22 22 22 22
मुझसे आँख मिलाकर तो देखो
अपने दिल मे बसाकर तो देखो
गम हो जायेंगे फ़ना सारे
अपने पास बिठाकर तो देखो
महक उठेंगे नग्मे सारे
लबो पे इन्हें सजाकर तो देखो
खिल उठेगी हर कली दिल की
दिल मे प्यार जगाकर तो देखो
डर क्यूँ रहे हो जहाँ से तुम
सर इक बार उठाकर तो देखो
शर्म से छुप जायेगा चाँद भी
रुख से पर्दे हटाकर तो देखो
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
16/11/2017
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