सात घोड़ों की फोटो वास्तु के हिसाब से मेरे अपने सोंग्स
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... Acharya Rajesh kumar
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#🙏शुभ मंगलवार🌸 आधुनिक वास्तु: रसोई की दिशा का नया समीकरण. ------------------- ​यह मेरा दृढ़ मत है कि वास्तु शास्त्र का उपयोग केवल बुद्धि और तर्क के साथ किया जाना चाहिए, न कि आँख बंद करके पुराने नियमों का पालन किया जाए। हमारी बदलती जीवनशैली के आधार पर, रसोई की दिशा के लिए यहाँ 11 महत्वपूर्ण निष्कर्ष दिए गए हैं: ​पुराने नियम, पुराना तर्क: वास्तु में रसोई के लिए अग्नि कोण (दक्षिण-पूर्व) का निर्धारण सदियों पुरानी जीवनशैली पर आधारित था, जहाँ खाना सुबह 5 से 7 बजे के बीच बनाया जाता था और चूल्हे की सामग्री (लकड़ी, गोबर) को सुखाने के लिए तेज़ गर्मी की आवश्यकता होती थी। ​आधुनिक जीवनशैली में बदलाव: वर्तमान समय में नाश्ता लगभग 9 बजे और दोपहर का भोजन 12 से 2 बजे के बीच बनता है, जिससे मुख्य खाना पकाने का समय दोपहर का होता है। ​अग्नि कोण में अत्यधिक गर्मी की समस्या: दोपहर के इन घंटों में अग्नि कोण (दक्षिण-पूर्व) में 45°C से 50°C तक की तेज़ गर्मी होती है, जो गृहिणी के लिए रसोई में काम करना अत्यधिक कष्टदायक बना देती है, खासकर जब रसोई में AC न हो। इसी तरह देशकाल स्थिति के अनुसार भी वस्तु का इस्तेमाल करना चाहिए यही अगर ठंडी जगह है जहां पर ज्यादा ठंड पड़ती है तो वहां अगले कौन की दिशा किचन के लिए उपयुक्त स्थान है ​ईंधन का परिवर्तन: अब हम लकड़ी या गोबर के बजाय गैस पर खाना बनाते हैं, इसलिए चूल्हे की सामग्री को सुखाने के लिए अग्नि कोण की तेज़ गर्मी की अब आवश्यकता नहीं रही। ​वायु कोण (उत्तर-पश्चिम) का सुझाव: आधुनिक समस्याओं और तर्कों को देखते हुए, रसोई के लिए इसकी मित्र दिशा यानी वायु कोण (उत्तर-पश्चिम) सबसे उपयुक्त स्थान हो सकता है। ​वायु कोण का समर्थन: वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम) वायु तत्व से संबंधित है, जो अग्नि तत्व (रसोई) का समर्थन और पोषण करता है, जिससे सकारात्मक गतिशीलता बनी रहती है। ​कम गर्मी का लाभ: वायु कोण दोपहर में कम गर्म रहता है, जिससे खाना बनाते समय गर्मी कम महसूस होती है और यह गृहिणी के लिए एक आरामदायक कार्यक्षेत्र प्रदान करता है। ​उत्कृष्ट वेंटिलेशन (वायुसंचार): उत्तर-पश्चिम दिशा में अक्सर हवा का अच्छा आवागमन होता है। यह दिशा एग्जॉस्ट फैन और खिड़कियों के माध्यम से गरम हवा और धुएं को आसानी से बाहर निकालने में मदद करती है, जिससे रसोई स्वच्छ और ठंडी रहती है। ​प्राकृतिक प्रकाश की उपलब्धता: इस दिशा में दिन के अधिकांश समय पर्याप्त प्राकृतिक प्रकाश उपलब्ध रहता है, जिससे बिजली की बचत होती है और रसोई में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। ​खाद्यान्नों की शुद्धता: इस कोण को खाद्यान्नों के भण्डारण के लिए भी अच्छा माना गया है, क्योंकि यहाँ भंडार किया गया अनाज अधिक समय तक शुद्ध रहता है, जो रसोई के लिए एक महत्वपूर्ण सकारात्मक पहलू है। ​निष्कर्ष: तर्क और बुद्धि का महत्व: मेरा मानना है कि हमें रटे-रटाए नियमों को छोड़कर, तर्क और व्यावहारिक बुद्धि का उपयोग करते हुए वास्तु सिद्धांतों को अपनी वर्तमान जीवनशैली के अनुरूप ढालना चाहिए, न कि सोशल मीडिया के भ्रमित करने वाले उपायों पर निर्भर रहना चाहिए। ​मित्रों मेरी जो भी बात होती है वह तर्क पर आधारित होती है यह नहीं की आंख मूंद कर जो किताबों में लिखा है वही मैं आपको बताऊं जो आजकल हो रहा है लोगों को भ्रमित किया जा रहा है डराया जा रहा है वास्तु के नाम पर गंदे मंदिर चाइनीस सामान बेच जा रहे हैं प्लास्टिक से बने हुए गंदे मेटल के बने हुए जो आपके घरों को और भी नेगेटिव ऊर्जा प्रदान कर रहे हैं मित्रों मैं बहुत ही मेहनत से यह लेख तैयार कर किया है कृपया और उनको भी इससे लाभ मिले इसलिए इसको ज्यादा से ज्यादा शेयर करें #सात घोड़ों की फोटो वास्तु के हिसाब से मेरे अपने सोंग्स #💰धन के लिए वास्तु टिप्स🔯 #ज्योतिष-वास्तु टिप्स 🔱 #ज्योतिष वास्तु टिप्स 🙏
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