sn vyas
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🙏🙏🛐ॐ श्री परमात्मने नमः🛐🙏🙏 🙏कर्म का सिद्धांत पुस्तक से 🙏 #भाग_४१/२ गतांक से आगे (विश्राम) योग: कर्मसु कौशलम् । एक विद्यार्थी मन को स्थिर रखकर पढ़ाई करें और मन एकाग्र करके खेले तो यह उसका योग माना जाएगा। *महर्षि पतंजलि योग शास्त्र के प्रणेता माने जाते हैं । उन्होंने अपने योग सूत्र के प्रथम सूत्र में ही योग की परिभाषा स्पष्ट की है ।* *योग: चित्तवृत्ति निरोध:* *मनोवृति की एकाग्रता का नाम ही योग है और मनोवृति का निरोध होते ही स्वयं " कर्मसु कौशलम् " हो जाएगा।* *ऐसा योग आप आज से और अभी से करेंगे तो काम हो जाएगा । अन्यथा आप समझेंगे कि रिटायर होंगे , बूढ़े होंगे , लकवा होगा तब और खटिया में पड़े पड़े जब शरीर दुर्गंध देने लगेगा , तब योग करेंगे , तो आप नहीं कर पाएंगे।* *गीता का योग सामान्य व्यक्ति के लिए दैनिक दिनचर्या में प्रशिक्षण उपयोगी न हो तो गीता के सात सौ श्लोक मात्र कंठस्थ करने का कोई अर्थ नहीं है ।* *जीवन व्यवहार में उपयोगी सादा , सरल और प्रत्येक व्यक्ति के लिए सुलभ योग की परिभाषा को समझ कर जीवन का प्रत्येक कर्म करने से व्यक्ति का प्रत्येक कर्म भक्ति मय बन जाता है , फिर उसका भगवान से योग होने में देर नहीं लगती।* क्रमश: ✍🏽 #कर्म #कर्म ही पूजा है #श्रीमद्भागवत गीता के श्लोक ॐ #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 #🙏💐श्रीमद्भागवत गीता💐🙏 bhagwat geeta
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