🙏🙏🛐ॐ श्री परमात्मने नमः🛐🙏🙏
🙏कर्म का सिद्धांत पुस्तक से 🙏
#भाग_२०
🏹🎻🪔📝🦚🔥🦚📝🪔🎻🏹
🥰अबुध और अभान अवस्था में किए हुए कर्म🥰
*(1) (2) बाल्य अवस्था में किए हुए कर्म और अभान अवस्था में, पागल-पन में शराब पी हुई हालत में, या नशे की अवस्था में किए कर्म में , राग द्वेष की प्रेरणा होती नहीं । इसलिए राग द्वेष से प्रेरित हुए बिना के कर्म ,, संचित कर्म में जमा होते नहीं।*
*कोई छोटा बालक अग्नि में हाथ डाले तो वह जल जाएगा और कर्म तत्कालिक फल देगा। किन्तु वही कर्म फिर दुबारा संचित में जमा होकर दूसरे समय फल देता नहीं।*
*तीन साल का छोटा बालक खेल में खटिया में कूदता हो और उसी खटिया में सोए हुए तीन मास के बालक के गले पर पैर पड़ने पर , वह तीन मास के बालक की मृत्यु हो जाए , तो उस 3 साल के बालक पर इंडियन पीनल कोर्ट की कलम 302 के मुताबिक उनका केस चलेगा नहीं । उस कर्म में राग द्वेष होता नहीं। उसी तरह यह कर्म संचित में जमा होता नहीं । छोटी उम्र के बालक ने बिक्री दस्तावेज जैसा कुछ किया हो तो वह कोर्ट मान्य रखती नहीं।*
*छोटी उम्र के बालक को मतदान का भी अधिकार नहीं है । उसी तरह नशे की अवस्था में , अभान अवस्था में, पागलपन में कोई आदमी गंदी गाली बोलता है अगर उत्पाद करता है तो , उसके विरुद्ध ई॰ पी॰ कोर्ट की कलम 323, 504 के अनुसार कोर्ट में केस चल नहीं सकता ।*
*ज्यादा से ज्यादा लोग इकट्ठे होकर उसको ठीक तरह से मारपीट करेंगे और उस तरह उसको अपने कर्मों का तत्काल फल मिलेगा या तो उस पर दया करके उसको रिहा करें, किन्तु ऐसे आदमी के कर्म में राग द्वेष नहीं होने से, संचित करने जमा होते नहीं।*
क्रमश,,,, ✍🏽
#कर्म #कर्म ही पूजा है #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 #🙏💐श्रीमद्भागवत गीता💐🙏 bhagwat geeta #श्रीमद्भागवत गीता के श्लोक ॐ