।। ॐ ।।
सर्वभूतस्थमात्मानं सर्वभूतानि चात्मनि।
ईक्षते योगयुक्तात्मा सर्वत्र समदर्शनः।।
योग के परिणाम से युक्त आत्मावाला, सबमें समभाव से देखनेवाला योगी आत्मा को सम्पूर्ण प्राणियों में व्याप्त देखता है और सम्पूर्ण भूतों को आत्मा में ही प्रवाहित देखता है। #यथार्थ गीता#🧘सदगुरु जी🙏#❤️जीवन की सीख#🙏गीता ज्ञान🛕#🙏🏻आध्यात्मिकता😇