।। ॐ ।।
यदा विनियतं चित्तमात्मन्येवावतिष्ठते।
निःस्पृहः सर्वकामेभ्यो युक्त इत्युच्यते तदा।।
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इस प्रकार योग के अभ्यास से विशेष रूप से वश में किया हुआ चित्त जिस काल में परमात्मा में भली प्रकार स्थित हो जाता है, विलीन-सा हो जाता है, उस काल में सम्पूर्ण कामनाओं से रहित हुआ पुरुष योगयुक्त कहा जाता है।