सुशील मेहता
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डेंगू निरोधक दिवस
बारिश का मौसम ही बीमारियों का मौसम होता है. इसी मौसम में सबसे ज्यादा मच्छर और कीड़े पनपते हैं. परिणाम यह होता है कि लोगों को डेंगू जैसी खतरनाक बीमारी हो जाती है. यही कारण है कि प्रतिवर्ष '10 अगस्त' को 'डेंगू निरोधक दिवस' मनाया जाता है। डेंगू वायरस द्वारा होता है, इसे "डेन वायरस" भी कहते हैं. इस रोग का वाहक एडीज मच्छर की दो प्रजातियां हैं- एडीज एजिपटाई (Aedes aegypti) और एडीज एल्बोपेक्टस।डेंगू बुख़ार उस मच्छर के काटने से होता है जिसने पहले से ही किसी डेंगू के मरीज़ को काटा है. यह मच्छर बरसात के मौसम में ज़्यादा फैलते हैं और यह उन जगहों पर तेज़ी से फैलते हैं जहाँ पानी जमा हो।
- तेज बुखार के साथ नाक बहना, खांसी, आखों के पीछे दर्द, जोड़ों के दर्द और त्वचा पर हल्के रैश होते हैं। पेट खराब हो सकता है। जी मितला सकता है. उल्टी भी आ सकती है। डेंगू बुख़ार को "हड्डीतोड़ बुख़ार" के नाम से भी जाना जाता है, पीड़ित लोगों को इतना अधिक दर्द हो सकता है। प्लेटलेट्स का स्तर कम होता है। दूसरा डेंगू शॉक सिंड्रोम है।
ब्लड प्रेसर कम हो सकता है। ये इसके मुख्य लक्षण हैं। डेंगू बुखार दिन में काटने वाले दो प्रकार के मच्छरों से फैलता है। ये मच्छर एडिज इजिप्टी तथा एडिज एल्बोपेक्टस के नाम से जाने जाते हैं। Dengue Fever “डेंगू” वायरस के संक्रमण द्वारा होता है इसे “डेन वायरस” भी कहते हैं। डेंगू वायरस चार प्रकार के होते हैं, जिसे डेन-1, डेन-2, डेन-3 और डेन-4 (DEN-1, DEN-2, DEN-3, DEN-4) के नाम से जानते है। DEN 1 और DEN 3 के मुकाबले DEN 2 और DEN 4 कम खतरनाक होते है । डेंगू सभी मच्छर से नहीं फैलता। यह केवल कुछ जाति के मच्छर से ही फैलता है जो की मुख्यतः “फ्लाविविरिडे” परिवार तथा “फ्लाविविरस” जीन का हिस्सा होते है। #जागरूकता दिवस
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