हास्य कवि सम्मेलन
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Shyam Kunvar Bharti
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कहानी _ **क्या होगा घर जमाई का** भाग_ 20 लेखक_ श्याम कुंवर भारती प्रतीक तेज गति से कार को दौड़ाता जा रहा था ।मौसम अभी भी भींगा भींगा हुआ था।आसमान में काले काले बादल छाए हुए थे और हल्की रिमझिम बारिश हो रही थी।मौसम बड़ा सुहाना था। मंजू लता उसकी बदल वाली सीट पर बैठी हुई थी।वो प्रतीक के कंधे पर अपना सिर रखकर आंखे बंद किए हुए हुए सो रही थी ।सुबह का समय था। आंखे बंद किए हुए वो रात की घटना याद कर रही थी।वो होटल के बिस्तर पर लेती हुई थी ।प्रत्येक तकिया और चद्दर लेकर नीचे सोने की जिद कर रहा था।लेकिन वो उसे अपने पास बिस्तर पर सुलाना चाहती थी। बहुत मनाने पर भी वो नहीं माना था और नीचे फर्स पर ही चद्दर बिछा कर सो गया था और खर्राटे लेने लगा था। लेकिन मंजू को नींद नहीं आ रही थी।उसे प्रतीक पर बड़ा प्यार आ रहा था।कितना सीधा साधा और शरीफ लड़का है।कोई और होता तो इस मौके का फायदा उठाना चाहता लेकिन उसे सबकी मान मर्यादा का कितना ख्याल था।इसलिए एक कमरे में एक अकेली लड़की के साथ होने के कारण वो जमीन पर सो गया था। बारिश अभी भी जोरदार हो रही थी।वो कमरे जिनके लिए पहले से बुक था वे लोग रात में नहीं आए शायद बारिश के कारण उनका आना संभव नहीं हो पाया होगा। कमरे में ऐसी भी चल रहा था । जिससे ठंड लगने लगी थी ।मंजू ने देखा प्रतीक ठंड से सिकुड़ कर सो रहा था।मंजू ने देखा बेड पर एक ही कम्बल था।वो बिस्तर से उतरकर प्रतीक के पास गई और उसे जगाने लगी ।लेकिन वो नहीं उठा ।लगता है वो काफी थक गया था।जिससे गहरी नींद में सो रहा था। मंजू ने बिस्तर से एक तकिया उठा लिया और कम्बल उठाकर प्रतीक को ओढ़ा दी और खुद ही उसे ओढ़कर उसकी बगल में सो गई। प्रतीक अभी भी खर्राटे ले कर गहरी नींद में सो रहा था।धीरे धीरे ठंड बढ़ने लगी थी ।मंजू ने चाहा वो प्रतीक से लिपटकर सो जाए लेकिन प्रतीक ने नींद में भी उसे परे धकेल कर सो गया। मंजू मुस्कुराने लगी ।उसने फिर उसे अपनी बांहों में पकड़ लिया और उसके पैरों पर अपना पैर रख दी। प्रतीक हड़बड़ा कर उठ बैठा और मंजू को अपनी बगल में सोया देखकर खड़ा हो गया ।मंजू भी बैठ गई और बोली अरे आप खड़े क्यों हो गए ।आइए सोइए न बीएओ साहब नहीं । मैडम आप तो ऊपर सो रही थी फिर नीचे क्यों आ गई ।उसने पूछा। आपको ठंड लग रही थी ।और कंबल एक ही था इसलिए नीचे आपके पास सोने आ गई।मंजू ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया। प्रतीक ने ऐसी का रिमोट उठाकर एसी बंद कर दिया और बोला लिजिए अब ऐसी बंद हो गया अब ठंड नहीं लगेगी। आप ऊपर आकर सोइए मैडम और मुझे भी सोने दीजिए। उसकी इस हरकत पर मंजू को बड़ा गुस्सा आया और वो चिड़चिड़ाते हुए बोली भलाई का जमाना ही नहीं है। जाइए आपको जैसे सोना है सोइए मैं भी चली सोने ।इतना कहकर वो बिस्तर पर आकर कंबल ओढ़ ली और सो गई। प्रतीक ने इत्मीनान की सांस लिया और आकर नीचे फ़र्स पर सो गया। सुबह ठीक चार बजे वो उठ गया और मंजू को भी जगा दिया ।लेकिन वो उठी नहीं । उठिए मैडम आपको अपने पापा को देखने नहीं जाना है क्या ? उसकी आवाज सुनकर मंजू तुरंत उठ बैठी ।प्रतीक उसके उठते ही बाथरूम में घुस गया और नहा धोकर बाहर निकला और बोला अब आप भी जाइए जल्दी से तैयार हो जाइए मैडम । कपड़े बदलने से पहले प्रतीक ने नीचे काउंटर पर फोन कर चाय बिस्कुट भेजने को कहा और रुम छोड़ने की बात भी बता दिया। थोड़ी देर में मंजू भी तैयार होकर बाथरूम से निकली ।वो इस हाल में काफी सुंदर लग रही थी ।वो उसे बड़े ध्यान से देखने लगा था। अपनी ओर बड़े ध्यान से प्रतीक को देखते पाकर मंजू ने मुस्कुरा कर पूछा _ मुझे ध्यान से क्यों देख रहे हैं आप कही नजर लगाने का इरादा तो नहीं है। प्रतीक ने तुरंत अपनी नजर हटा लिया और कहा _ आपको किसकी नजर लगेगी मैडम आप तो खुद एक नजराना है भगवान का । वाह क्या बात है आप तो शायरी करने लगे मंजू ने खुश होकर कहा ।तभी दरवाजे पर आवाज हुई।प्रतीक ने दरवाजा खोला सामने बैरा एक प्लेट में दो कप चाय और बिस्कुट लेकर खड़ा था। दोनों ने फटाफट चाय बिस्कुट खत्म किया और कमरे से बाहर निकल गए। मंजू अभी इन्हीं ख्यालों में गुम थी कि तभी कार का ब्रेक लगने से झटका लगा और उसने आंखे खोल दिया और पूछा क्या हुआ । सामने बेरियर लगा हुआ है।शायद पुलिस अपनी नियमित जांच कर रही है।प्रतीक ने कहा । पुलिस ने गाड़ी की डिक्की खोलकर जांच किया और जाने दिया। करीब चार घंटे के सफर के बाद दोनों हॉस्पिटल पहुंच गए। वहां मंजू की मां और उसकी चचेरी बहन मौयुद थी ।अपनी बेटी को देखकर उसकी मां बहुत खुश हुई ।मंजू ने अपनी मां से अपने पिता के स्वस्थ के बारे में पूछा ।मां ने बताया तुम्हारे पापा अभी भी बेहोश है ।इनका इलाज चल रहा है।इनको अभी कुछ दिन और अस्पताल में रखने के लिए डॉ बोल रहे हैं। शेष अगले भाग_ 21 में लेखक _ श्याम कुंवर भारती बोकारो,झारखंड मॉब.9955509286 #हास्य कवि सम्मेलन #black Lover (✷‿✷)^_________^अल्फाज युवा कवि Kunal Singh #✍मेरे पसंदीदा लेखक #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #✍प्रेमचंद की कहानियां
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