भानु सप्तमी

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sn vyas
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#🌷भानु सप्तमी की शुभकामनाएं💐 #🌞भानु सप्तमी🙏 #भानु सप्तमी #शुभ रविवार `🌞🌻 भानु सप्तमी 🌻🌞` `यदा सप्तमी रविवारे भवेत् सा भानुसप्तमी स्मृता` — `निर्णयसिन्धु , प्रथम परिच्छेद ।` `अर्थात 👉🏻 जिस रविवार को सप्तमी तिथि पड़े , उसे भानु सप्तमी कहते हैं ।` `🌞 माहात्म्य –` `भानुसप्तमी तु सम्प्राप्ता सर्वपापप्रणाशिनी ।` `स्नानदानादिकं तस्यां सर्वं कोटिगुणं भवेत् ॥` — `भविष्य पुराण, ब्राह्मपर्व ७१.५` `अर्थात 👉🏻 भानु सप्तमी समस्त पाप नाश करती है । इस दिन स्नान-दान कोटि गुना फल देता है ।` `☀️ सूर्य-ग्रहण तुल्य फल –` `रविवारेण संयुक्ता शुक्ला वा यदि सप्तमी ।` `तदा सा भानुसप्तमी प्रोक्ता सूर्यग्रहणैः समा ॥` — `स्कन्द पुराण , काशीखण्ड १४.३१` `अर्थात 👉🏻 शुक्ल पक्ष अथवा कृष्ण पक्ष , सप्तमी रविवार को हो तो सूर्य-ग्रहण के समान पुण्य प्राप्त होता है ।` `🪔 फल-श्रुति –` `आयुरारोग्यमैश्वर्यं विद्यां यशः सुखं लभेत् ।` `भानुसप्तमीं समासाद्य यो नरो भास्करं यजेत् ॥` — `भविष्य पुराण ७१.१२` `अर्थात 👉🏻 भानु सप्तमी को सूर्य-पूजन से आयु , आरोग्य , ऐश्वर्य , विद्या , यश , सुख मिलते हैं ।` `🚫 निषेध –` `तैलाभ्यंगं न कुर्वीत सप्तम्यां भानुवासरे` — `ब्रह्मवैवर्त पुराण` `अर्थात 👉🏻 भानु सप्तमी को तेल-मालिश न करें , नमक त्यागें ,एवं दिन में न सोएँ ।` `☝🏻 तात्पर्य –रविवार को सप्तमी तिथि पड़ने से भानु सप्तमी होती है ।` `👉🏻 इस दिन का स्नान, दान , जप , तप कोटि गुना फल देने वाला तथा सम्पूर्ण पापों का नाशक होता है ।` `👉🏻 इसका पुण्य सूर्य-ग्रहण काल के स्नान-दान के समान कहा गया है ।` `👉🏻 इस दिन विधिपूर्वक सूर्य-पूजन करने वाले को आयु , निरोगता , धन-सम्पत्ति, विद्या , कीर्ति औऱ सुख की प्राप्ति होती है ।` `👉🏻 इस दिन तेल लगाना , नमक का सेवन एवं दिन में सोना शास्त्र से वर्जित है ।` `क्या करें –` `१. अरुणोदय काल में स्नान करें ।` `२. ताम्र पात्र से ॐ घृणिः सूर्याय नमः बोलकर ३ बार अर्घ्य दें ।` `३. आदित्यहृदय स्तोत्र का १ बार पाठ करें ।` `४. १२ सूर्य नमस्कार अथवा १२ साष्टांग प्रणाम करें ।` `५. गेहूँ , गुड़ तथा दक्षिणा का दान करें ।` `ॐ मित्राय नमः🚩` `उद्यन् वै तमः हन्ति` `– उगता हुआ सूर्य अन्धकार को नष्ट करता है ।` `आप समस्त को सूर्य सप्तमी की हार्दिक मङ्गल कामनाएं💐💐` `🌄🌄 प्रभात वन्दन 🌄🌄©®`
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sn vyas
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#🌷भानु सप्तमी की शुभकामनाएं💐 #🌞भानु सप्तमी🙏 #भानु सप्तमी भानु सप्तमी महत्व, नियम और फल 〰️〰️🌹〰️〰️🌹〰️〰️🌹〰️〰️🌹〰️〰️ पौराणिक महत्त्व 〰️〰️〰️〰️〰️〰️ हिंदू पंचांग के अनुसार, जिस माह के सप्तमी तिथि को रविवार पड़ता है, उस दिन भानु सप्तमी मनाई जाती है। वैशाख, मार्गशीर्ष, कार्तिक, ज्येष्ठ, फाल्गुन, और माघ के महीनों में शुक्ल पक्ष के दौरान भी भानु सप्तमी मनाई जाती है। इस वर्ष फाल्गुन मास का यह पर्व कृष्ण पक्ष मे 07 जून रविवार के दिन मनाया जायेगा। यह पवित्र दिन सूर्य देव (भगवान सूर्य) को समर्पित है। यह प्रत्येक सप्तमी पर मनाई जाती है जो रविवार को आती है। इस दिन को व्यसवत्मा सप्तमी या सूर्य सप्तमी के रूप में भी जाना जाता है। भानु सप्तमी का सबसे बड़ा महत्व यह है कि इस दिन जो लोग सूर्यदेव की पूजा करते हैं उन्हें धन, दीर्घायु और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह माना जाता है कि भानु सप्तमी के दिन व्रत रखने से व्यक्ति को अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है और सभी प्रकार की बीमारियां दूर रहती हैं। यह माना जाता है कि भानु सप्तमी की पूर्व संध्या पर, सूर्य देवता ने सात घोड़ों के रथ पर अपनी पहली उपस्थिति दर्शायी थी। विभिन्न सप्तमी तीथों में, भानु सप्तमी बहुत शुभ मानी जाती है और पश्चिमी भारत और दक्षिणी भारत के क्षेत्रों में व्यापक रूप से मनाई जाती है। भानु सप्तमी के शुभ दिन पर, भक्त सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए कई पवित्र सूर्य स्तोत्रों और आदित्य हृदय स्तोत्रों का जाप करने के साथ महा-अभिषेक करके भगवान सूर्य की पूजा करते हैं। भक्त गरीबों को फल, कपड़े आदि का दान भी करते हैं। इस सप्तमी को सूर्य सप्तमी के नाम से भी जाना जाता है। भानु सप्तमी उस दिन का संकेत भी देती है जब भगवान सूर्य या सूर्य देवता अपने रथ पर पृथ्वी पर आये थे। भगवान सूर्य के आगमन ने पृथ्वी पर जीवन ला दिया। भगवान सूर्य एक पवित्र कमल के फूल पर स्वर्ण रथ में बैठे हैं। सात घोड़े रथ खींचते हैं और ये घोड़े सूर्य की सात किरणों को दर्शाते हैं। अरुण भगवान सूर्य का सारथी है, जो सूर्य की चिलचिलाती गर्मी से पृथ्वी को बचाने और ढाल बन कर सामने खड़ा है। भगवान सूर्य सभी प्राणियों के निर्माता हैं और जीवन शक्ति और स्वास्थ्य के स्वामी भी हैं। जो व्यक्ति भगवान सूर्य की पूजा करते हैं और भानु सप्तमी का व्रत रखते हैं उन्हें अच्छे स्वास्थ्य और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। भानु सप्तमी का ज्योतिषीय महत्व 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि किसी व्यक्ति का सूर्य कमजोर है तो उसे सूर्य नारायण की पूजा करनी चाहिए। पौराणिक ग्रन्थ भविष्य पुराण में वर्णन मिलता है कि भगवान् श्रीकृष्ण ने अपने पुत्र को सूर्य पूजा का महत्व बताया है। भगवान् श्रीकृष्ण ने कहा है कि सूर्यदेव एक प्रत्यक्ष देवता हैं। अर्थात ऐसे भगवान हैं जिन्हें रोज देखा जा सकता है। पुराणों के अनुसार भानु सप्तमी की तिथि को जो भी सूर्य देव की उपासना तथा व्रत करते हैं, वो सभी शारीरिक कष्टों से मुक्ति पाते हैं। भानु सप्तमी के व्रत-पूजन से होने वाले लाभों से इस तिथि का महत्व ओर भी बढ़ जाता है। भानु सप्तमी पर सूर्य देव की पूजा करने से व्यक्ति को धन- धान्य और समृद्धि की प्राप्ती होती है। सूर्य देव की पूजा करने से व्यक्ति को सभी प्रकार के दुखों और शारीरिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। सूर्य देव को जीवन का आधार माना जाता है। सूर्य देव की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का आगमन होता है। इस तिथि पर सूर्य देव की पूजा करने से व्यक्ति की शारीरिक और मानसिक शक्ति में वृद्धि होती है। सूर्य देव को ऊर्जा का भी कारक माना जाता है। सूर्य देव की पूजा करने से व्यक्ति में ऊर्जा का संचार होता है और व्यक्ति की शारीरिक और मानसिक शक्ति में वृद्धि होती है। ज्योतिष शास्त्र कहता है कि भानु सप्तमी पर सूर्य देव की पूजा करने से व्यक्ति की कुंडली में सूर्य ग्रह की अशुभता दूर होती है। शास्त्रों में सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है। सूर्य की अशुभता से व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक कष्टों का सामना करना पड़ता है। भानु सप्तमी पर सूर्य देव की पूजा करने से व्यक्ति की कुंडली में सूर्य ग्रह की अशुभता दूर होती है और व्यक्ति को मानसिक शान्ति और शारीरिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। भानु सप्तमी पूजा विधि 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ भानु सप्तमी की पूजा करने से सभी तरह की स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं से मुक्ति मिलती है और सूर्यदेव जीवन में खुशियों का आशीर्वाद देते हैं। सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर शौचादि से निवृत होने के बाद स्नान करें स्नान के दौरान, इक्सोरा कैलोट्रोपिस (अक्का) और हल्दी के कुछ पत्तों को सिर पर रखा जाता है, जिस पर पानी डाला जाता है।और स्वच्छ वस्त्र पहनें। सूर्य उदय के पश्चात पूर्व दिशा की ओर मुख करके भगवान सूर्य का ध्यान करें। ताम्बे के लोटे में जल, थोड़ा सा गंगाजल, लाल फूल, अक्षत ( चावल) डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। सूर्य देव को जल चढ़ाते समय भानु सप्तमी मंत्र ॐ सूर्याय नमः मंत्र का जाप करें। सूर्य भगवान् को झुककर प्रणाम करें और सूर्य देव को दिए गए अर्घ्य से अपने मस्तक पर तिलक लगाएं। इसके बाद धूप दीप से सूर्य देव का पूजन करें। भानु सप्तमी के व्रत का संकल्प लें। पूरे दिन निराहार रहें। फलों का सेवन कर सकते हैं। शाम को सूर्यास्त के समय फिर से भगवान सूर्य की पूजा करें और व्रत का समापन करें। भानु सप्तमी पर दान 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ भानु सप्तमी पर दान करने से भी विशेष लाभ प्राप्त होते हैं। इस दिन निम्नलिखित चीजों का दान करना शुभ माना जाता है: • पीले या लाल वस्त्र • ताम्बे के बर्तन • पीले फल • गुड़ • गेंहु अपनी क्षमता और श्रद्धा के अनुसार इनमे से किसी भी वस्तु का दान किया जा सकता है भानु सप्तमी व्रत कथाः 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ भानु सप्तमी की व्रत कथा के अनुसार प्राचीनकाल में इंदुमती नाम की एक वेश्या हुआ करती थी। उसने अपना पूरा जीवन इसी वेश्यावृत्ति में गुजारा था। इंदुमती ने कभी भी कोई धार्मिक कर्मकांड या फिर कोई पुण्य कर्म नहीं किया था। एक दिन उसके मन में मरणोपरांत मोक्ष प्राप्ति का विचार आया। फिर उसने सोचा कि उसने जीवन में कभी कोई पूजा-पाठ या धार्मिक कार्य नहीं किया। फिर भला उसे मोक्ष कैसे मिल सकता है। मोक्ष प्राप्ति की इसी महत्वकाँक्षा के साथ वह ऋषि वशिष्ठ के पास गयी। उसने उनसे पूछा कि हे ऋषिदेव मैंने अपने जीवन में कभी भी कोई धार्मिक कार्य और पुण्य कर्म नहीं किया। किन्तु इस समय मेरे मन में मोक्ष प्राप्ति की अभिलाषा है हे ऋषिवर कोई ऐसा उपाय बताएं जिससे मेरे जैसी महिला जिसने पूरा जीवन वैश्यावृत्ति में गुजारा हो, उसे मरणोपरांत मोक्ष की प्राप्ति हो। इंदुमती के ये वचन सुनकर ऋषि वशिष्ठ को उसपर दया आ गयी। उनहोंने कहा हे इंदुमती, स्त्रियों को सौभाग्य, सुख और मोक्ष प्रदान करने वाला एक ही व्रत है। वह व्रत है "भानु सप्तमी व्रत"। इस दिन जो भी महिला व्रत रखती है, पुरे विधि विधान से सूर्य देव की पूजा-अर्चना करती है। उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। तुम भी व्रत रखकर पूरे विधि-विधान से सूर्य देव की पूजा करना। तुम्हारी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी। इंदुमती ने ऋषि वशिष्ठ के कहे अनुसार पुरे विधि-विधान और और निष्ठा के साथ भानु सप्तमी का व्रत रखा और सूर्य देव की पूजा करी। इसके फलस्वरूप मरने के बाद इंदुमती को मोक्ष की प्राप्ति हुई, वह जन्म मरण के बंधन से मुक्त हो गयी। यह व्रत का ही फल था कि उसे स्वर्ग की प्राप्ति हुई और उसे स्वर्ग में अप्सराओं की नायिका के रूप में स्थान मिला। तभी से भानु सप्तमी का व्रत रखने की परंपरा की शुरुआत हो गयी और लोग हर भानु सप्तमी पूरी श्रद्धा के साथ व्रत रखकर सूर्य देव की पूजा अर्चना करते हैं। भानु सप्तमी व्रत के लाभ 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ भगवान सूर्य की उपासना करने वाले और भानु सप्तमी के दिन व्रत रखने वाले भक्तो को कई लाभ मिलते है जैसे: भानु सप्तमी की पूर्व संध्या पर पवित्र गंगा में स्नान करने वाले भक्तों को अपने जीवन में कभी भी गरीबी का सामना नहीं करना पड़ेगा। भानु सप्तमी पूजा करने वाली महिलाएं अपने अगले जन्म में कभी विधवा नहीं बनती हैं। भानु सप्तमी व्रत स्वस्थ और सुखी जीवन और अच्छे धन का पर्यवेक्षक को आशीर्वाद देता है। सूर्य देव के आशीर्वाद से, भक्त घातक रोगों से मुक्त हो जाते हैं और महान भाग्य और अच्छा ज्ञान प्राप्त करते हैं। साभार~ पं देव शर्मा🔥 〰️〰️🌹〰️〰️🌹〰️〰️🌹〰️〰️🌹〰️〰️
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