सुशील मेहता
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विश्व टाईगर दिवस
हर साल पूरे विश्व में 29 जुलाई को बाघों के पारिस्थतिकीय महत्व को उजागर करने के नजरिए से विश्व बाघ दिवस मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 2010 में सेंट पीटर्सबर्ग टाइगर शिखर सम्मेलन में बाघों की दुर्दशा पर दुनिया का ध्यान आकर्षित करने के लक्ष्य के साथ हुई थी। भारत में भारतीय वन्य जीव बोर्ड द्वारा 1972 में शेर के स्थान पर बाघ को भारत के राष्ट्रीय पशु के रूप में अपनाया गया था। देश के बड़े हिस्सों में इनकी मौजूदगी के कारण ही इन्हें भारत के राष्ट्रीय पशु के रूप में चुना गया था। इसके बाद सरकार ने बाघों की कम होती संख्या को देखते हुए 1973 में बाघ बचाओ परियोजना शुरू की थी। जिसके तहत चुने हुए बाघ आरक्षित क्षेत्रों को विशिष्ट दर्जा दिया गया और वहां विशेष संरक्षण के लिए प्रयास किए गए, इसी परियोजना को अब नेशनल टाइगर अथॉरिटी बना दिया गया है। वन्य जीव संरक्षण कानून के तहत राष्ट्रीय पशु बाघ को मारने पर सात साल सजा का प्रावधान है। पर लचर स्थिति के कारण इस पर सही से अमल नहीं हो पाता। तो इसके लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत है
हर साल पूरे विश्व में 29 जुलाई को बाघों के पारिस्थतिकीय महत्व को उजागर करने के नजरिए से विश्व बाघ दिवस मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 2010 में सेंट पीटर्सबर्ग टाइगर शिखर सम्मेलन में बाघों की दुर्दशा पर दुनिया का ध्यान आकर्षित करने के लक्ष्य के साथ हुई थी।
जब बाघ बना राष्ट्रीय पशु
भारत में भारतीय वन्य जीव बोर्ड द्वारा 1972 में शेर के स्थान पर बाघ को भारत के राष्ट्रीय पशु के रूप में अपनाया गया था। देश के बड़े हिस्सों में इनकी मौजूदगी के कारण ही इन्हें भारत के राष्ट्रीय पशु के रूप में चुना गया था। इसके बाद सरकार ने बाघों की कम होती संख्या को देखते हुए 1973 में बाघ बचाओ परियोजना शुरू की थी। जिसके तहत चुने हुए बाघ आरक्षित क्षेत्रों को विशिष्ट दर्जा दिया गया और वहां विशेष संरक्षण के लिए प्रयास किए गए, इसी परियोजना को अब नेशनल टाइगर अथॉरिटी बना दिया गया है।
आ #जागरूकता दिवस
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