Jaswant Dass
663 views
5 days ago
#GodNightFriday #रामनवमी_पर_जानें_आदिराम_कौन . ऊपर के लोक एक बादशाह का जिक्र है- उसके कोई बेटा बेटी नहीं था। उसने क्या किया, एक 8 मंजिल का मकान बनवाया। पहली मंजिल पर उसने कौड़ियां फैला दी, दूसरी मंजिल पर पैसे, तीसरी मंजिल पर दुअन्नियां, चौथी पर चवन्निया, पांचवी पर रुपए, छठी पर मोहरे, सातवीं मंजिल पर हीरे, पन्ने, मोती वगैरह और 8 वीं मंजिल पर वह खुद बैठ गया। उसने सारी प्रजा को हुक्म दिया कि कल इस महल में से जो जो चीज किसी को जरूरत है लूटकर ले जाए। जो कमजोर दिल था उसने कौड़ियों की गठरी बांध ली। जो जरा उससे मजबूत दिल वाला था वह आगे गया और पैसों को देखकर पैसों की गठरी बांध ली। ऐसे ही जो लोग और ऊपर की मंजिलों में गए जो-जो उनको मिला, लेकर घरों को वापस आ गए। उनमें केवल एक आदमी ऐसा था, जिस ने कहा कि धुर सबसे ऊपर चले, देखें तो सही कि ऊपर क्या है? वह जब ऊपर गया तो बादशाह ने अपना ताज उतारकर उसके सिर पर रख दिया। यह तो उदाहरण है। अब इंद्रियों के भोग, शराब, कबाब, यह जो लज्जते हैं, यह कौड़िया हैं, दर्जे ब दर्जे जो ऊपर जाते हैं, किसी को स्वर्ग, किसी को ब्रह्म, किसी को पारब्रह्म, मिलता है। लेकिन सचखंड अथार्त सतलोक तक कोई विरला ही पहुंचता है। जो संत सतलोक से आते हैं, उनकी ही ताकत है कि वह करोड़ों जीवो को साथ सतलोक ले जाते हैं। गुरु नानक साहब कहते हैं कि गुरमुखि कोटि उधारदा भाई, दे नावै एक कणी। लेकिन हमारे ह्रदय मलै हैं। हम विश्वास ही नहीं करते। संत कहते हैं कि हमारे अंदर करोड़ों प्राणों का प्राण वह "नाम" है। यह अंदर चढ़ता नहीं और उस लज्जत को लेता नहीं। वही नाम आज संत रामपाल दास जी महाराज बता रहे है। सतलोक की स्थिति बताते है। सतलोक का स्थिति का वर्णन वहा का स्वामी ही कर सकता है। Factful Debates YouTube #कबीर