sn vyas
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🙏🙏🛐ॐ श्री परमात्मने नमः🛐🙏🙏
🙏कर्म का सिद्धांत पुस्तक से 🙏
#भाग०६/०१
प्रारब्ध कर्म
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*संचित कर्म पक कर फल देने के लिए जब तैयार हो जाता है, तो उसको प्रारब्ध कर्म कहते हैं---*
*अनादि काल से अनेक जन्म जन्मांतर के संचित कर्मों के असंख्य करोड़ों हिमालय भर जाए , इतने ढेर जीवन के पीछे जमा होकर पड़े हैं ।*
*उसमें संचित कर्म पक कर फल देने के लिए तैयार हो जाएं, ऐसे प्रारब्ध भोग भोगने के अनुरूप शरीर जीव को प्राप्त होकर , और उस शरीर काल दरमियान उस मुताबिक प्रारब्ध कर्म भोगने के पश्चात ही दे गिरती है।*
*प्रारब्ध कर्म को भोगने के अनुरूप देह, आरोग्य, स्त्री- पुत्रादिक , सुख -दुख आदि उस जीवनकाल दरमियान जीव को आकर मिल जाते हैं। उस प्रारब्ध कर्म को पूरे ढंग से भोगे बिना देह का छुटकारा हो नहीं सकता ।*
*बुढ़ापे में लकवा हो जाए और दस साल तक चारपाई में पड़े पड़े शरीर में से दुर्गंध आने लगे, और हे भगवान अब मेरा कब छुटकारा होगा , मेरी अंतिम यात्रा कब निकलेगी, ऐसा अनेक बार बकवास करता रहे, फिर भी जब तक पूरी तरह प्रारब्ध कर्म भोग नहीं लेते तब तक दे छूटती नहीं ,,,*
*और प्रारब्ध कर्म भोग कर समाप्त होने के बाद लड़का अगर मुंह में पानी डालेगा , तो वह नाक से द्वारा बाहर निकल जाएगा, किंतु एक बूंद भी पानी पीने के लिए या एक भी ज्यादा श्वास लेने के लिए भी जीव खड़ा नहीं रह सकता देह तुरंत ही छूट जाएगी।
प्रारब्ध कर्म का शेष भाग कल ✍️
#कर्म #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 #🙏💐श्रीमद्भागवत गीता💐🙏 bhagwat geeta #श्रीमद्भागवत गीता के श्लोक ॐ
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