sn vyas
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🙏🙏🛐ॐ श्री परमात्मने नमः🛐🙏🙏 🙏कर्म का सिद्धांत पुस्तक से 🙏 #भाग_४३/२ 🏹🎻🪔📝🦚🔥🦚📝🪔🎻🏹 तू अपना नियत कर्म कर -- बाकी झंझट छोड़ दे :* *अपने प्रत्येक कर्म में "मैं " पद का अहंकार छोड़ दें और परमात्मा को केंद्र में रखकर उसकी इच्छा अनुसार उसे प्रसन्न करने के लिए अपना कर्तव्य करेगा तो प्रत्येक कार्य में हार जीत की जिम्मेदारी परमात्मा अपने सिर पर ले लेंगे।* *इतनी सी बात समझ में आ जाए तो तेरा हर छोटा बड़ा कर्म परमात्मा की पूजा का पुष्प बन जाएगा । और प्रत्येक कर्म भक्ति मय बन जाएगा । तेरा कर्म ही तेरी भक्ति बन जाएगा।* *अंतिम सांस तक अपना कर्म करते करते मृत्यु को प्राप्त करना , परमात्मा को प्राप्त करने के समान है । क्योंकि "मृत्यु" अथवा "काल " भगवान का ही स्वरूप है । भगवान गीता में कहते हैं कि--* *मृत्यु सर्वहरश्चाऽहं। (गीता 10-34)* *कालोऽस्मि।(गीता 11-32)* *मृत्यु भी मेरी ही एक विभूति है । मैं ही काल स्वरूप हूं ।* *मैं काल का भी काल हूं। इसलिए मृत्यु को प्राप्त करने में (उस समय ) भय नहीं लगेगा बल्कि परमात्मा से भेंट करने का आनंद होगा और यह परम संसिद्धि है ।* *इस प्रकार ईश्वर - प्रीत्यर्थ किया गया कर्म ,, कर्म न रह कर कर्म योग बन जाता है और ऐसा प्रत्येक कर्म भक्ति मय हो जाता है ।भक्ति में कर्म करने वाले के अंतःकरण में स्वत: ज्ञान का प्रकाश प्रस्फुटित होता है । इस प्रकार कर्म भक्ति और ज्ञान का एक साथ उदय होता है ।* क्रमश: ✍🏽 #कर्म #कर्म ही पूजा है #श्रीमद्भागवत गीता के श्लोक ॐ #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 #🙏💐श्रीमद्भागवत गीता💐🙏 bhagwat geeta
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