।। ॐ ।।
यत्र काले त्वनावृत्तिमावृत्तिं चैव योगिनः।
प्रयाता यान्ति तं कालं वक्ष्यामि भरतर्षभ॥
हे अर्जुन ! जिस काल में शरीर त्यागकर गये हुए योगीजन पुनर्जन्म को नहीं पाते और जिस काल में शरीर त्यागने पर पुनर्जन्म पाते हैं, मैं अब उस काल का वर्णन करता हूँ। #यथार्थ गीता#❤️जीवन की सीख#🧘सदगुरु जी🙏#🙏🏻आध्यात्मिकता😇#🙏गीता ज्ञान🛕