Jagdish Sharma
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16 days ago
।। ॐ ।। यदा विनियतं चित्तमात्मन्येवावतिष्ठते। निःस्पृहः सर्वकामेभ्यो युक्त इत्युच्यते तदा।। #यथार्थ गीता #❤️जीवन की सीख #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 इस प्रकार योग के अभ्यास से विशेष रूप से वश में किया हुआ चित्त जिस काल में परमात्मा में भली प्रकार स्थित हो जाता है, विलीन-सा हो जाता है, उस काल में सम्पूर्ण कामनाओं से रहित हुआ पुरुष योगयुक्त कहा जाता है।