sn vyas
793 views 1 days ago
🙏🙏🛐ॐ श्री परमात्मने नमः🛐🙏🙏 🙏कर्म का सिद्धांत पुस्तक से 🙏 #भाग_२८/३ 🏹🎻🪔📝🦚🔥🦚📝🪔🎻🏹 🦚 भगवान प्रारब्ध भोगने में क्या मदद करते है ? 🦚 गतांक से आगे श्री भगवान राम स्वयं कहते हैं ---- मैं जिस दिन चक्रवर्ती राजा होने वाला था ,और सिंहासन पर बैठने वाला था, उसी दिन सुबह मुझे कर्म के कायदे को मान देकर , जटाधारी तपस्वी के वेश में बन में जाना पड़ा है ,,, *भगवान राम उनके पिता दशरथ को ,, पुत्र के वियोग से होने वाले मृत्यु रूपी प्रारब्ध भोगने में मदद न कर सके। उनको कम से कम चौदह वर्ष भी पुन: जीवन दे सके नहीं।* *जिस राम के चरण रज के स्पर्श मात्र से शल्या की अहिल्या हो सकी ,,, पत्थर को भी जो जीवन दान दे सकें,,, वे भगवान खुद अपने पिता को जीवनदान दे सके नहीं ,,,, क्योंकि अहिल्या के पाप पूर्ण हो गए थे । उसका प्रारब्ध जीवन दान देने को तैयार हो गया था । जबकि राजा दशरथ ने श्रवण का वध किया था । वह पाप प्रारब्ध बनकर दशरथ को फल देने के लिए सामने खड़ा था । उसमें खुद भगवान भी हस्तक्षेप नहीं करते।* *गवर्नर ने कायदा किया हो कि वाहन बायी ओर से चलाना ,,, फिर खुद गवर्नर ही अपनी मोटर दाहिनी ओर से चलाएं तो छोटे से छोटा पुलिस भी उनकी मोटर को रोक सकता है। उसमें गवर्नर का कुछ भी नहीं चलेगा।* *भगवान के बनाए हुए कर्म के कायदे का सख्त पालन हो ऐसा भगवान चाहते हैं । तो मानव को उनकी आज्ञा अनुसार भक्ति योग के द्वारा अपने प्रारब्ध कर्म को भोग लेना चाहिए।* क्रमश: अब आगे कल नया भाग ✍🏽 #कर्म #कर्म ही पूजा है #श्रीमद्भागवत गीता के श्लोक ॐ #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 #🙏💐श्रीमद्भागवत गीता💐🙏 bhagwat geeta
12 shares

More like this