विश्व जागरूकता दिवस

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सुशील मेहता
502 views 1 days ago
विश्व अंगदान दिवस लोगों को अपने बहुमूल्य अंग दान करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए 13 अगस्त को विश्व अंग दान दिवस (WODD) मनाया जाता है। हर साल, अंगों की अनुपलब्धता के कारण लगभग 5 लाख लोग अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे हैं। प्रत्यारोपण की संख्या और अंग उपलब्ध होने की संख्या के बीच एक व्यापक अंतर है। अंग दान एक ऐसी प्रक्रिया है। अंग दाता अंग ग्राही को अंग दान करता है। दाता जीवित या मृत हो सकता है। दान किए जा सकने वाले अंग गुर्दे, फेफड़े, दिल, आंख, यकृत, पैनक्रिया, कॉर्निया, छोटी आंत, त्वचा के ऊतक, हड्डी के ऊतक, हृदय वाल्व और नस हैं।अंगदान की पहली शर्त है व्यक्ति का स्वस्थ होना। जैसे ब्रेन डेड व्यक्ति, एचआईवी, डायबिटीज, कैंसर, गंभीर संक्रमण, किडनी और हृदय रोगों से पीडि़त न हो। अंगदान दो तरह से किए जा सकते हैं8। 1. लिविंग डोनर: जीवित रहते हुए कोई भी व्यक्ति शरीर के कुछ अंग जैसे किडनी, बोन मैरो (अस्थि मज्जा), लिवर और फेफड़े का कुछ हिस्सा परिजनों को डोनेट कर सकता है। 2. ब्रेन डेड: इसे केडेवर डोनर भी कहते हैं। 18 साल से कम उम्र के युवा पैरेंट्स की अनुमति और इससे अधिक उम्र होने पर अंगदान के लिए रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। ब्रेन डेड घोषित होने पर किडनी, लीवर, फेफड़े, पैन्क्रियाज, ओवरी, गर्भाशय, आंखें, हड्डियां और त्वचा का दूसरे शरीर में ट्रांसप्लांट करते हैं।पहला सफल अंग प्रत्यारोपण 1954 में संयुक्त राज्य अमेरिका में किया गया था। डॉक्टर जोसेफ मरे ने 1990 में जुड़वां भाइयों रोनाल्ड और रिचर्ड हेरिक के बीच किडनी प्रत्यारोपण को सफलतापूर्वक करने के लिए फिजियोलॉजी और मेडिसिन में नोबेल पुरस्कार जीता। अब देश और दुनिया में अंग प्रत्यारोपण बढ़ गए हैं। लोग अंग डोनेट भी कर रहे हैं। #जागरूकता दिवस
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सुशील मेहता
623 views 5 days ago
राष्ट्रीय डिवार्मीग दिवस आज नेशनल डीवार्मिंग डे है, यानी कृमि मुक्ति दिवस। यहा उस कृमि या परजीवी की बात हम कर रहे हैं, जो बच्चों के पेट में रहता है और उनके पोषण के संतुलन को बिगाड़ देता है। इस कारण कई तरह की बीमारियां बच्चों में होती है। एनीमिया इनमें सबसे आम बीमारी हो चुकी है। एक सर्वे के मुताबिक देश के हर 10 में से छह बच्चे इसी बीमारी से ग्रस्त हैं और इसका कारण पेट में मौजूद यह कृमि ही है। इसीलिए हर साल 10 फरवरी और 10 अगस्त को कृमि मुक्ति दिवस के रूप में मनाया जाता है। आपको बता दें कि इस कृमि को सॉइल ट्रांसमिटेड हेल्मिन्थ्स (Soil Transmitted Helminths) कहा जाता है। यानी एसटीएच, जो पेट के इस संक्रमण के लिए जिम्मेदार होता है। वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) आंकड़े जारी कर कह चुका है कि विश्व में सबसे ज्यादा एसटीएच भारत में हैं जिसकेकारण 1 से 14 वर्ष के 220 मिलियन बच्चों के स्वास्थ्य को खतरा है। इतने बच्चे इस कृमि या परजीवी से पेट का संक्रमण झेल रहे हैं। इस संक्रमण को खत्म करने के उद्देश्य से हर साल इस दिन स्कूलों और आंगनबाड़ियों में बच्चों को एलबेंडाजोल नामक दवाई दी जाती है, जो इस परजीवी को पेट से बाहर निकालने का काम करती है। यह परजीवी पेट तक पहुंचने वाले हर पोषण को खा जाता है और उस पोषण का लाभ संक्रमित बच्चे को नहीं मिल पाता। देश में बच्चों का बड़ा तबका कुपोषण का शिकार है तो एनीमिया के आंकड़े भी चौंकाने वाले हैं। ऐसे बच्चों को कृमि मुक्त बनाने के लिए ही राष्ट्रीय कृमि निवारण दिवस की शुरुआत वर्ष 2015 में केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (Ministry Of Health And Family Welfare) की ओर से की गई थी, इसके तहत देशभर के 1 से 19 वर्ष आयु के बच्चों को कवर किया जाता है। इस एक दिवसीय कार्यक्रम में पोषण संबंधी स्थिति जानने के साथ बच्चों के समग्र स्वास्थ्य में सुधार के लिए बच्चों को परजीवी आंत्र कृमि संक्रमण से मुक्त करने के लिये दवा उपलब्ध कराई जाती है।नवजात शिशुओं और स्कूली बच्चों को परजीवी कृमि संक्रमण से संरक्षित करने के लिए और इसके प्रति लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए प्रत्येक वर्ष 10 फरवरी को नेशनल डीवॉर्मिंग डे के रूप में मनाया जाता है। इस दिवस का आयोजन संयुक्त रूप से मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (Ministry Of Women And Child Development) की ओर से भी सहयोग किया जाता है। #जागरूकता दिवस
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सुशील मेहता
566 views 5 days ago
डेंगू निरोधक दिवस बारिश का मौसम ही बीमारियों का मौसम होता है. इसी मौसम में सबसे ज्यादा मच्छर और कीड़े पनपते हैं. परिणाम यह होता है कि लोगों को डेंगू जैसी खतरनाक बीमारी हो जाती है. यही कारण है कि प्रतिवर्ष '10 अगस्त' को 'डेंगू निरोधक दिवस' मनाया जाता है। डेंगू वायरस द्वारा होता है, इसे "डेन वायरस" भी कहते हैं. इस रोग का वाहक एडीज मच्छर की दो प्रजातियां हैं- एडीज एजिपटाई (Aedes aegypti) और एडीज एल्बोपेक्टस।डेंगू बुख़ार उस मच्छर के काटने से होता है जिसने पहले से ही किसी डेंगू के मरीज़ को काटा है. यह मच्छर बरसात के मौसम में ज़्यादा फैलते हैं और यह उन जगहों पर तेज़ी से फैलते हैं जहाँ पानी जमा हो। - तेज बुखार के साथ नाक बहना, खांसी, आखों के पीछे दर्द, जोड़ों के दर्द और त्वचा पर हल्के रैश होते हैं। पेट खराब हो सकता है। जी मितला सकता है. उल्टी भी आ सकती है। डेंगू बुख़ार को "हड्डीतोड़ बुख़ार" के नाम से भी जाना जाता है, पीड़ित लोगों को इतना अधिक दर्द हो सकता है। प्लेटलेट्स का स्तर कम होता है। दूसरा डेंगू शॉक सिंड्रोम है। ब्लड प्रेसर कम हो सकता है। ये इसके मुख्य लक्षण हैं। डेंगू बुखार दिन में काटने वाले दो प्रकार के मच्छरों से फैलता है। ये मच्छर एडिज इजिप्टी तथा एडिज एल्बोपेक्टस के नाम से जाने जाते हैं। Dengue Fever “डेंगू” वायरस के संक्रमण द्वारा होता है इसे “डेन वायरस” भी कहते हैं। डेंगू वायरस चार प्रकार के होते हैं, जिसे डेन-1, डेन-2, डेन-3 और डेन-4 (DEN-1, DEN-2, DEN-3, DEN-4) के नाम से जानते है। DEN 1 और DEN 3 के मुकाबले DEN 2 और DEN 4 कम खतरनाक होते है । डेंगू सभी मच्छर से नहीं फैलता। यह केवल कुछ जाति के मच्छर से ही फैलता है जो की मुख्यतः “फ्लाविविरिडे” परिवार तथा “फ्लाविविरस” जीन का हिस्सा होते है। #जागरूकता दिवस
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