैं:- “ सुनु सुभ कथा भवानि रामचरितमानस बिमल | कहा भुसुंडी बखानि सुना बिहग नायक गरुड़ ||”......(१.१२०-ख) ४. काकभुशुंडि जी पक्षिराज गरुड़ जी से कहते हैं :- “ सुनु खगपति यह कथा पावनी | त्रिविध ताप भव भय दाविनी ||”.....(७.१५.१)
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